हरियाणा में ग्रीनको को 1300 करोड़ रुपये भुगतान में इनेलो ने लगाया गड़बड़ी का आरोप, CAG जांच की मांग
इनेलो ने हरियाणा ग्रीनको को भुगतान में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सीएजी जांच की मांग की है.

Published : May 16, 2026 at 1:40 PM IST
चंडीगढ़ः इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने हरियाणा के बिजली विभाग में संस्थागत भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं का गंभीर आरोप लगाया है. 14 मई को हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) में हुई. सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने के बाद उन्होंने प्रेस वार्ता कर बिजली विभाग में गड़बड़ियों का गंभीर आरोप लगाए हैं.
10 जून को होगी अगली सुनवाईः इस दौरान उन्होंने कहा कि "गुरुवार (14 मई) को हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) में हुई सुनवाई के दौरान बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) अपने वकीलों की पूरी फौज के साथ पहुंचीं थी. लेकिन हमारे द्वारा प्रस्तुत किए गए तथ्यों का उनके पास कोई जवाब नहीं था. मेरी याचिकाओं की स्टीक और अटूट कानूनी संरचना के सामने विपक्षी पक्ष पूरी तरह मौन हो गया, जिसके चलते आयोग को अगली सुनवाई 10 जून 2026 के लिए निर्धारित करनी पड़ी."
एफपीपीएस वृद्धि के दावा दावा कानूनी रूप से गलतः प्रो. सम्पत सिंह ने बताया कि "यह पूरा मामला संस्थागत भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं की कई परतों को उजागर करता है. बिजली वितरण कंपनियां नवंबर 2025 के 1,134 करोड़ रुपए के एफपीपीएस वृद्धि दावे को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही हैं, जो केवल एक निजी कंपनी से संबंधित है. यदि अन्य मामलों को भी शामिल किया जाए तो यह राशि हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है." उन्होंने कहा कि "विनियमन 68.1(3) के तहत निर्धारित एन+2 माह की अनिवार्य अवधि में कार्रवाई न करने के कारण यह दावा कानूनी रूप से समाप्त हो चुका है."
1,300 करोड़ रुपए के भुगतान सवालों के घेरे मेंः इसके साथ ही उन्होंने अक्टूबर 2025 में सिक्किम ऊर्जा लिमिटेड (ग्रीनको) को किए गए 1,300 करोड़ रुपए के भुगतान का खुलासा करते हुए कहा कि "यह भुगतान गोपनीय और संदिग्ध तत्परता के साथ किया गया, जिसमें न केवल मुख्यमंत्री को दरकिनार किया गया बल्कि ऊर्जा मंत्री अनिल विज तक को अंधेरे में रखा गया." उन्होंने आरोप लगाया कि "एक ओर बिजली कंपनियां जनता से कैरींग कॉस्ट वसूलने की मांग कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर वर्ष 2021 से दबाकर रखे गए 2,263 करोड़ रुपए के नकारात्मक एफएसए अधिशेष पर पूरी तरह मौन हैं. जबकि यह राशि उपभोक्ताओं की है और इसे उपभोक्ताओं को लौटाया जाना चाहिए."
ग्रीनको के भुगतान की स्वतंत्र जांच की मांग: उन्होंने विशेष रूप से सिक्किम ऊर्जा लिमिटेड (ग्रीनको) को किए गए 1,300 करोड़ रुपए के भुगतान की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि "यह स्पष्ट होना चाहिए कि इस भुगतान को किसने अधिकृत किया, किस प्रक्रिया के तहत किया गया, किन शर्तों पर किया गया और इतनी असामान्य जल्दबाजी क्यों दिखाई गई."
हरियाणा सरकार ने 1,971 करोड़ रुपए की सब्सिडी जारी नहीं की: प्रो. सिंह ने कहा कि "विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 65 स्पष्ट रूप से कहती है कि सब्सिडी का भुगतान अग्रिम रूप से किया जाएगा. इसके बावजूद हरियाणा सरकार द्वारा 1,971 करोड़ रुपए की सब्सिडी जारी नहीं की गई, जिसके कारण बिजली वितरण कंपनियों को अपनी नकदी आवश्यकता पूरी करने के लिए व्यावसायिक ऋण लेने पड़े. उन्होंने बताया कि लगभग 22 लाख उपभोक्ताओं, जिनमें सरकारी विभाग भी शामिल हैं, पर लगभग 8,200 करोड़ रुपए की बकाया राशि है. यह अत्यंत विडंबनापूर्ण स्थिति है कि सरकार स्वयं अपने बिजली बिलों का भुगतान नहीं करती, लेकिन आम घरेलू उपभोक्ताओं से उसकी कीमत वसूलना चाहती है."
कुप्रबंधन की देन है बिजली कंपनियों का घाटा: प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि "31 मार्च 2026 तक बिजली वितरण कंपनियों का कुल बकाया ऋण 22,132 करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है, जबकि 31 मार्च 2025 तक दोनों कंपनियों का संचयी घाटा 27,915 करोड़ रुपए था. यह किसी बाहरी संकट का परिणाम नहीं, बल्कि सुधारों में देरी और जानबूझकर किए गए कुप्रबंधन की देन है."
मामले की जांच सीएजी से कराने की मांगः उन्होंने कहा कि "यदि आवश्यकता पड़ी तो इस मामले की जांच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से कराई जानी चाहिए. हरियाणा की जनता को यह जानने का अधिकार है कि जब 84 लाख परिवार सरकार द्वारा कानूनी रूप से देय सब्सिडी की प्रतीक्षा कर रहे थे, तब 1,300 करोड़ रुपए चुपचाप एक निजी कॉरपोरेट समूह के खातों में कैसे पहुंचा दिए गए."

