ईरान-इजराइल के बीच युद्ध में कूदे देवास से BJP सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी
ईरान-इजराइल के बीच जारी जंग को लेकर पूरी दुनिया में हलचल है. अब बीजेपी सांसद महेंद्र सोलंकी का बयान चर्चा में.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 3, 2026 at 6:07 PM IST
इंदौर : इजराइल से जंग के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत को लेकर कई देशों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. भारत में भी प्रदर्शन हुए हैं. इस मामले में देवास-शाजापुर से बीजेपी के सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी भी कूद पड़े हैं. बीजेपी सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी ने खामनोई की मौत पर सोशल मीडिया पर लिखा "रमजान में अल्लाह का नाम लीजिए, खामेनेई तो गए 72 हूरों के पास."
बीजेपी सांसद के बयान पर कांग्रेस की आपत्ति
इजराइल के हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर को लेकर सोशल मीडिया पर मचे बवाल का जिक्र करते हुए बीजेपी सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी ने लिखा "रमजान के पवित्र महीने में अल्लाह के बंदों को अल्लाह का नाम लेना चाहिए और हुजूर ए पाक को याद करना चाहिए, लेकिन लोगों ने सोशल मीडिया पर खामेनेई खामेनेई लगा रखा है. अब तो खामेनेई 72 हूरों के पास जा चुके हैं." उनके इस बयान पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है. कांग्रेस ने इसे असंसदीय और आपत्तिजनक बयान बताया है.

अपने बयान पर अड़े बीजेपी सांसद
वहीं, ईटीवी भारत से चर्चा करते हुए बीजेपी सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा "खामेनेई समर्थक मौलवियों और कथित तौर पर उनकी मान्यताओं में उल्लेख है कि जो लोग समाज और क़ौम के लिए अच्छा काम करते हैं उन्हें जन्नत में 72 हूरें नसीब होती हैं. मैंने इस मान्यता के अंतर्गत कहा है, इसमें कुछ भी गलत नहीं है लेकिन फिर भी मेरे बयान को कुछ लोग अनावश्यक बड़ा चढ़ाकर पेश कर रहे हैंं, जो ठीक नहीं है."
इस बयान पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज राजानी का कहना है "ऐसे असंवेदनशील बयान उन्हें नहीं देना चाहिए लेकिन वे फिर भी अपने बयान पर कायम हैं तो फिर कोई क्या कह सकता है. लेकिन ये संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं है."
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जानिए कौन हैं बीजेपी सांसद महेंद्र सोलंकी
महेंद्र सोलंकी लोकसभा से सांसद बनने के पूर्व जिला जज रह चुके हैं, जो देवास के नरखेड़ी गांव के रहने वाले हैं. महेंद्र सोलंकी ने देवास शाजापुर लोकसभा से दूसरी बार चुनाव लड़ा और भारी बहुमत से जीते. महेंद्र सोलंकी देवास के एक गरीब परिवार से रहे हैं, जिन्होंने पारिवारिक संघर्ष के बावजूद देवास से इंदौर पहुंचकर विधि की पढ़ाई की और बाद में जज बने. शुरू से ही संघ पृष्ठभूमि से प्रभावित रहने के कारण उन्होंने शासकीय सेवा से त्यागपत्र देकर लोकसभा चुनाव लड़ने के दौरान सभी को चौंका दिया था.

