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धागे-धागे में गुंथी गुड़िया, जापानी आर्ट ने महक की मेहनत को पहुंचाया विदेश, क्या है अमिगुरुमी

इंदौर की महक पटेल ने जापानी कला के जरिए शुरू किया स्टार्टअप, अमिगुरुमी क्रोशिया से बने खिलौनों की दुबई से लेकर लंदन तक डिमांड. सिद्धार्थ माछीवाल की रिपोर्ट.

INDORE MEHAK PATEL TOY STARTUP
जापानी आर्ट ने महक की मेहनत को पहुंचाया विदेश (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : July 6, 2026 at 7:49 PM IST

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Updated : July 6, 2026 at 8:29 PM IST

5 Min Read
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इंदौर: हाथ से बुनाई और सिलाई पुराने दौर से ही सबसे पसंदीदा और टिकाऊ रही है, चाहे फिर वह बुनाई से खिलौने तैयार करने का हुनर ही क्यों ना हो, इंदौर में ऐसा ही एक स्टार्टअप फैशन डिजाइनर महक पटेल का है. जिन्होंने विलुप्त होती जापान की अमिगुरुमी बुनाई कला को अपना करियर बना लिया है. जो छोटे बच्चों के पसंदीदा खिलौने का ब्रांड बन चुका है. महक के ये खिलौने दुबई से लेकर लंदन तक सप्लाई हो रहे हैं.

जापानी आर्ट से तैयार करती खिलौने

इंदौर के बंगाली कॉलोनी क्षेत्र में अपने घर के बाहर छोटे से स्टॉल पर क्रोशिया से खिलौने बुन रही महक पटेल के खिलौने की मांग अब कई देशों से आ रही है, ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके खिलौने जापान की एक ऐसी आर्ट से तैयार होते हैं, जिसमें धागों से महीन और डिजाइनर बुनाई, किसी मशीन से नहीं बल्कि हाथ से होती है. एक-एक खिलौना तैयार करने में कई-कई दिन लग जाते हैं. उनमें अलग-अलग रंग के उन्हें वर्धमान धागों का अनूठा प्रयोग किया जाता है.

महक पटेल से ईटीवी भारत ने की बात (ETV Bharat)

3D इमेज जैसे दिखते हैं खिलौने

इसके बाद जो खिलौने तैयार होते हैं, वह अपने आप में खास नजर आता है, क्योंकि वह सॉफ्ट धागे से और सुंदर रंगों के समायोजन से अपने एक अलग रूप में निखर आता है. इस आर्ट में तैयार होने वाले खिलौने 3D इमेज जैसे दिखते हैं. इसलिए भी इस आर्ट से खिलौने तैयार करने में एक अलग हुनर की जरूरत पड़ती है. इतनी छोटी उम्र में उनके स्टार्टअप के खिलौने कई देशों में पहुंचने की वजह भी रोचक है.

न्यूयॉर्क फैशन वीक में महक ने किया था खिलौने को प्रेजेंट

कॉलेज के दिनों में जब महक ने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करते हुए अपना प्रोजेक्ट सबमिट किया, तो उन्होंने इसी कला से तैयार एक खिलौना बनाया था. इसके बाद न्यूयॉर्क फैशन वीक में जब उन्होंने अपने खिलौने का कलेक्शन प्रेजेंट किया तो भी उन्हें बड़ी सराहना मिली. इसके बाद टीचर दीपिका शर्मा ने उन्हें इसी काम में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और जापान की आमीगुरुमी बुनाई से खुद खिलौने तैयार करने के लिए प्रेरित किया.

