कैसे करें JEE Mains 2026 की तैयारी?, एक्सपर्ट से जानिए.. होगी हाई स्कोरिंग
जनवरी-फरवरी छात्रों के लिए बेहद अहम होता है. सीबीएसई बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षाएं और जेईई मेंस की परीक्षाएं हैं. कैसे करें तैयारी एक्सपर्ट्स से जानें.

Published : January 7, 2026 at 12:44 PM IST
रिपोर्ट : कृष्ण नंदन
पटना: 21 जनवरी से 30 जनवरी के बीच जेईई मेंस की परीक्षा आयोजित होनी है. इसके तुरंत बाद 2 फरवरी से बिहार बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा शुरू हो जाएगी. वहीं फरवरी में ही सीबीएसई बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षाएं भी प्रारंभ होंगी. लगातार होने वाली इन बड़ी परीक्षाओं के कारण छात्रों पर पढ़ाई और टाइम मैनेजमेंट का दबाव काफी बढ़ गया है. खास बात यह है कि जेईई मेंस और बोर्ड परीक्षाओं का पैटर्न और सिलेबस अलग-अलग होने के कारण तैयारी की रणनीति भी अलग रखनी पड़ती है.
जेईई मेंस और बोर्ड परीक्षा का अंतर: जेईई मेंस की परीक्षा में ऑब्जेक्टिव टाइप प्रश्न होते हैं, जिनमें फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथमेटिक्स से सवाल पूछे जाते हैं. इसमें 11वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं के टॉपिक्स शामिल रहते हैं. वहीं इंटरमीडिएट परीक्षा में केवल 12वीं कक्षा का सिलेबस होता है और इसमें थ्योरी व सब्जेक्टिव प्रश्नों का अधिक महत्व रहता है.
बोर्ड परीक्षा में स्टेप बाय स्टेप उत्तर लिखने पर अंक मिलते हैं, जबकि जेईई मेंस में सही विकल्प चुनना ही सबसे अहम होता है. ऐसे में छात्रों को दोनों परीक्षाओं के लिए अलग-अलग तैयारी करनी पड़ती है.
रिवीजन का सबसे अहम समय: आमतौर पर परीक्षा से एक महीने पहले का समय रिवीजन के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. अब जबकि परीक्षाएं बेहद नजदीक हैं, तो नए टॉपिक्स सीखने के बजाय अब तक जो पढ़ाई की गई है. उसी को रिवाइज करने पर फोकस करना जरूरी है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय कंसेप्ट को मजबूत करने, गलतियों को पहचानने और प्रैक्टिस बढ़ाने की जरूरत होती है, ताकि परीक्षा के दौरान आत्मविश्वास बना रहे.
सेल्फ स्टडी पर दें पूरा ध्यान: पटना में मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी कराने वाले संस्थान एडुकेमी के निदेशक और भौतिकी के शिक्षक विकास चौहान का कहना है कि छात्रों को इस समय प्रतिदिन 6 से 8 घंटे सेल्फ स्टडी जरूर करनी चाहिए. जो छात्र जेईई मेंस में अपीयर होने वाले हैं, उन्हें रोजाना कम से कम तीन घंटे सिर्फ जेईई मेंस की तैयारी के लिए देने चाहिए. इस दौरान प्रीवियस ईयर क्वेश्चन बैंक को ध्यान से देखना और उनसे जुड़े टॉपिक्स को अच्छे से रिवाइज करना बेहद फायदेमंद साबित होता है.
"जेईई मेंस की तैयारी के लिए फिजिक्स, केमेस्ट्री और मैथमेटिक्स तीनों विषयों को बराबर समय देना जरूरी है. छात्रों को कम से कम हर सब्जेक्ट को एक-एक घंटे देना चाहिए. फिजिक्स में कंसेप्ट क्लियर होना जरूरी है, केमेस्ट्री में फैक्ट्स और रिएक्शन याद रखने होते हैं, जबकि मैथमेटिक्स में लगातार प्रैक्टिस से ही स्पीड और एक्युरेसी आती है. संतुलित तैयारी से ही बेहतर रिजल्ट की उम्मीद की जा सकती है."- विकास चौहान, एडुकेमी के निदेशक और भौतिकी के शिक्षक

