दिल्ली में फायर NOC जारी होने पर ब्रेक, लगभग 30 कंपनियों में से एक भी नहीं पाई गई योग्य
दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के अनुसार शहर में कम से कम 120 फायर स्टेशन होने चाहिए,लेकिन वर्तमान में सिर्फ 71 फायर स्टेशन है. धनंजय वर्मा- रिपोर्टर

Published : September 2, 2026 at 8:44 PM IST
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में बहुमंजिला इमारतों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों व व्यावसायिक परिसरों की सुरक्षा को पुख्ता बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों को धक्का लगा है. लगभग 30 निजी आवेदनों में से एक भी संस्था निर्धारित तकनीकी मानकों और योग्यता शर्तों पर खरी नहीं उतर सकी. नतीजतन लागू करने की 26 अगस्त की समय-सीमा बीतने के बाद अब पुरानी व्यवस्था को तीन महीने आगे बढ़ाने की सिफारिश की जा रही है.
दिल्ली फायर सर्विस (डीएफएस) के चीफ फायर ऑफिसर एके मलिक के अनुसार 'फायर एनओसी' प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए ‘दिल्ली अग्निशमन सेवा (संशोधन) नियम) 2025’ का क्रियान्वयन किया जाना था. 26 मई 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार 24 अगस्त से थर्ड-पार्टी प्राइवेट ऑडिटर्स (निजी इंजीनियरों/फर्मों) द्वारा फायर सेफ्टी ऑडिट करने व एनओसी जारी करने की नई व्यवस्था लागू होनी थी. लेकिन इस व्यवस्था के तहत सूचीबद्ध होने के लिए आए लगभग 30 निजी आवेदनों में से एक भी संस्था निर्धारित तकनीकी मानकों और योग्यता शर्तों पर खरी नहीं उतर सकी.परिणामस्वरूप 26 अगस्त की समय-सीमा बीतने के बाद राजधानी में सैकडों नई एनओसी (Fire Safety Certificate - FSC) और रिन्यूअल आवेदनों पर विचार करना बंद कर दिया गया है. इस अभूतपूर्व प्रशासनिक संकट से निपटने के लिए अग्निशमन विभाग ने दिल्ली सरकार को पत्र भेजकर पुरानी व्यवस्था को 3 महीने आगे बढ़ाने की सिफारिश की है, जिससे दोबारा विज्ञापन जारी कर पात्र और उचित एजेंसियों को सूचीबद्ध किया जा सके.
बता दें कि उपहार सिनेमा, अनाज मंडी, मुंडका और विवेक विहार के न्यूबोर्न चाइल्ड अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांडों से सबक लेते हुए दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने तकनीक व पारदर्शिता पर आधारित नए नियम तैयार दिल्ली अग्निशमन सेवा (संशोधन) नियम) 2025 की सिफारिश की थी. अभी तक वर्ष 2010 के पुराने नियमों के तहत ही फायर सेफ्टी ऑडिट कर NOC दी जा रही थी.

