ऐसे जोड़ी जाती हैं रेल की पटरियां, रेलवे ट्रैक पर पहली बार उतरी स्पेशल वेल्डिंग मशीन
गोधरा-दाहोद रेलखंड की पटरियों की मरम्मत के लिए मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन का पहली बार प्रयोग. सिद्धार्थ माछीवाल की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : September 1, 2026 at 2:14 PM IST
इंदौर : देश के सबसे व्यस्ततम रेल मार्गों पर पटरियों को जोड़ने और सुधारने का काम बेहद चुनौतीपूर्ण है. ट्रेनों के लगातार मूवमेंट के कारण इसे तीव्र गति से करना होता है, यही वजह है कि अब रेलवे इस काम के लिए मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन का इस्तेमाल कर रहा है, इस तरीके से कई दिनों का काम कुछ घंटे में ही पूरा कर लिया जाता है.
नई तकनीक से जोड़ी रेल पटरियां
पश्चिम रेलवे ने मुंबई-दिल्ली के अति व्यस्त रेलमार्ग पर ट्रैक की मजबूती एवं सुरक्षित रेल परिचालन के लिए पहली बार मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन का उपयोग किया, जिसकी मदद से मात्र 3 घंटे के ट्रैफिक ब्लॉक कॉरिडोर में खराब रेलवे पटरी हिस्सों को हटाकर नए रेल पैनल लगाए गए तथा मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग तकनीक से पटरियों को जोड़ा गया.
यह कार्य गोधरा-दाहोद रेलखंड के कांसुधी-चंचेलाव खंड में डाउन मैन लाइन पर किया गया. इस दौरान निर्धारित समयावधि में कुल 4 नए रेल पैनल लगाए गए. इसके साथ ही 8 फ्लैश बट वेल्डिंग, 4 एसईजे वेल्ड तथा 2 ग्लूट जॉइंट लगाए गए.
रेलवे ट्रैफिक ब्लॉक की अवधि कई गुना घटी
रेलवे ट्रैक से मरम्मत के दौरान 22 पुराने एवं खराब वेल्ड हटाए गए, जिनमें 8 दोषपूर्ण वेल्ड समाप्त किए गए. इसके अलावा 2 वेल्ड का परीक्षण किया गया, जो संतोषजनक पाए गए. ट्रैक पर संभावित वेल्ड संबंधी खराबी को रोकने के लिए 14 एल्युमिनोथर्मिक वेल्ड बनने से भी रोके गए. मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग आधुनिक तकनीक है, जिसके माध्यम से रेलों की पटरी को उच्च गुणवत्ता के साथ आपस में जोड़ा जाता है.
इससे मजबूत एवं विश्वसनीय रेल जोड़ तैयार होते हैं. विशेष रूप से ऐसे अति व्यस्त रेलमार्गों पर, जहां ट्रैफिक ब्लॉक की अवधि सीमित होती है, यह तकनीक कम समय में अधिक ट्रैक रिन्यूअल एवं रखरखाव कार्य करने में उपयोगी है.
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कैसे काम करती है मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन
मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन चलित इंजन में इंस्टॉल रहती है. ये मशीन अपनी विशेष खूबी के कारण पटरी को मजबूत जोड़ प्रदान करती हैं, जो रेल के बोझ और झटकों को आसानी से सहन कर जाती है. रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया "इस तकनीक से कई दिनों का काम 3 घंटे में पूर्ण कर लिया गया. यह तकनीक बहुत सुरक्षित है, जिसका डिवीजन में पहली बार प्रयोग किया गया है. इस कार्य को निर्धारित तीन घंटे की समयावधि में पूरा करने के लिए 32 कर्मचारियों की मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग टीम तथा 45 कर्मचारियों की ट्रैक रिन्यूअल टीम तैनात रही. इस दौरान मोबाइल फ्लैश बट वेल्डिंग प्लांट सहित आवश्यक मशीनरी एवं संसाधनों का उपयोग किया गया."

