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अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव: सरस मेले में सजी हिमाचल की विरासत, इस अनोखी कारीगरी ने जीता सबका दिल

ये अनोखी कारीगरी लोगों को रुक-रुककर इनसे बने मंदिरों को निहारने के लिए मजबूर कर रही है.

SARAS MELA MANDI 2026
सरस मेले में सजी हिमाचल की विरासत (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 20, 2026 at 5:29 PM IST

3 Min Read
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मंडी: मंडी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव 2026 के तहत इस बार इंदिरा मार्केट की छत पर सजा सरस मेला खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यह मेला केवल खरीदारी का स्थान नहीं, बल्कि हिमाचल की समृद्ध विरासत, पारंपरिक स्थापत्य कला और स्थानीय हस्तशिल्पकारों की प्रतिभा का जीवंत मंच बनकर उभरा है. यहां संस्कृति, आत्मनिर्भरता और रचनात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है.

देशभर से पहुंचे स्वयंसहायता समूह

सरस मेले में 14 राज्यों के साथ हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों और मंडी जिले के 14 विकास खंडों के स्वयंसहायता समूहों ने अपने स्टॉल लगाए हैं. हस्तनिर्मित वस्त्र, पारंपरिक खाद्य उत्पाद, सजावटी सामान और लोककला की विविध झलकियां यहां देखने को मिल रही हैं. हर स्टॉल अपने क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा की कहानी कहता नजर आता है, जिससे मेले का माहौल जीवंत और रंगीन बन गया है.

सरस मेले में सजी हिमाचल की विरासत (ETV BHARAT)

छज्जू राम की कारीगरी बनी खास पहचान

इसी मेले में बालीचौकी तहसील के पंजाई गांव डोभा निवासी हस्तशिल्पकार छज्जू राम का स्टॉल विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. वे हिमाचल की पारंपरिक काष्ठकुणी और पगौड़ा शैली के मंदिरों को छोटे-छोटे सुंदर मॉडलों के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं. लकड़ी से बने इन मंदिर मॉडलों में बारीक नक्काशी और पारंपरिक संरचना की झलक साफ दिखाई देती है.

SARAS MELA MANDI 2026
छज्जू राम की कारीगरी बनी खास पहचान (ETV BHARAT)

छज्जू राम पिछले तीन वर्षों से 10 कारीगरों की टीम के साथ इन मॉडलों का निर्माण कर रहे हैं. मंदिरों के साथ-साथ देवी-देवताओं के देवरथों के मॉडल भी स्टॉल की शोभा बढ़ा रहे हैं. इनकी आकर्षक बनावट और सजीव प्रस्तुति लोगों को रुककर इन्हें निहारने के लिए मजबूर कर देती है. यह प्रयास हिमाचल की स्थापत्य विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

SARAS MELA MANDI 2026
छज्जू राम का स्टॉल बना सेल्फी प्वाइंट (ETV BHARAT)

छज्जू राम का स्टॉल बना सेल्फी प्वाइंट

खास बात यह है कि छज्जू राम का स्टॉल अब सेल्फी प्वाइंट बन चुका है. दूर-दूर से आए पर्यटक और स्थानीय लोग मंदिर मॉडलों के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं. इससे न केवल उनके काम को पहचान मिल रही है, बल्कि प्रदेश की पारंपरिक कला को भी नया मंच मिल रहा है.

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देवी-देवताओं के देवरथों के मॉडल (ETV BHARAT)

संस्कृति और आत्मनिर्भरता का संगम

सरस मेला महिलाओं और स्थानीय कारीगरों के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी अहम भूमिका निभा रहा है. यह मेला खरीद-फरोख्त से आगे बढ़कर कला, संस्कृति और परंपरा को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का माध्यम बना है. अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के इस विशेष आयोजन ने मंडी को एक बार फिर सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित किया है.

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