45 साल बाद बदला सांची का स्वरूप, दूध के पैकेट पर दिखेगी खेत खलिहान की देसी परंपरा
सांची दूध की थैली में बड़ा बदलाव, पैकेट पर दिखेगी पशुपालन और गोंड कलाकृति की झलक. जेन-जी कल्चर में ब्रांड स्थापित करने की कोशिश. सिद्धार्थ माछीवाल की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 25, 2026 at 10:31 PM IST
|Updated : August 25, 2026 at 10:43 PM IST
इंदौर: कई दशकों से एक जैसे रूप में मिलने वाला सांची दूध अब आधुनिक रूप में नजर आएगा. जिसपर अब पारंपरिक खेत-खलिहान और गोंड कलाकृति की झलक नजर आएगी. मध्य प्रदेश में सहकारी आंदोलन और लाखों दुग्ध उत्पादक परिवारों की आजीविका का प्रतीक सांची मिल्क ब्रांड अब जेन-जी कल्चर में अपनी नई ब्रांड इमेज स्थापित करने जा रहा है.
थैलियों पर दिखेगी प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत
इंदौर दुग्ध संघ और डेयरी विकास बोर्ड ने 45 सालों में पहली बार अपने उत्पादों की नई पैकेजिंग लॉन्च की है. जिसके कारण अब सांची दूध की थैलियां आधुनिक रंगों, नए लेआउट और आकर्षक डिजाइन के साथ नजर आएंगी. खास बात यह है कि पहली बार सांची दूध की थैलियों पर मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के रूप में गोंड कलाकृति से प्रेरित डिजाइन को भी स्थान दिया गया है. इस डिजाइन के माध्यम से ग्रामीण जीवन दुग्ध उत्पादक को आकर्षक तरीके से स्थान दिया गया है. बदलते समय में आधुनिक उपभोक्ताओं की अपेक्षा के अनुरूप अब सांची दूध की थैलियां भी अपनी नई पहचान स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं.
बाजार में टिके रहने के लिए बदलाव जरूरी
मध्य प्रदेश दुग्ध संघ के पूर्व एमडी डॉ. संजय गोवाणी और इंदौर दुग्ध संघ के सीईओ विशाल मिश्रा बताते हैं कि "सांची दूध की रीब्रांडिंग उत्पाद पर भरोसे की विरासत को आगे ले जाने का प्रयास है. जो सांची के उत्पादों को बाजार में अपनी नई पहचान और बिक्री को मजबूत बनाने में सहायता करेगी. इस बार प्रोडक्ट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि पैकेट देखते ही युवा पीढ़ी और बच्चों को समझ में आएगा कि यह दूध कहां से आया है और कैसे तैयार होता है. क्योंकि बाजार में टिके रहने के लिए हर चीज में बदलाव जरूरी है."
हर दिन 3 लाख लीटर दूध का उत्पादन
इंदौर दुग्ध संघ मध्य प्रदेश कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन भोपाल की एक महत्वपूर्ण इकाई है, जिसे नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा संचालित किया जा रहा है. इंदौर दुग्ध संघ में प्रतिदिन 3 लाख लीटर दूध का संग्रह किसानों के जरिए होता है. इसी दूध से खंडवा, झाबुआ, सेंधवा और खरगोन समेत अन्य चार मिनी डेरी प्लांट में अलग-अलग तरह के उत्पाद तैयार किए जाते हैं. जिसका वितरण 148 डिस्ट्रीब्यूटर्स द्वारा लगभग 1300 रिटेलर्स के माध्यम से लाखों दूध उपभोक्ताओं तक हो रहा है.
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1300 रिटेलर्स तक पहुंच
इसके अलावा यहां प्लस सीजन में अतिरिक्त दूध से करीब 40 मीट्रिक टन मिल्क पाउडर भी तैयार किया गया है. सीईओ गौरव मिश्रा ने बताया, "नई ब्रांड इमेज सिर्फ दूध की थैलियां पर ही नहीं, बल्कि दही, छाछ, पनीर और मट्ठा सहित अन्य दुग्ध उत्पादन पर भी नजर आएगी. मिलावट के दौर में भी सांची दूध 42 तरह के परीक्षण के बाद ग्राहकों तक पहुंचता है. जो एफएसएसएआई के मानकों को पूरा करता है. इसके अलावा पनीर, घी और एनालॉग पनीर जैसी मिलावट से दूर है. जो अब नई ब्रांडिंग के साथ बाजार में नई जनरेशन के बीच भी अपनी एक अलग पहचान स्थापित करेगा."

