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संस्कृत विद्यालय में हत्या का मामला, उम्रकैद की सजा पाए शिक्षक को वेतन भुगतान की जांच के निर्देश

हाईकोर्ट ने बलिया के जिला विद्यालय निरीक्षक को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया.

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Photo credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : August 26, 2026 at 9:07 PM IST

3 Min Read
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प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलिया के जिला विद्यालय निरीक्षक को वहां के एक सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालय में हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए सहायक अध्यापक को वेतन भुगतान और सिंगल ऑपरेशन के आदेश को गंभीरता से लेते हुए गहन जांच कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है. यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने श्री व्यंतानंद संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिकंदरपुर बलिया की प्रबंध समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है.

संस्थान की प्रबंध समिति ने याचिका में डीआईओएस बलिया के गत 14 मार्च के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत वेतन खाते के एकल संचालन की अनुमति देकर प्रभारी प्रधानाचार्य राम प्रसाद गुप्ता और सहायक अध्यापक सुधाकर शुक्ल को वेतन भुगतान का रास्ता साफ किया गया था. ​याचिका के अनुसार, सहायक अध्यापक सुधाकर शुक्ल को आईपीसी की धारा 302/34 और आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे में ट्रायल कोर्ट ने 15 जुलाई 2015 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. लगभग 14 साल की सजा भुगतने के बाद उन्हें 29 जुलाई 2024 को हाईकोर्ट से सिर्फ सजा की अवधि के आधार पर जमानत मिली थी.

प्रबंध समिति की ओर से कहा गया कि जमानत मिलने से दोषसिद्धि समाप्त या स्थगित नहीं होती इसलिए सजायाफ्ता व्यक्ति सेवा में बने रहने और वेतन पाने का हकदार नहीं है. सरकारी वकील ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल जमानत मिलना दोषसिद्धि पर रोक नहीं है. ऐसे व्यक्ति को सार्वजनिक धन से वेतन देना सेवा नियमों के प्रतिकूल है. कोर्ट में उपस्थित तत्कालीन डीआईओएस ने बताया कि शिक्षकों के सेवा रिकॉर्ड प्रबंधन के पास होते हैं और विभाग स्वतः संज्ञान लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करता, बल्कि प्रबंधन की सिफारिश पर ही कदम उठाता है.

सुनवाई के बाद ​हाईकोर्ट ने कहा कि सहायता प्राप्त अशासकीय शिक्षण संस्थानों में प्रबंधन और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारियों को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति रहती है. ग्रांट-इन-एड से चलने वाले संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही अनिवार्य है. कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या शिक्षण संस्थान चलाने वाली समितियों के सदस्यों के लिए शिक्षा क्षेत्र में कोई न्यूनतम योग्यता या विशेषज्ञता का प्रावधान न होना राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुकूल है या नहीं.

​हाईकोर्ट ने डीआईओएस बलिया को संस्थान, अपने कार्यालय और अन्य प्राधिकारों के मूल रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच करने तथा शिक्षक की नियुक्ति, योग्यता, आपराधिक इतिहास, वेतन जारी करने के आधार आदि पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है. साथ ही विद्यालय प्रबंधक को 72 घंटे के भीतर सभी शिक्षण व गैर-शिक्षण कर्मचारियों के सेवा अभिलेख डीआईओएस को सौंपने का निर्देश गया है.

कोर्ट ने विवादित आदेश करने वाले तत्कालीन डीआईओएस देवेंद्र कुमार गुप्ता को अगली सुनवाई पर संबंधित रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने को कहा है. कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक से पूछा है कि सजायाफ्ता कर्मचारियों पर कार्रवाई, वेतन के सिंगल ऑपरेशन और सेवा रिकॉर्ड के रखरखाव को लेकर राज्य में क्या स्पष्ट वैधानिक व्यवस्था है. इसके अलावा मामले में कानूनी पहलुओं पर कोर्ट की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता जीके सिंह को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है.

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