इंटरमीडिएट परीक्षा की रणनीति: इंटरमीडिएट परीक्षा की तैयारी के लिए बोर्ड द्वारा जारी सैंपल पेपर और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करना बेहद जरूरी है. विकास चौहान का कहना है कि इंटरमीडिएट के छात्रों को अब रोजाना कम से कम एक सैंपल पेपर सॉल्व करने की आदत डालनी चाहिए. इससे न सिर्फ टाइम मैनेजमेंट बेहतर होता है, बल्कि यह भी समझ आता है कि किस टॉपिक से कितने और कैसे प्रश्न पूछे जाते हैं.
हाई वेटेज टॉपिक्स पर फोकस: विकास चौहान ने बताया कि इंटरमीडिएट परीक्षा में कुछ टॉपिक्स से हर साल अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं. फिजिक्स में ऑप्टिक्स चैप्टर से, मैथमेटिक्स में कैलकुलस से और केमिस्ट्री में ऑर्गेनिक केमिस्ट्री से अधिक अंक के प्रश्न आते हैं. ऐसे में छात्रों को इन टॉपिक्स पर विशेष ध्यान देना चाहिए. साथ ही, यह भी ध्यान रखें कि परीक्षा का लक्ष्य केवल पास होना नहीं, बल्कि अधिक से अधिक अंक हासिल करना होना चाहिए.
जनवरी वाला जेईई मेंस क्यों है अहम: विकास चौहान के अनुसार, जेईई मेंस की जनवरी वाली परीक्षा अप्रैल की तुलना में थोड़ी आसान मानी जाती है. इसकी एक वजह यह है कि इस समय छात्रों पर बोर्ड परीक्षा का दबाव होता है और परीक्षा लेने वाली एजेंसी इस बात का ध्यान रखती है. ऐसे में जिन छात्रों ने दो साल अच्छे से तैयारी की है, उनके लिए इस परीक्षा में अच्छा स्कोर करने का यह बेहतर मौका होता है. हालांकि जिन्होंने अब तक तैयारी में लापरवाही बरती है, उन्हें मानसिक तनाव से बचते हुए वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए.
भाषा विषयों को न करें नजरअंदाज: विकास चौहान ने कहा कि इंटरमीडिएट परीक्षा में भाषा विषय जैसे हिंदी और अंग्रेजी शामिल होते हैं, जिनसे मेडिकल या इंजीनियरिंग की प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न नहीं पूछे जाते. इसके बावजूद इन विषयों को नजरअंदाज करना सही नहीं है. ये स्कोरिंग सब्जेक्ट होते हैं और इंटरमीडिएट में अच्छे अंक भविष्य में हर तरह की प्रतियोगिता और करियर के लिए अहम साबित होते हैं. इसलिए भाषा विषय के सैंपल पेपर को भी सप्ताह में 1 से 2 बार सॉल्व करना बेहद जरूरी है.
NCERT है सबसे बड़ा आधार: विकास चौहान ने बताया कि कि एनसीईआरटी अपने आप में एक ग्रंथ है. छात्रों को चाहिए कि वे एनसीईआरटी की किताबों का पूरा और गहराई से अध्ययन करें. कई बार किसी चैप्टर को बेहतर ढंग से समझने के लिए सपोर्टिंग बुक की जरूरत पड़ती है, तो उसका सहारा भी लिया जा सकता है. हालांकि मूल आधार एनसीईआरटी ही होनी चाहिए.
लिखने की प्रैक्टिस है जरूरी: विकास चौहान ने बताया कि जेईई मेंस और नीट की तैयारी करने वाले छात्रों को ऑब्जेक्टिव सवाल हल करने की आदत हो जाती है. ऐसे में वे कई बार इंटरमीडिएट परीक्षा में स्टेप्स लिखना भूल जाते हैं. जबकि बोर्ड परीक्षा में हर स्टेप के लिए अलग-अलग अंक मिलते हैं.
थ्योरी प्रश्नों में ढाई से तीन घंटे में 20 से 30 पेज लिखने पड़ते हैं. यदि लिखने की आदत नहीं होगी, तो आते हुए प्रश्न भी छूट सकते हैं. उन्होंने कहा कि इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए रोजाना एक मॉडल क्वेश्चन पेपर तय समय में हल करने की प्रैक्टिस बेहद जरूरी है. थ्योरी प्रश्नों के उत्तर स्टेप बाय स्टेप और प्वाइंटर फॉर्मेट में लिखना बेहतर माना जाता है. इससे उत्तर ज्यादा स्पष्ट दिखते हैं और परीक्षक को भी जांचने में आसानी होती है.
पेरेंट्स का बढ़ता पैनिक और बच्चों का स्ट्रेस: साइकोथैरेपिस्ट डॉक्टर बिंदा सिंह का कहना है कि इस समय बच्चों से ज्यादा पेरेंट्स पैनिक में रहते हैं. इसका सीधा असर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है. बच्चों को यह महसूस होने लगता है कि अगर परीक्षा में थोड़ी भी गड़बड़ी हुई, तो उनका भविष्य खराब हो जाएगा. यह सोच बच्चों पर अनावश्यक दबाव बनाती है.

"आज के समय में बच्चे एआई टूल्स, यूट्यूब और ऑनलाइन कंटेंट से पढ़ तो लेते हैं, लेकिन लिखने की प्रैक्टिस नहीं करते. उन्हें लगता है कि सब कुछ याद है, लेकिन परीक्षा में प्रश्न देखते ही दिमाग खाली हो जाता है. इसलिए जरूरी है कि जो भी पढ़ा या रिवाइज किया जाए, उसे लिखकर जरूर दोहराया जाए. रात में पढ़ी हुई चीजों को सुबह उठकर दो बार लिखने से याददाश्त मजबूत होती है."-डॉक्टर बिंदा सिंह, साइकोथैरेपिस्ट
ब्रेक और मेडिटेशन का महत्व: लगातार पढ़ाई करने से दिमाग थक जाता है. इसलिए हर दो घंटे के बाद थोड़े समय का ब्रेक लेना जरूरी है. म्यूजिक सुनना, हल्की एक्सरसाइज करना या मेडिटेशन करना दिमाग को शांत और फ्रेश रखता है. अगर किसी प्रश्न में उलझन हो रही है, तो घबराने के बजाय गहरी सांस लेकर उसके बेसिक्स को समझने की कोशिश करनी चाहिए.
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