देश के चिड़ियाघर कर रहे इंदौर जू के पशु पक्षियों की डिमांड, टाइगर और एशियाई शेर हुए 3 गुना
इंदौर के चिड़ियाघर में मौजूद हैं 169 प्रजाति के 1350 वन्य जीव. एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत कई चिड़ियाघरों से मांग. सिद्धार्थ माछीवाल की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 20, 2026 at 5:55 PM IST
इंदौर: देश के वन्य अभयारण्यों में जहां लगातार हो रही मौतों के कारण वन्य प्राणियों की संख्या घट रही है, वहीं इंदौर का कमला नेहरू प्राणी उद्यान भारतीय और अन्य विदेशी वन्य पशु पक्षियों का ब्रीडिंग हब होने के कारण तेजी से संख्या बढ़ रही है. इसी कारण एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत कई चिड़ियाघरों से यहां के वन्य जीवों की डिमांड बढ़ रही है.
इंदौर चिड़ियाघर में 169 प्रजाति के 1350 वन्य जीव मौजूद
इंदौर का कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय देश का एकमात्र ऐसा लघु श्रेणी का चिड़ियाघर है, जहां 169 प्रजाति के 1350 वन्य जीव मौजूद हैं. इनमें पक्षी और सरीसृप वर्ग के दुर्लभ प्राणी भी मौजूद हैं. इसके अलावा ऐसे तमाम दुर्लभ और विलुप्त प्रजाति के जीव जंतु हैं, जिन्हें यहां विलुप्त होने से बचाया गया है. इतना ही नहीं यहां अमेरिका, अफ्रीका, ब्राजील और दक्षिणी महाद्वीपों के ऐसे दुर्लभ पक्षी मौजूद हैं, जो यहां आने के बाद यहीं के होकर रह गए और ब्रीडिंग कर रहे हैं.
दुर्लभ पक्षियों के साथ हर प्रकार के जंगली जानवर हैं मौजूद
कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में तरह-तरह के तोतों के अलावा सफेद टाइगर, रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई शेर, तेंदुए, हिप्पो हाथी, हिमालय कृष्णामृग, एनाकोंडा, ऑस्ट्रिच क्रोकोडाइल आदि हैं. इसी प्रकार दुर्लभ पक्षियों में सफेद मोर, मकाउ तोता, कॉकाटूस कैनयूर और लोरीकीट्स हैं. इनके अलावा टूराको और पेंटेड स्ट्रोक भी यहीं पाए जाते हैं. इसके अलावा लेडी आर्मस्ट पीजेंट पक्षी भी यहां की शोभा बढ़ा रहे हैं जबकि सरीसृप वर्ग में एनाकोंडा, मगर क्रोकोडाइल और घड़ियाल हैं. इसके अलावा इंडियन मॉनिटर लिजॉर्ड और तरह-तरह के सांप मौजूद हैं जो यहां के स्ट्रेस फ्री हेल्दी लिविंग वातावरण में लगातार वृद्धि कर रहे हैं.
एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत कई चिड़ियाघरों से मांग
फिलहाल स्थिति यह है कि यहां टाइगर और एशियाई शेरों की संख्या चिड़ियाघर की क्षमता से 3 गुनी हो चुकी है. जिनकी मांग एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के फलस्वरुप देश के अन्य चिड़ियाघरों में की जा रही है. हालांकि इंदौर के चिड़ियाघर में जो प्राणी नहीं हैं उनके बदले में यहां से वन्य प्राणियों की शेयरिंग होती है. हाल ही में यहां अफ्रीकन जेब्रा को लाया गया था, जिनकी संख्या में भी अब लगातार वृद्धि हो रही है. इसके अलावा ऐसे लेपर्ड हैं जो इंदौर और आसपास के वन क्षेत्र से घायल होने या अन्य कारण से यहां लाए गए हैं, वे भी यहां मौजूद हैं.
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'इंदौर चिड़ियाघर में सभी प्रकार के दुर्लभ पशु-पक्षी'
चिड़ियाघर के प्रभारी डॉ उत्तम यादव का कहना है, "देश के अन्य 180 चिड़ियाघरों में से अन्य कोई लघु श्रेणी का चिड़ियाघर नहीं है जहां इंदौर के बराबर संख्या हो. देश की अन्य फॉरेस्ट सेंचुरी और बड़े चिड़ियाघरों में जितने प्रकार के दुर्लभ पशु पक्षी नहीं पाए जाते वह सभी इंदौर के चिड़ियाघर में मौजूद हैं. इतना ही नहीं संख्या और वैरायटी के हिसाब से अन्य कोई भी जू इंदौर के आसपास नहीं ठहरता क्योंकि यहां 51 एकड़ के विस्तृत क्षेत्र में हर पशु पक्षी का विशेष ध्यान रखा जाता है. जिसके चलते यह है दुर्लभ पक्षियों का भी ग्रोथ सेंटर बनकर उभरा है.

