जीन पूल समस्या दूर करने को बाघिन की शिफ्टिंग: MP के बांधवगढ़ से 700 किमी दूर कोटा के मुकुंदरा में सड़क मार्ग से लाई गई
बाघ एवं बाघिन में जीन पूल समस्या दूर करने की मंशा से आज सुबह मध्यप्रदेश से मुकुंदरा शिफ्ट की गई साढ़े तीन साल की बाघिन.

Published : February 28, 2026 at 8:54 AM IST
|Updated : February 28, 2026 at 10:46 AM IST
कोटा: राजस्थान के बाघ एवं बाघिन में जीन पूल की समस्या से निजात दिलाने को इंटर स्टेट टाइगर रिलोकेशन प्रोजेक्ट शुरू किया गया. इसके दूसरे चरण में मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघिन लाई गई. कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से शुक्रवार को बाघिन शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो करीब 15 घंटे बाद शनिवार को पूरी हुई. इसमें पहले साढ़े तीन साल की बाघिन ट्रेंकुलाइज की गई, फिर उसे सड़क मार्ग से मुकुंदरा लाया गया. शनिवार को बाघिन मुकुंदरा में एंक्लोजर में छोड़ दिया गया. पहले इस बाघिन को हवाई मार्ग से लाना था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद सड़क मार्ग से लाया गया.
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व फील्ड डायरेक्टर और मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव कोटा सुगनाराम जाट ने बताया कि बाघिन को शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे बांधवगढ़ में ट्रेंकुलाइज किया गया था. फिर उसे टीम पूरे प्रोटोकॉल से लेकर टीम मुकुंदरा रवाना हुई. करीब 15 घंटे के सफर के बाद टीम बाघिन को लेकर शनिवार सुबह 8:30 बजे मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व पहुंची. इसके बाद बाघिन को एंक्लोजर में छोड़ा. यहां उसकी पूरी मॉनिटरिंग की जा रही है. इस निगरानी में सब कुछ ठीक मिलने पर उसे हार्ड रिलीज कर दिया जाएगा. इसके तहत खुले जंगल में छोड़ा जाएगा.
पढ़ें:केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान से मुकुंदरा टाइगर रिजर्व भेजे गए 10 चीतल, 500 और किए जाएंगे शिफ्ट
मध्यप्रदेश के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक शुभरंजन सेन ने कहा, राजस्थान को तीन बाघिन देनी थी. इनमें पहली बार उन्होंने पेंच टाइगर रिजर्व से दी थी. दूसरी बाघिन बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भेजी गई. इस बाघिन को मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के प्रबंध राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और वन्य जीव विभाग के अधिकारियों की मॉनिटरिंग में भेजा. इसमें पशु चिकित्सक भी शामिल थे. ये सड़क मार्ग से करीब 700 किलोमीटर दूर कोटा ले गए.
चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन शुभरंजन सेन ने कहा कि इसके पहले आरएफ 327 टाइग्रेस को भी ट्रेंकुलाइज कर रेडियो कॉलर पहना दिया था, लेकिन यह पर्यटन जोन की थी. इसलिए वहीं छोड़ दिया था. अब दूसरे जोन की बाघिन को शिफ्ट किया है. सेन ने बताया कि बाघिन जगुआ बफर जोन में विचरण कर रही थी. उसे ट्रेस करने के बाद ट्रेंकुलाइज कर रेडियो कॉलर पहनाया था. यह पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद ही उसे अधिकारी कर्मचारियों के साथ सुरक्षा की दृष्टि से सड़क मार्ग से भेजा है. यह बाघिन बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जन्मी है. यह बाघिन मोहिनी की चौथी शावक है. इसमें बाघ बांधवगढ़-2 का डीएनए है.
यहां कुनबा पहुंचा सात: मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के उपवन संरक्षक मुथु सोमासुंदरम ने बताया कि मध्यप्रदेश से राजस्थान के लिए दूसरी अंतरराज्यीय बाघ स्थानांतरण की सफलता है. बाघिन को एमएचटीआर की झामरा घाटी स्थित एक हैक्टेयर के एंक्लोजर में छोड़ा है. अब मुकंदरा में शिफ्ट करने के बाद यहां 7 टाइगर हो गए. इनमें तीन बाघिन, दो बाघ, एक शावक व सब एडल्ट फीमेल हैं. जीन पूल में अनुवांशिक आधार पर बाघों को संरक्षित करने का लक्ष्य है, ताकि उनके बच्चे मजबूत रहे. बाघ आबादी में हेटेरोजाइगोसिटी बढ़ेगी. इससे जेनेटिक बॉटलनेक की समस्या का दूर होगी. टाइगर रिजर्व में दीर्घकालिक रूप से सक्षम बाघ आबादी सुनिश्चित होगी.
पढ़ें: मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में पैंथर और मवेशी का रोमांचक संघर्ष, गौवंश ने पैंथर को दी शिकस्त


