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पटना हाईकोर्ट में इंटरनेट संकट! न्यू बिल्डिंग में लगेगा मोबाइल टावर.. पटना हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश

Patna High Court में हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई सुविधा को लेकर बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने पूछा अब तक मामले में क्या कार्रवाई हुई?.

Patna High Court
पटना हाईकोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : June 19, 2026 at 11:54 AM IST

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पटना: पटना हाईकोर्ट परिसर में और कोर्ट रूम में समयबद्ध ढंग से उच्च गति इंटरनेट कनेक्टिविटी, जिसमें वाई-फाई की सुविधा शामिल हो, के उपलब्ध कराए जाने के मामलें पर सुनवाई हुई. जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई की.

न्यू बिल्डिंग में इंटरनेट के लिए लगेगा मोबाइल टावर: सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार, सीपीसी को बुलाया. कोर्ट ने जानना चाहा कि अबतक क्या कार्रवाई हुई है. कोर्ट ने न्यू न्यू बिल्डिंग में इंटरनेट सुविधा प्रदान करने हेतु मोबाइल टावर लगाने का आदेश संबिधत रजिस्ट्रार को दिया. इस मामलें की सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी.

पटना हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश: कोर्ट ने पूर्व में इस मामलें पर याचिकाकर्ता की शिकायत को त्वरित कार्रवाई के लिए बुनियादी ढांचागत समिति के समक्ष भेज दिया और समिति से अगली सुनवाई में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था.

वाई-फाई की मांग को लेकर PIL: अधिवक्ता ओमप्रकाश ने पटना हाईकोर्ट परिसर में हाई स्पीड इंटरनेट और वाई-फाई लगाने के लिए एक जनहित याचिका दायर की थी. कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट प्रशासन से जवाब- तलब करते हुए ये बताने को कहा अब तक इस मामले पर क्या कार्रवाई हुई है.

याचिकाकर्ता ने बताई परेशानी: पिछली सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता ओम प्रकाश को बीएसएनएल और बेलट्रॉन को पार्टी बनाने का निर्देश दिया था. याचिकाकर्ता अधिवक्ता ओमप्रकाश का कहना था कि हाईकोर्ट परिसर में प्रभावी और तेज इंटरनेट और वाई-फाई की सुविधा होनी चाहिए.

''पटना हाईकोर्ट परिसर में बिना किसी रूकावट के इन्टरनेट और वाई-फाई कनेक्टिविटी होनी चाहिए, जिससे न्यायिक कार्य मे बाधा उत्पन्न नहीं हो. अधिवक्तागण अपने न्यायिक कार्य सुचारू ढंग से कर सके.'' - ओम प्रकाश, याचिकाकर्ता

'तीव्र गति और कम समय में न्याय मिल सकेगा': उन्होंने बताया कि पटना हाईकोर्ट के एडवोकेट्स एसोसिएशन ने अपने अधिवक्ता सदस्यों के सीमित वाई-फाई सुविधा प्रदान किया था. डिजिटल न्यायिक सेवा प्रभावी रूप से कार्य करना आवश्यक है, तभी कोर्ट में तीव्र गति और कम समय में न्याय मिल सकेगा. संविधान के मौलिक अधिकार 19 और 21 धाराएं तभी सही मायनों कार्य कर पाएगी. इस मामलें पर अगली सुनवाई दो सप्ताह के बाद होगी.

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