फिल्म गोदान में गाय आरती गाने वाली सिंगर बोलीं- गाय खाने वालों को ईश्वर सदबुद्धि दे, जानिए किसने फाइनल किया था गीत
अनन्या सिंह ने कहा, सरसंघचालक मोहन भागवत से हरी झंडी मिलने के बाद फिल्म गोदान में गाय आरती गाने का सौभाग्य मिला.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : February 24, 2026 at 9:31 PM IST
|Updated : February 24, 2026 at 10:41 PM IST
लखनऊ : 'पता नहीं लोग कैसे गाय को मारकर खाते हैं. कहां से इनके दिमाग में ऐसी चीज आती है. ईश्वर इन्हें सद्बुद्धि दे. दुनिया में गाय का बड़ा महत्व है. जो लोग गाय को मार कर खा रहे हैं वह दूध भी पीते हैं. इसका सीधा सा मतलब है जिस थाली में खा रहे हो उसमें छेद मत करो. हमारी गाय जो पूरे भारत की गाय है. उनकी सेवा करिए. उनकी रक्षा का पूरा जिम्मा उठाइए.'
यह बात हाल ही में आई फिल्म गोदान में गाय माता की आरती गाने वाली सुप्रसिद्ध लोक गायिका अनन्या सिंह ने कही. अनन्या ने बताया, सरसंघचालक मोहन भागवत ने मेरी आवाज में गाई गई इस आरती को सराहा और इसके बाद उन्होंने ही इसे ग्रीन सिग्नल दिया. तब मुझे गोदान फिल्म में आरती गाने का मौका मिला. अनन्या ने ईटीवी भारत से बातचीत में गायों के संरक्षण पर भी बात की. पढ़िए अनन्या ने और क्या कुछ कहा...
सवाल: आपके जेहन में ये कैसे आया कि गाय माता की आरती बहुत जरूरी है?
जवाब: सबसे पहली बात तो यह की गाय माता की आरती हम लोगों में से कोई नहीं गाता. पूरे देश में वृंदावन में कुछ लोग अपने से कुछ आरती गाय माता की गाते थे, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर ऐसा गीत, ऐसी आरती बनी नहीं थी. फिल्में हमेशा से बड़ा माध्यम रही हैं जागरूकता की. गाय माता की आरती गाने का विचार तो बहुत पहले से था, लेकिन उसको प्रस्तुत करने के लिए प्लेटफॉर्म नहीं मिला था. अगर एक फिल्म के तौर पर प्लेटफॉर्म मिल जाए तो इससे बड़ी बात कुछ नहीं हो सकती. मेरे साथ बिल्कुल यही हुआ. मुझे एक ऐसी फिल्म मिली जिसमें गाय माता की आरती गाने का अवसर मिला.
सवाल: आरती आपने कब लिखी थी?
जवाब: मैं गायिका हूं. मैं लेखिका नहीं हूं. इस गीत को संघ के किसी व्यक्ति ने लिखा है. फिल्म को बनाने में भी संघ के लोगों का बड़ा योगदान है. मेरे इस गीत को फाइनल मोहन भागवत ने किया था. यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मेरी आवाज में ये आरती उन्हें पसंद आई. उन्होंने मुझे यह गाने का अवसर दिया. यह आरती बेसिकली मैंने गाई है.
सवाल: मोहन भागवत से मिलने का मौका कब मिला?
जवाब: मेरी मुलाकात नहीं हुई थी. मुझसे पहले एक दो और लोगों ने इस गीत को गया था, लेकिन वह उन्हें उतना उचित नहीं लगा था. फिल्म के हिसाब से उन्होंने मेरी आवाज को पसंद किया और फिर यह फिल्म में शामिल हुआ. ओम जय गैया माता, मैया जय गया माता, इस आरती के बोल हैं.

सवाल: गाय पालने के प्रति जागरूक करने के लिए क्या कहना चाहेंगी?
जवाब: मैं यही कहूंगी कि गाय पालन तो सदा से सनातन धर्म में एक बहुत गर्व की बात रही है. गाय कभी सड़कों पर नहीं रही. गाय कभी गोशालाओं में भी नहीं रही है. ये तो मजबूरी है कि गोशाला बनानी पड़ रही है. हमारे सनातन धर्म में तो गाय हमेशा पालनी चाहिए. हर घर में गाय पलती थी. मेरे घर में भी गाय है. यह नौबत ही नहीं आनी चाहिए कि गाय को गोशाला में छोड़ जाए, क्योंकि गोशाला में हजारों गायों की सेवा करने वाले चंद लोग हैं.
आपके घर में सिर्फ एक गाय है तो 5-6 लोग उसकी सेवा करने वाले हैं. गऊ सेवा तो सबसे बड़ी सेवा है. इतिहास गवाह है जिसने जिसने गाय की सेवा की है आज वह सब बहुत बड़े पद पर हैं. बहुत बड़ा नाम कमा रहे हैं. गाय की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है, जिसमें कमी आ रही थी, इसीलिए ऐसी फिल्म बनाई गई जिससे लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा सके.
सरकार अपनी पूरी कोशिश कर रही है. अपनी पूरी मुहिम चला रही है. गाय की रक्षा के लिए गोशालाएं बनाई गई हैं. हर गाय के लिए सुविधा दी जा रही है. गाय को चारा दिया जा रहा है. मैं तो खुद ही इस फिल्म की रिलीज के दौरान कई गोशालाओं में गई हूं, इसलिए मैं यह नहीं कह सकती कि गाय की सेवा के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही. गाय की रक्षा के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही. सरकार पूरा योगदान दे रही है, लेकिन भारत का नागरिक होने के नाते हमें भी अपना योगदान आगे जाकर देना पड़ेगा.
सवाल: गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मुहिम पर क्या कहना है?
जवाब: गाय माता को राष्ट्रीय माता घोषित कर देंगे तो फिर सारी समस्या खत्म ही हो जाएगी, क्योंकि गऊ माता को अगर राष्ट्र माता घोषित करेंगे तो गाय का मांस भी कोई नहीं खाएगा, फिर हर चीज पर प्रतिबंध लग जाएगा. सारी गोशालाओं में और बड़े स्तर पर लोग जाएंगे और सेवा करेंगे. मुझे लगता है यह बहुत अच्छी चीज है, और बहुत जरूरी है.
जानिए कौन हैं लोक गायिका अनन्या सिंह -
अनन्या सिंह बिहार के सीवान जिला की रहने वाली हैं. 'के बनी माटी के लाल' की उप विजेता और कई फिल्मों (जैसे 'बहिनियां की डोली') में पार्श्वगायन कर चुकी हैं. वह राष्ट्रीय कत्थक संस्थान लखनऊ से गायन में बीपीए कर रही हैं. उन्होंने 2015 से 400 से अधिक मंचों पर अपनी प्रस्तुति दी है.
23 साल की अनन्या सिंह के पिता धनंजय सिंह हैं और मां सुनीता सिंह हैं. फिलहाल वह परिवार सहित गोरखपुर में रहती हैं. 2015 से उन्होनें विभिन्न सरकारी एवं निजी मंचों पर अपनी गायन की प्रस्तुति दी. मुख्य रूप से लोकगीत, क्लासिकल गीत, बॉलीवुड गीत, गजल और सुगम संगीत की प्रस्तुतियां देती हैं.


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