MEHAK PATEL STARTUP TOY CARRIAGE
टॉय कैरेज की मालिकन बनी महक (ETV Bharat)

टॉय कैरेज की मालिकन बनी महक, विदेशों से डिमांड

इसके बाद महक ने जब खिलौने तैयार करके उन्हें अपने व्यक्तिगत स्तर पर इंस्टाग्राम में प्रमोट किया तो, उनके पास देश-विदेश से खिलौने तैयार करने के ऑर्डर आने लगे. नतीजतन कुछ सालों में ही वह अब अपने छोटे से स्टार्टअप टॉयज कैरेज की मालकिन बन चुकी है. जो ऑर्डर पर अपने हाथ से तैयार किए गए खिलौने देश-विदेश में एक्सपोर्ट करती है. ईटीवी भारत से चर्चा में महक बताती है कि "दुनिया भर में इस तरह के खिलौने इसलिए भी पसंद किए जाते हैं, क्योंकि यह छोटे बच्चों के हिसाब से नर्म मुलायम और आकर्षक होते हैं.

लोगों की इच्छा और कैरेक्टर के हिसाब से तैयार करती खिलौने

दूसरा इन्हें बनाने की थीम और बच्चों के पसंदीदा कैरक्टर को उनकी डिजाइन और स्वरूप में आकर दिया जाता है. इसलिए यह हर खिलौने अपने आप में नायाब होता है. भारत और जापान जैसे देशों में तो इस आर्ट को जानने वाले लोग हैं, लेकिन अमेरिका, लंदन और दुबई जैसे देश में इन खिलौनों की जबरदस्त मांग है. लिहाजा वे भारत के अलावा अब लोगों की इच्छा और थीम कैरेक्टर के हिसाब से ऑर्डर पर खिलौने तैयार करती हैं.

MEHAK MAKE TOYS BY JAPANESE ART
अमिगुरुमी क्रोशिया से बनाए खिलौने और दूसरे सामान (ETV Bharat)

भारतीय ऊन का इस्तेमाल, प्लास्टिक और दूसरी सामाग्री का इस्तेमाल नहीं

उन्होंने बताया आज भी भारतीय ऊन सबसे मुलायम और मजबूत माना जाता है. इसलिए वह अपने खिलौने में उनका ही उपयोग करती हैं. इसके लिए वह पहले टॉयज के कैरेक्टर के हिसाब से उनके शरीर के अलग-अलग हिस्से बुनती है, फिर उन्हें सिलाई और क्रोशिया से जोड़ती है, क्योंकि पूरे खिलौने में कहीं भी प्लास्टिक या अन्य कोई सामग्री का उपयोग नहीं होता. इसलिए सालों साल यह टिकाऊ रहते हैं और कपड़ों की तरह ही धुलने योग्य भी हैं. इसलिए भी इन्हें अब ज्यादा पसंद किया जा रहा है.

4 साल पहले शुरू किया था बिजनेस, खिलौनों की यह है कीमत

महक ने 21 साल की उम्र में ग्रेजुएशन करते समय यह स्टार्टअप शुरू किया था. जिसे 4 साल हो चुके हैं. वह बताती है कि साल भर में उनके 50 से 60 खिलौने एवं अन्य उत्पाद ऑनलाइन बिक जाते हैं. जिनकी एक खिलौने की कीमत 2000 से लेकर 10000 तक होती है. फिलहाल महक एमबीए कर रही है. वह इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की छात्र है. महक ने अपना ग्रेजुएशन इंदौर के ही कॉलेज जिसका नाम न्यूयॉर्क इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन ग्लोबल से किया था.

MEHAK TOYS DEMAND DUBAI US LONDON
ऊन से बने खिलौने (ETV Bharat)

खिलौने बनाने की बुनाई कला

दरअसल, अमी यानी बुना हुआ, या फिर क्रोशिया से बुना हुआ और नुईगुरुमी का मतलब भरवा, इसे स्पाइरल आकार या गोल आकार में बनाया जाता है. इसके अंदर रुई या पॉलिएस्टर भरकर 3D खिलौने बनाए जाते हैं. फिलहाल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इन खिलौनों की बड़ी मांग है. इसे बनाने में क्रोशिया की सिंगल क्रोशिया या मैजिक रिंग तकनीक का उपयोग ज्यादा होता है.

Last Updated : July 6, 2026 at 8:29 PM IST