कबाड़ से जुगाड़: आठवीं पढ़े लड़के ने बना दी हैंडमेड बोरवेल मशीन, छोटे किसानों के लिए वरदान
कबाड़ से जुगाड़ कर युवक ने बनाया अनोखा आविष्कार, आसानी से और कम खर्च में खेत-खलिहाल में बोर.. अख्तर अली की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : June 1, 2026 at 8:00 PM IST
सूरजपुर: जिले के सोहागपुर गांव के 32 वर्षीय दुहन विश्वकर्मा ने अपनी मेहनत और जज्बे से ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी हर ओर चर्चा हो रही है. केवल 8वीं तक पढ़ाई करने वाले दुहन ने कबाड़ के सामान से एक ऐसी हैंडमेड बोरवेल मशीन तैयार की है, जिससे बेहद कम खर्च में बोरिंग की जा सकती है.
छोटे और सीमांत किसानों को मिल रही बड़ी राहत
जहां सामान्य बोरवेल खुदाई में हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च हो जाते हैं, वहीं दुहन की मशीन से केवल 7 से 8 हजार रुपये में बोरिंग का काम पूरा हो जाता है. इससे छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी आर्थिक राहत मिल रही है.
हमारे यहां खेती करने के लिए पानी की दिक्कत थी, बड़ा मशीन में बोर का खर्च 1-डेढ़ लाख रुपए तक आ जाता था. ये मशीन गरीबों की सेवा के लिए बनाया हूं- दुहन विश्वकर्मा

बिजली से चलती है मशीन, कहीं भी ले जाना आसान
दुहन विश्वकर्मा द्वारा तैयार की गई यह मशीन बिजली से संचालित होती है. इसमें डेढ़ एचपी का मोटर लगाया गया है, जो ड्रिलिंग और प्रेशर सिस्टम की मदद से बोरिंग करता है. खास बात यह है कि मोटर को रिमोट से भी कंट्रोल किया जा सकता है. मशीन का आकार छोटा और वजन कम होने के कारण इसे खेतों, खलिहानों और दूर-दराज के इलाकों तक आसानी से ले जाया जा सकता है. इसे हाथों से पकड़कर भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा सकता है.

आर्थिक तंगी के कारण छूटी पढ़ाई, लेकिन नहीं टूटा हौसला
दुहन विश्वकर्मा ने पारिवारिक आर्थिक परिस्थितियों के कारण 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी. इसके बाद उन्होंने फेब्रिकेशन की दुकानों में काम किया और खेती-किसानी से जुड़े रहे. खेती के दौरान उन्होंने किसानों की पानी की समस्या और महंगी बोरवेल खुदाई को करीब से देखा. इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए उन्होंने कबाड़ के सामान से प्रयोग शुरू किया और आखिरकार कम लागत वाली बोरवेल मशीन तैयार कर दी.
हम दुहन को बचपन से जानते हैं, ये जो मशीन बनाया है उससे अब खेती में आसानी हो गया है, पहले साल में एक ही सीजन फसल ले पाते थे, अब रबी-खरीफ दोनों सीजन की फसल ले रहे हैं- – सुशील जायसवाल, किसान

पानी की समस्या दूर करने में साबित हो रही मददगार
गर्मी के मौसम में सूरजपुर जिले के कई क्षेत्रों में पानी की किल्लत देखने को मिलती है. ऐसे समय में दुहन की मशीन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. गांव के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के किसान भी अब बोरिंग के लिए दुहन को बुला रहे हैं.

ग्रामीणों ने की प्रशासनिक सहयोग की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी में सीखने और कुछ नया करने की इच्छा हो तो बड़ी डिग्री की आवश्यकता नहीं होती. दुहन इसका जीवंत उदाहरण हैं. ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन उनकी इस तकनीक को आगे बढ़ाने में मदद करे, ताकि अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके.
पंजीयन के बाद विभाग करेगा सहयोग
पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता एम.के. मिश्रा ने कहा कि जिले के युवाओं द्वारा किए जा रहे नवाचार सराहनीय हैं. उन्होंने बताया कि यदि दुहन अपने उपकरण का विधिवत पंजीयन कराते हैं तो विभाग भी उनके प्रयोग और तकनीक को आगे बढ़ाने में सहयोग करेगा. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मशीन को देखने और समझने के बाद उन्हें नियम अनुसार काम मिल सकता है.
अगर पेयजल के लिए कर रहे हैं तो कुछ नियमों का पालन करना होता है. पाइप वगैरह सब देखना होता है हालांकि सिंचाई के लिए सिर्फ कर रहे हैं तो ज्यादा दिक्कत नहीं है. पंजीयन करें और निविदा में भाग लेतें हैं तो उन्हें काम देंगे- एम के मिश्रा, कार्यपालन अभियंता, पीएचई विभाग
सोहागपुर के दुहन विश्वकर्मा ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा और नवाचार के लिए बड़ी डिग्री नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और समस्या का समाधान खोजने की सोच जरूरी होती है. उनकी कम लागत वाली बोरवेल मशीन आज छोटे किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बन रही है.

