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कार्बन एमिशन फ्री होगा खजराना गणेश मंदिर, लाखों का बिजली बिल बचाने सौर ऊर्जा से होगा अपग्रेड

इंदौर के खजराना गणेश मंदिर का बिजली बिल जीरो करने के लिए 2022 में लगे सोलर प्लांट को किया जाएगा अपग्रेड. सिद्धार्थ माछीवाल की रिपोर्ट.

INDORE KHAJRANA GANESH TEMPLE
कार्बन एमिशन फ्री होगा खजराना गणेश मंदिर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 29, 2026 at 3:51 PM IST

3 Min Read
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इंदौर: प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर अब विद्युत प्रयोग के लिहाज से पूरी तरह आत्मनिर्भर मंदिर होगा जहां सूर्य की रोशनी और रूफटॉप पैनल के जरिए होने वाले बिजली उत्पादन से मंदिर दिन-रात जगमग रहेगा. खजराना गणेश मंदिर जीरो वेस्ट मंदिर होने के साथ अब कार्बन एमिशन फ्री मंदिर होगा.

कार्बन एमिशन फ्री होगा खजराना मंदिर

खजराना गणेश मंदिर को पूरी तरह बिजली के लिहाज से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सौर ऊर्जा से अपग्रेड किया जा रहा है. हाल ही में मंदिर समिति द्वारा लिए गए फैसले के मुताबिक यहां पूर्व में लगाए गए सोलर प्लांट को और अधिक अपग्रेड किया जाएगा, जिससे कि हर महीने बिजली के उपयोग की जाने वाली राशि की बचत की जा सके.

लाखों का बिजली बिल बचाने सौर ऊर्जा से होगा अपग्रेड (ETV Bharat)

बिजली के लिहाज से आत्मनिर्भर होगा खजराना मंदिर

मंदिर प्रबंध समिति के प्रमुख और इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के मुताबिक, "मंदिर पहले से जीरो वेस्ट है लेकिन पूरे परिसर में उपयोग की जाने वाली बिजली से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष तरीके से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को रोकने के लिए अब मंदिर में रूफटॉप प्लांट की क्षमता को बढ़ाया जा रहा है, जिससे कि बिजली के लिहाज से मंदिर पूरी तरह आत्मनिर्भर हो सकेगा."

हर माह आता है 2 से ढाई लाख बिजली का बिल

वर्तमान में खजराना गणेश मंदिर परिसर के अलावा भोजनालय में जलापूर्ति के लिए लगाए गए आरओ प्लांट और अन्य उपयोग में जो बिजली खर्च होती है, उसका मासिक बिजली बिल तकरीबन 2 लाख से ढाई लाख रुपए आता है. इस बिलिंग को कम करने के लिए 2022 में ही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मंदिर परिसर की छत पर 55 लाख रुपए की लागत से 150 किलोवॉट क्षमता का सोलर प्लांट लगाया गया था. जिसके जरिए फिलहाल करीब 14000 यूनिट बिजली का उत्पादन होता है, जिसके चलते मंदिर के कुल बिजली बिल में से हर महीने तकरीबन 90000 रुपए की बचत होती है.

नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने बताया, "अब मंदिर की प्रबंध समिति ने बिजली के लिहाज से मंदिर को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए पुराने प्लांट की क्षमता को और ज्यादा बढ़ाने का फैसला किया है. जिससे कि अतिरिक्त सोलर पैनल लगाए जाने पर बिजली के बल की लागत को शून्य किया जा सके."

मंदिर पहले से है जीरो वेस्ट

खजराना मंदिर को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से जीरो वेस्ट किया गया है. जहां सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध है. इसके अलावा मंदिर से निकलने वाली हर फूल और अन्य सामग्री का पर्यावरण हितैषी प्रबंधन होता है. यहां भी गले और सूखे कचरे को अलग-अलग करके उससे खाद और धूपबत्ती का निर्माण किया जा रहा है, वही फूलों से कंपोज यूनिट में जैविक कचरा से उच्च कोटि की खाद बनाई जा रही है. जिसका उपयोग नगर निगम प्लांटेशन अभियान में करता है.