हसमुन तारा ने पर्स बनाकर बदली तकदीर, 8000 से शुरू किया व्यवसाय.. हर महीने 2 लाख की आय
एक समय था जब हसमुन का परिवार बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था.कई बार परिवार को कर्ज तक लेना पड़ता था. पढ़ें खबर-

Published : April 29, 2026 at 8:38 PM IST
शिवहर: बिहार के शिवहर से हिम्मत, हुनर और हौसले की शानदार कहानी आई है. यहा के कुशहर गांव स्थित मौलागंज की रहने वाली हसमुन तारा की कहानी संघर्ष, साहस और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है. कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली हसमुन आज पर्स (बटुआ) बनाने के व्यवसाय से हर महीने लाखों रुपये की आमदनी कर रही हैं. इसके साथ वे न सिर्फ अपने परिवार बल्कि कई अन्य लोगों के जीवन में भी रोशनी ला रही हैं.
कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था परिवार: एक समय था जब हसमुन का परिवार बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था. आठ सदस्यीय परिवार जिसमें पति मो. जफिर आलम, तीन बेटे और तीन बेटियों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी. घर की आय बेहद सीमित थी. कभी मजदूरी, कभी खेती और घरेलू कामों से मुश्किल से 3 से 5 हजार रुपये महीना जुट पाता था. इतनी कम आमदनी में बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और अन्य जरूरतें पूरी करना किसी चुनौती से कम नहीं था. कई बार हालात ऐसे बनते थे कि परिवार को कर्ज तक लेना पड़ता था.
हिम्मते मर्दा, मददे खुदा: लेकिन वो कहते हैं ना हिम्मते मर्दा, मददे खुदा..बस उसी का अनुसरण करते हुए हसमुन ने हार नहीं मानी. करीब 10 साल पहले उन्होंने पर्स बनाने का छोटा सा काम शुरू किया. शुरुआत महज 8 हजार रुपये से हुई थी. इसके बाद वर्ष 2019 में वे जीविका समूह से जुड़ीं, जहां से उन्हें बचत और छोटे लोन की सुविधा मिली. इसी सहारे उन्होंने अपने छोटे व्यवसाय को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया.

जीविका से जुड़ने के बाद जिंदगी को मिली नई दिशा: हसमुन बताती हैं कि जीविका से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी को नई दिशा मिली. उन्होंने नियमित तौर पर बचत शुरू की और लोन लेकर अपने काम को विस्तार दिया. धीरे-धीरे आय बढ़ने लगी, घर की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी और सबसे बड़ी बात ये हुई कि बच्चों की पढ़ाई बेहतर तरीके से होने लगी. अब परिवार को किसी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती.
"अगर महिलाएं ठान लें, तो वे किसी भी परिस्थिति को बदल सकती हैं. घर से निकलकर काम कीजिए, आत्मनिर्भर बनिए, तभी जिंदगी सच में गुलजार होगी." - हसमुन तारा, महिला उद्यमी
हर महीने 2 लाख रुपये तक की हो रही कमाई: आज हसमुन तारा का पर्स बनाने का व्यवसाय इतना बड़ा हो चुका है कि वे हर महीने करीब 2 लाख रुपये तक की कमाई कर रहीं हैं. उनके साथ अब उनके पति भी इस काम में हाथ बंटा रहे हैं. इतना ही नहीं, उनके पास दरभंगा, दिल्ली और बंगाल जैसे शहरों से आकर भी कारीगर आकर काम करते हैं. इसके अलावा आसपास के गांवों की कई महिलाओं को भी हसमुन के इस व्यवसाय से रोजगार मिला है.

कई राज्यों तक फैला व्यवसाय: हसमुन के बनाए पर्स अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य के बाहर भी उनकी अच्छी मांग है. शिवहर के एक गांव से होते हुए उनका व्यवसाय कई राज्यों तक फैल चुका है. अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर भी हसमुन बेहद सजग हैं. उनके बच्चे प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। वे चाहती हैं कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा लेकर अपने जीवन में आगे बढ़ें.
इसे भी पढ़ें-बिहार की सुनैना के 'आग्नेयास्त्र' और 'ब्रह्मास्त्र' का जवाब नहीं, जैविक खेती से बदल रहीं तकदीर
इसे भी पढ़ें-12 साल बाद वर्दी में घर लौट मां को किया सैल्यूट, रुला देगी होमगार्ड जवान किन्नर सानिया की कहानी

