चाय के दीवानों और सेहत वालों पढ़ लें खबर, बंद हो सकती है सांची दूध की सप्लाई
इंदौर में सांची दुग्ध संघ को घाटा, कई मांगों को लेकर 5 मार्च से कर सकते हैं हल्ला बोल आंदोलन, रोक सकते हैं सप्लाई.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 4, 2026 at 1:38 PM IST
रिपोर्ट: सिद्धार्थ माछीवाल
इंदौर: राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) को सौंपे गए इंदौर दुग्ध संघ में बोर्ड प्रबंधन की मनमानी और कुछ फैसलों के कारण दुग्ध उत्पादकों व प्रबंधन के बीच विरोध की स्थिति बन गई. अपनी कई मांगों को लेकर संभाग के हजारों दुग्ध उत्पादक किसान अब दुग्ध संघ को दूध की सप्लाई रोकने को तैयार हैं.
आरोप सांची दुग्ध संघ को करोड़ों का घाटा
राज्य सरकार ने हाल ही में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और अन्य राज्यों की तरह डेयरी प्रोडक्ट के आधुनिकीकरण की उम्मीद में सांची दुग्ध संघ को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड सौंपा है. ऐसा आरोप है कि इस बीच सांची दुग्ध संघ में बोर्ड के अधिकारियों ने इंदौर दुग्ध संघ में तैयार 500 मैट्रिक टन दूध पाउडर अपनी ही एक अन्य सहयोगी संस्था मदर डेयरी को बिना टेंडर प्रक्रिया के ₹260 किलो के हिसाब से दे दिया. इससे सांची दुग्ध संघ को करोड़ों रुपए का घाटा हुआ.
दुग्ध उत्पादक किसानों को भुगतना पड़ रहा अंजाम
इसी प्रकार सांची में तैयार बटर को मदर डेयरी को दे दिया. ऐसी स्थिति में इंदौर दुग्ध संघ 15 किलो की पैकिंग में न तो सांची घी तैयार कर पाया और न ही सप्लाई हो पाई. इसके अलावा अन्य मनमाने फैसलों के कारण इंदौर दुग्ध संघ के तमाम उत्पादों की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ खरीदी बिक्री भी घट गई है. दरअसल इंदौर दुग्ध संघ के अधीन करीब 60000 दुग्ध उत्पादक प्रतिदिन 6 से 7 लाख लीटर दूध का उत्पादन करते हैं. जिसका इंदौर दुग्ध संघ में 4 से 5 लाख लीटर का कलेक्शन है.
यहां दूध से पाउडर बनाने का प्लांट होने के कारण दूध से पाउडर भी बनाया जाता है. जिसे सांची के उत्पाद होने के बावजूद अब मदर डेयरी के जरिए बेचा जा रहा है. ऐसी स्थिति में इंदौर दुग्ध संघ को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है. जिसका खमियाजा संभाग के दुग्ध उत्पादक किसानों को भुगतना पड़ रहा है.

बोर्ड के फैसलों से गहराया विरोध
डेयरी बोर्ड ने 11 मार्च 2026 से दूध क्रय भाव 9 रुपए प्रति फैट प्रभावशील कर दिया, इसके अलावा मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा की गई घोषणा के बावजूद दुग्ध उत्पादकों को 1 अप्रैल 2026 से प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं हुआ. साथ ही दुग्ध संघ की वार्षिक साधारण सभा में पारित प्रस्ताव अनुसार वर्ष 2019-20, 2020-21, 2021-22 का बोनस और लाभांश का बकाया भुगतान अब तक नहीं हुआ, जो पशु आहर प्लांट में तैयार किया जाता है. उसकी गुणवत्ता कम करने के साथ प्रति किलो ₹2 दाम बढ़ा दिए गए.
5 मार्च से हल्ला बोल की तैयारी में दुग्ध उत्पादक
इसके अलावा पशु आहार का उत्पादन अब प्लांट में आधा हो चुका है. आउटसोर्स अधिकारी, कर्मचारियों को उचित मानदेय एवं समय पर वेतन का भुगतान नहीं हो रहा है. इसके अलावा साल 2019 में प्रदेश सरकार के आदेश पर महिला बाल विकास विभाग को दिए गए दूध की बकाया राशि 29 करोड़ दुग्ध संघ को मिले ही नहीं, दुग्ध उत्पादकों को संघ से मिलने वाली तमाम सुविधाएं भी बंद कर दी गई हैं. लिहाजा इंदौर संभाग के करीब 60000 दुग्ध उत्पादक किसान अब डेयरी फेडरेशन के खिलाफ 5 मार्च से हल्ला बोल आंदोलन की शुरुआत कर रहे हैं.
इंदौर सहकारी दुग्ध संघ के पूर्व अध्यक्ष मोती सिंह पटेल ने बताया "सांची और इंदौर दुग्ध संघ को फेडरेशन के हवाले करने का निर्णय शुरुआती दिनों में ही गलत साबित हुआ है. सांची और इंदौर दुग्ध संघ को बचाने के लिए अब हजारों दुग्ध उत्पादक किसानों को चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत करनी पड़ रही है. उन्होंने कहा यदि दुग्ध उत्पादक किसानों की लंबित मांगें नहीं मानी गई तो वह 6 मार्च से इंदौर दुग्ध संघ में दूध की सप्लाई बंद कर देंगे. जिसकी जिम्मेदारी इंदौर सहकारी दुग्ध संघ, शासन और प्रशासन की रहेगी."

यह होता है दूध में SNF, फैट और सीएलआर
गाय के दूध में वसा रहित ठोस पदार्थ को एसएनएफ कहते हैं, जो दूध में पानी को छोड़कर पोषक तत्वों की मात्रा माना जाता है. जिसमें प्रोटीन, लैक्टोज, कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन शामिल है. आमतौर पर गाय के दूध में एसएनएफ 8.5% से 9.00% के बीच में होता है, जो दूध की गुणवत्ता और गाढ़ेपन का पैमाना है. इसी प्रकार दूध में फट जाने से वसा एक प्राकृतिक चिकनाई है, जो मलाई और मक्खन के रूप में पहचानी जाती है.
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यह ट्राइग्लिसराइड और अन्य फैटी एसिड से बनी होती है. आमतौर पर गाय के दूध में वसा की मात्रा प्रति किलोलीटर 3 से 4% होती है. जबकि भैंस के दूध में यह 3.5% से 7% तक होती है. दूध की शुद्धता मापने का पैमाना सीएलआर यानी करेक्टेड लेक्ट्रोमीटर रीडिंग को कहते हैं. जो दूध की डेंसिटी माना जाता है. प्रति लीटर में सीएलआर 25 से 30 की संख्या में होना चाहिए. 25 से कम सीएलआर का मतलब दूध में पानी का होना है. गाय के दूध में सीएलआर 26 से 28 होती है और भैंस के दूध में यह 28 से 30 तक होती है. जिसे दूध के 15.5 डिग्री सेंटीग्रेड या 60डिग्री फारेनहाइट के तापमान पर मापा जाता है.

