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कुत्तों के बच्चों की एडॉप्शन ड्राइव, आवारा डॉग्स की समस्या को खत्म करने का अनोखा तरीका

जबलपुर में सड़क पर घूमने वाले आवारा कुत्तों के बच्चों के लिए एडॉप्शन ड्राइव शुरू की गई है, युवाओं की संस्था ने उठाया महत्वपूर्ण कदम.

JABALPUR PUPPY ADOPTION DRIVE
जबलपुर में कुत्ते के बच्चों के लिए एडॉप्शन की ड्राइव (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 5, 2026 at 10:33 PM IST

4 Min Read
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जबलपुर: आवारा जानवर समाज के लिए समस्या है. अक्सर लोग इसके निदान के लिए सरकार के ऊपर जिम्मेदारी थोप देते हैं, लेकिन जबलपुर के युवाओं की एक संस्था ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है. इन युवाओं ने सड़क पर घूमने वाले आवारा कुत्तों के बच्चों के लिए एडॉप्शन की ड्राइव शुरू की है. ये सबसे पहले अनाथ बच्चों को ऐसे लोगों को सौंप रहे हैं जो कुत्ते पालना चाहते हैं. इन युवाओं का कहना है कि इस तरीके से सड़क से आवारा कुत्तों की समस्या भी कम होगी और कुत्ते पालने वाले लोगों का शौक भी पूरा होगा.

एडॉप्शन ड्राइव की शुरूआत

जबलपुर के पराग एक आशा वन नाम की संस्था चलाते हैं. इस संस्था में युवा लड़के लड़कियां शामिल हैं. पराग एक व्यापारी हैं और उन्होंने अक्सर देखा था कि शहरों में आवारा देसी कुत्तों पर प्रशासन का नियंत्रण नहीं हो पा रहा है. इसकी वजह से इनकी संख्या बढ़ रही है और कई बार ऐसा होता है कि एक्सीडेंट में कुत्तों की मौत हो जाती है. बड़ी समस्या तब होती है जब फीडिंग कराने वाली कोई फीमेल डॉग मर जाती है ऐसी स्थिति में कुत्ते के छोटे-छोटे बच्चे सड़क पर लाचार बने घूमते रहते हैं. कई बार यह बच्चे सड़क दुर्घटना का भी शिकार भी हो जाते हैं.

युवाओं ने निकाला आवारा कुत्तों की समस्या को खत्म करने का अनोखा तरीका (ETV Bharat)

संस्था के सदस्यों ने अपने घरों में बनाया शेल्टर

इस समस्या पर पराग ने अपने दोस्तों से चर्चा की और उन्होंने एक स्वयंसेवी संस्था बनाई. संस्था के सभी लोगों ने अपने घरों में छोटे-छोटे शेल्टर बनाए हैं. सोशल मीडिया के जरिए इन युवाओं को जानकारी मिलती है कि कहीं कोई अनाथ कुत्ते के बच्चे घूम रहे हैं तो उन्हें रेस्क्यू किया जाता है और दोस्तों के घर के केंद्र में रख दिया जाता है. इसके बाद शुरू होती है कुत्ते के बच्चे के एडॉप्शन की प्रक्रिया. इसमें सोशल मीडिया के जरिए ही लोगों से अपील की जाती है कि वह इन बच्चों को अपने पास रखें.

डॉग शो के लिए देसी नस्ल के कुत्तों को किया जा रहा ट्रेंड

संस्था की सदस्य दीपिका चौकसे ने बताया कि "हम लोग केवल अनाथ कुत्तों के बच्चों पर ही काम करना नहीं चाहते हैं, बल्कि ऐसे सभी जानवरों पर काम करना चाहते हैं जो किसी वजह से अनाथ हो जाते हैं. हम लोग स्टेरलाइजेशन की प्रक्रिया वैक्सीनेशन का कार्यक्रम इन सबके लिए भी कोशिश कर रहे हैं. कुछ देसी नस्ल के कुत्तों को ट्रेंड भी कर रहे हैं जिन्हें विदेशी नस्ल के कुत्तों की तरह ही डॉग शो में पार्टिसिपेट करवाया जा सके."

देसी नस्ल के कुत्तों को शरण देने की अपील

संस्था की सदस्य हर्षिता ने बताया कि "वे जॉब करती हैं लेकिन अपनी नौकरी के साथ में कुछ समय निकाल लेती हैं. जिससे वह इन मूक जानवरों को मदद कर सकें." जबलपुर में डॉग शो का आयोजन करवाने वाली संस्था के सदस्य डॉ. अंकुर चौधरी का भी कहना है कि "लोगों को आगे बढ़कर इन अनाथ देसी नस्ल के कुत्तों को शरण देनी चाहिए. इन कुत्तों को बहुत कम देखरेख में पाला जा सकता है. यदि सड़क पर घूमने वाले कुत्तों को लोग पालना शुरू कर दें तो शहर से आवारा कुत्तों की समस्या ही खत्म हो जाए.

समाज सेवा में कई बार हमने देखा है कि लोग केवल फोटो खिंचवाने के लिए ही समाज सेवा करते हुए नजर आते हैं, लेकिन नई युवा पीढ़ी समाज सेवा के काम को पूरी शिद्दत से कर रही है. यह लोग जिस जिम्मेदारी को उठा रहे हैं उसे अंजाम तक भी पहुंचा रहे हैं. अच्छी बात यह है कि इनका कोई दूसरा उद्देश्य भी नहीं है नहीं तो समाज में समाज सेवा को व्यापार बनाने वाले लोगों की भी कमी नहीं है."