सिंहस्थ में मास्टर स्ट्रोक होगा सुपर हाइवे, पर्वत को चीरते हुए पहुंचाएगा महाकाल लोक
इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के जरिए धार्मिक स्थानों की कनेक्टिविटी होगी आसान, कई प्रमुख धार्मिक स्थानों से जुड़कर बनाएगी इंटीग्रेटेड आस्था, सिहंस्थ श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 23, 2026 at 4:10 PM IST
|Updated : June 23, 2026 at 4:30 PM IST
इंदौर: इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत इसकी धार्मिक स्थानों की कनेक्टिविटी है. यह परियोजना केवल इंदौर और उज्जैन को जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश के कई प्रमुख धार्मिक स्थानों से जुड़कर एक इंटीग्रेटेड आस्था बनाएगी, क्योंकि, जब एक ही कॉरिडोर कई धार्मिक और ऐतिहासिक शहर को जोड़ता है, तो वह केवल एक कॉरिडोर नहीं बल्कि आस्थाओं का केंद बन जाता है. इसके साथ ही सिंहस्थ 2028 के लिहाज से श्रद्धालुओं के लिए काफी महत्वपूर्ण है.
सिंहस्थ श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण
इंदौर के सांवेर विधानसभा क्षेत्र के चंद्रावतीगंज में इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर परियोजना का भूमिपूजन करते हुए केंद्रीय शहरी विकास मंत्री खट्टर ने कहा, "आतंकवाद के बाद नक्सलवाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती था, लेकिन केंद्र सरकार ने प्रभावी रणनीति अपनाकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित की है. पिछले वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं और देश तेज गति से विकास कर रहा है."
पितृ पर्वत से महाकाल लोक तक कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को ऐतिहासिक परियोजना बताते हुए कहा, "करीब तीन हजार करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली यह सड़क क्षेत्र के विकास को नई दिशा देगी. यह मार्ग भविष्य में दिल्ली कॉरिडोर से भी जुड़ेगा और पितृ पर्वत से महाकाल लोक तक बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा. पुराना मार्ग अब विकास के नए रास्ते में बदलने जा रहा है."

30 मिनट में इंदौर से उज्जैन का सफर
सिंहस्थ 2028 के लिहाज से भी इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर काफी महत्वपूर्ण है. करीब 48 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर का निर्माण लगभग 2935 करोड़ रुपए की लागत से किया जाएगा. यह कॉरिडोर इंदौर के पितृ पर्वत क्षेत्र से शुरू होकर उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर के पास सिंहस्थ बायपास तक पहुंचेगा. जिसके बाद इंदौर और उज्जैन के बीच आवागमन अधिक सुगम और तेज होगा.
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इस कॉरिडोर से इंदौर के 20 और उज्जैन के 8 गांव सीधे तौर पर जुड़ेंगे. जबकि आसपास के 40 से 50 गांवों के करीब 15 लाख लोगों को इसका लाभ मिलेगा. इसके साथ ही बाहरी राज्यों से आने वाले श्रद्धालु एयरपोर्ट से सीधे इस मार्ग के जरिए उज्जैन पहुंच सकेंगे, जिससे सिंहस्थ के दौरान ट्रैफिक दबाव कम होगा और यात्रा अधिक सुगम बनेगी.

