झारखंड पुलिस की वीरता को बड़ा सम्मान, आईपीएस अमोल होमकर, माइकल राज सहित 14 को केंद्रीय गृह मंत्रालय दक्षता पदक
झारखंड में नक्सलियों का सफाया करने वाले आईपीएस अमोल वेणुकांत होमकर को केंद्रीय गृह मंत्रालय दक्षता पदक से नवाजा गया है.

Published : October 31, 2025 at 12:42 PM IST
|Updated : October 31, 2025 at 1:16 PM IST
रांची: झारखंड पुलिस की वीरता को एक बार फिर से बड़ा सम्मान मिला है. अपने विशेष रणनीति के बल पर झारखंड में नक्सलियों का सफाया करने वाले आईपीएस अमोल वेणुकांत होमकर को केंद्रीय गृह मंत्रालय दक्षता पदक से नवाजा गया है. अमोल होमकर के अलावा झारखंड पुलिस के अन्य 13 पुलिस अफसरों को भी इस पदक से सम्मानित किया गया है.
पदकों का हुआ ऐलान
केंद्रीय गृह मंत्रालय दक्ष पदक का ऐलान कर दिया गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय दक्षता पदक हर साल 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर प्रदान किया जाता है. यह पदक पुलिसकर्मियों के द्वारा विशेष अभियान, जांच और फोरेंसिक विज्ञान में असाधारण सेवा के लिए प्रदान किया जाता है.



इन्हें पदकों से नवाजा गया-
- आईपीएस अमोल वेणु कांत होमकर
- आईपीएस माइकल राज
- आईपीएस इंद्रजीत महता
- आईपीएस सुरेंद्र कुमार झा
- आईपीएस मनोज स्वर्गियरी
- डिप्टी कमांडेंट मिथिलेश कुमार
- सब इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार
- सब इंस्पेक्टर मंटू कुमार
- कांस्टेबल दीनबंधु शेखर
- कांस्टेबल पारस कुमार वर्मा
- कांस्टेबल विकास कर्मकार
- कांस्टेबल भागीरथ रजवार
- कांस्टेबल शिवनंदन हांसदा
- कांस्टेबल अजय मेहता
जनवरी 2025 में शुरू हुआ था अभियान
साल 2025 के अप्रैल महीने में झारखण्ड के नक्सल इतिहास में पहली बार एक साथ आठ नक्सली मारे गए ,जिसमे एक करोड़ का इनामी भी शामिल था.झारखंड पुलिस से लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय तक इस सफलता को लेकर गुड फील करते नजर आए थे. अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा इस अभियान में शामिल 14 अफसरों और कर्मियों को पदकों से सम्मानित किया गया है.


पुलिस के नाम बड़ी उपलब्धियां
आपको बता दें कि झुमरा और पारसनाथ में मिली सफलता के पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प है. झारखंड के तीन दिग्गज आईपीएस अफसरों के दो महीने की मेहनत का फल था. एक करोड़ के इनामी विवेक और उसके सात साथियों का एनकाउंटर. तीन आईपीएस अफसरों में एक तो खुद तत्कालीन आईजी अभियान अमोल होमकर ही थे. बोकारो के लुगु पहाड़ में 21 जनवरी को दो माओवादियों को मार गिराया था, इसी अभियान के दौरान 15 लाख का इनामी रणविजय महतो गिरफ्तार भी हुआ था लेकिन 20 अप्रैल को जो हुआ उसने इतिहास बन दिया.
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