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इंदौर का हाई प्रोफाइल बकरा, ठाट पूरे नवाबी, ड्राई फ्रूट और दूध का शौकीन, कीमत 8 लाख

इंदौर में जमनापारी नस्ल का बकरा आकर्षण का केंद्र. सेल्फी लेने और रील बनाने लोग दूर-दूर से आ रहे. रिपोर्ट सिद्धार्थ माछीवाल.

Indore High Profile Goat
इंदौर में जमनापारी नस्ल का बकरा आकर्षण का केंद्र (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : May 28, 2026 at 12:38 PM IST

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इंदौर : ईद पर देशभर में बकरों की कुर्बानी दी जाती है. इससे पहले बकरों की खास देखभाल की जाती है और उन्हें खिला-खिलाकर तगड़ा बनाया जाता है. इंदौर में एक ऐसा ही बकरा है 200 किलो का, जिसकी लंबाई टाइगर जितनी है. मोइन खान ने पिछले साल 75 हजार रुपये में पंजाब से खास बकरा खरीदा था, तभी से वे कुर्बानी के लिए इसे वीआईपी ट्रीटमेंट दे रहे हैं. रोज नाश्ते में यह बकरा 250 ग्राम काजू, बादाम, अखरोट खाता है. रोज 2 लीटर दूध भी पीता है.

भीषण गर्मी से बचाने एयर कंडीशनर

इस हाई प्रोफाइल बकरे को मिनरल वाटर दिया जाता है. भीषण गर्मी से बचाने के लिए एयर कंडीशनर में रखा जाता है. बकरे के मालिक मोईन खान ने बताया "सालभर से उसे इसी तरह का वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने के कारण बकरा 5 फीट लंबाई का हो चुका है. आमतौर पर इतनी ज्यादा लंबाई और हाइट टाइगर की होती है. वीआईपी ट्रीटमेंट व हाई प्रोफाइल लिविंग फैसिलिटी के चलते बकरे का वजन 200 किलो का हो चुका है, जो शहर के अन्य बकरों की तुलना में सबसे ज्यादा है.

इंदौर का हाई प्रोफाइल बकरा, ठाट पूरे नवाबी (ETV BHARAT)

बकरे के साथ सेल्फी व रील बनाने का क्रेज

इस खास बकरे को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं. मोइन खान से कई लोग बकरे को खरीदना चाहते हैं. उसकी अब तक 8 लाख रुपए कीमत लग चुकी है. हालांकि मोइन खान उसे बेचना नहीं चाहते. लोग खास तरह के इस बकरे के साथ रील बनाने आ रहे हैं. मोइन खान ने बताया "ये पंजाब से सालभर पहले खरीदा था. ये बकरे की जमनापारी नस्ल है. सालभर के दरमियान बकरा घर के बच्चों से भी काफी हिल मिल गया है. घर के सदस्यों का भी बकरे से खास लगाव है.

ईद पर इसलिए दी जाती है कुर्बानी

इस्लाम में मान्यता है कि अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने के लिए उन्हें अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने का हक दिया था. इब्राहिम ने अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी देने का फैसला किया. इसके बाद कुर्बानी देने के लिए हजरत इब्राहिम ने जैसे ही छुरी चलाई तो अल्लाह ने उनका समर्पण और इबादत देखकर इस्माइल को जीवनदान दिया और इस्माइल की जगह एक मेमने को रख दिया, तभी से ईद पर बकरे की कुर्बानी की परंपरा है, जो अल्लाह के प्रति सच्ची इबादत आस्था और समर्पण की मिसाल मानी जाती है.