फायर एनओसी (FSC) प्राप्त करने की नई 5-चरणबद्ध डिजिटल प्रक्रिया:
नए संशोधित नियमों में फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (FSC) प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल कर मानवीय हस्तक्षेप को समाप्त कर दिया गया है.
- ऑडिटर चयन: भवन स्वामी दिल्ली फायर सर्विस के पोर्टल पर पंजीकृत निजी ऑडिटर्स में से किसी एक का चयन करेगा.
- भौतिक निरीक्षण: ऑडिटर मौके पर जाकर निकास मार्ग, स्प्रिंकलर/हाइड्रेंट प्रेशर, वाटर टैंक क्षमता और स्मोक डिटेक्टर्स सहित 20 प्रमुख मानकों की जांच करेगा.
- घोषणा पत्र : मानक सही पाए जाने पर ऑडिटर कानूनी घोषणा पत्र जारी करेगा.
- प्रमाणपत्र जारी करना : ऑडिटर अपने डिजिटल सिग्नेचर से 'अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र' जारी करेगा.
- डिजिटल अपलोडिंग: 1,000 रुपये के प्रोसेसिंग शुल्क के साथ दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड होते ही एफएससी कानूनी रूप से प्रभावी हो जाएगा.
- लापरवाही पर 'डबल-लॉकिंग सुरक्षा' व कानूनी डंडा: प्राइवेट ऑडिटर्स की मनमर्जी रोकने के लिए सरकार ने कड़े कानूनी प्रावधान किये हैं.
- 5% औचक निरीक्षण: दिल्ली फायर सर्विस की विजिलेंस विंग हर तिमाही में जारी की गई कम से कम 5% एनओसी का बिना पूर्व सूचना के औचक भौतिक सत्यापन करेगी.
- भारी आर्थिक दंड व ब्लैकलिस्टिंग: गलत रिपोर्ट पर 2 लाख से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और दूसरी बार गड़बड़ी पाए जाने पर आजीवन प्रतिबंध.
- 'लोक सेवक' का दर्जा व आपराधिक मुकदमा: नियम 35(8) के तहत ऑडिटर्स को भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 2(28)(K)(i) के तहत 'लोक सेवक' माना गया है. यदि उनके द्वारा प्रमाणित इमारत में लापरवाही से आग लगती है, तो ऑडिटर के खिलाफ सीधे आपराधिक एफआईआर दर्ज होगी. जेल भी जाना पड़ सकता है.
- हितों का टकराव : यदि किसी ऑडिटर ने इमारत की डिजाइनिंग, कंसल्टेंसी या उपकरणों के मेंटेनेंस का काम किया है, तो वह उसका ऑडिट नहीं कर सकता है.
तकनीक का पहरा: आधारित स्वचालित सतत निगरानी प्रणाली : ये भी एक बड़ा बदलाव लागू होना है , जो ऑटोमेटिक कंटीन्यूअस मॉनिटरिंग सिस्टम (ACMS) तकनीक है. ये इमारतों के सुरक्षा तंत्र पर 24 घंटे ऑनलाइन नजर रखेगी.
- प्रत्येक 1 मिनट में सिंक: इमारतों के फायर पंप व प्रेशर लाइन से जुड़े डिवाइस हर 1 मिनट में लाइव डेटा डीएफएस के क्लाउड पोर्टल पर भेजेंगे.
- 15 मिनट का ऑटो-अलर्ट: यदि 15 मिनट तक डेटा बंद रहता है, तो पोर्टल तुरंत बिल्डिंग मालिक और ऑडिटर को चेतावनी एसएमएस भेजेगा. इस डिवाइस में 7 घंटे का पावर बैकअप व 10,000 इवेंट का लोकल स्टोरेज होगा.
- दो चरणों में लागू: पहले चरण में चेतावनी सिर्फ मालिक व ऑडिटर को मिलेगी, जबकि दूसरे चरण में सीधे केंद्रीय दिल्ली फायर कंट्रोल रूम से जोड़कर तत्काल सीलिंग/एनओसी रद्दीकरण की कार्रवाई की जाएगी.
विभाग का भीषण मैनपावर व इंफ्रास्ट्रक्चर संकट
फायर सर्विस में सरकारी तंत्र की सीमाओं के कारण निजी क्षेत्र को शामिल करना अनिवार्य हो गया था. दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के अनुसार शहर में कम से कम 120 फायर स्टेशन होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में केवल 71 सक्रिय फायर स्टेशन ही उपलब्ध हैं. अभी भी 49 फायर स्टेशन की भारी कमी है. दिल्ली की अग्नि सुरक्षा के लिए जहां 12,000 से अधिक ऑपरेशनल स्टाफ की आवश्यकता है. वहीं विभाग के पास सिर्फ 2,480 कर्मचारी ही तैनात हैं. लगभग 9,600 कर्मियों की इस कमी के कारण लाखों इमारतों का समय पर भौतिक निरीक्षण करना सरकारी तंत्र के लिए असंभव हो चुका था.

अग्नि जोखिम के तहत आने वाले प्रमुख भवन
संशोधित नियम 27 के अनुसार दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और नई दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (NDMC) क्षेत्रों में आने वाले विभिन्न परिसरों के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (FSC) लेना अनिवार्य किया गया है. इसके तहत आवासीय सोसायटियों (Class A-2) के लिए 15 मीटर से अधिक ऊंचाई या 5 से अधिक मंजिलों पर एनओसी अनिवार्य है। वहीं, होटल व गेस्ट हाउस (Class A-3) के मामले में 12 मीटर से अधिक ऊंचाई या 4 या उससे अधिक मंजिलों पर यह लागू होगा.
शैक्षणिक भवनों (Class B) तथा अस्पतालों व नर्सिंग होम (Class C) के लिए 9 मीटर से अधिक ऊंचाई या 3 से अधिक मंजिलों पर एफएससी लेना आवश्यक कर दिया गया है. इसके अतिरिक्त मॉल, सिनेमा, रेस्टोरेंट व बैंक्वेट हॉल (Class D) सभी आकार और क्षमता में अनिवार्य श्रेणी में शामिल हैं. औद्योगिक व भंडारण भवनों (Class G & H) में 250 वर्ग मीटर से अधिक कवर्ड एरिया होने पर और 100 वर्ग मीटर से अधिक के जोखिमयुक्त/केमिकल भंडारण भवनों (Class I) के लिए भी फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया गया है.

200 से अधिक अटकी हुई एनओसी फाइलें
अभी तक थर्ड पार्टी ऑडिटर का चयन न हो पाने के कारण 200 से अधिक अटकी हुई एनओसी फाइलों के कारण राजधानी का रियल एस्टेट और व्यावसायिक क्षेत्र ठहर सा गया है. आने वाले दिनों ने इन फाइलों की संख्या और भी बढ़ेगी. दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारियों के मुताबिक ऑनलाइन और ऑफलाइन मिलकर रोजाना 10 से 15 फाइल नए फायर एनओसी या रिन्यूअल के लिए आती हैं. यदि दिल्ली सरकार द्वारा 3 महीने का समय विस्तार मंजूर किया जाता है, तो अस्थायी रूप से फायर अधिकारी पुरानी व्यवस्था से निरीक्षण कर सकेंगे, जिससे आम जनता व कारोबारियों को राहत मिलेगी और विभाग को नई योग्य एजेंसियों को सूचीबद्ध करने का दोबारा मौका मिल सकेगा. हालांकि अभी तक दिल्ली सरकार सरकार की तरफ से 3 महीने के विस्तार को मंजूरी नहीं मिली है.
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