'मंदिर की सारी संपत्ति भगवान की', 7 दशक पुराने विवाद में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला
उज्जैन के खाचरौद स्थित मंदिर की प्रॉपर्टी पर किसी पक्ष का हक नहीं. धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल की अनुमति. संदीप मिश्रा की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 26, 2026 at 1:24 PM IST
इंदौर : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उज्जैन के खाचरोद स्थित भगवान श्री राम के मंदिर की संपत्ति और देखरेख को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. कोर्ट ने आदेश दिए "मंदिर की सारी संपत्ति के मालिक भगवान श्री राम ही हैं." मंदिर की संपत्ति को लेकर विवाद बीते 72 साल से चल रहा है. विवाद की शुरुआत साल 1954 में हुई थी. तभी से ये मामला कोर्ट में चल रहा था.
साल 1968 में हाई कोर्ट में याचिका दायर
याचिका की सुनवाई जस्टिस विनय सराफ की कोर्ट में हुई. मंदिर की संपत्ति को लेकर महंत परिवार, माहेश्वरी समाज व शासन के बीच विवाद चल रहा था. विवाद को लेकर सन् 1954 में याचिका कोर्ट में दायर की गई थी. इसके बाद सन् 1968 में इंदौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई. हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए आदेश दिया "मंदिर की संपत्ति का अंतिम अधिकार उसमें विराजित भगवान श्री राम के पास रहेगा और उस संपत्ति का उपयोग केवल धार्मिक एवं सार्वजनिक कार्यों के लिए किया जा सकता है." कोर्ट ने किसी भी व्यक्ति विशेष को मंदिर की संपत्ति का अधिकार नहीं दिया.
मंदिर की संपत्ति पर अलग-अलग दावे
मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों की ओर से मंदिर और उसकी संपत्ति पर अधिकार को लेकर अलग-अलग दावे किए गए. विवाद का मुख्य सवाल यह था कि मंदिर से जुड़ी संपत्ति का वास्तविक स्वामी किसे माना जाए और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना चाहिए.
- जबलपुर में प्रॉपर्टी विवाद में बेटे ने वृद्ध पिता को नशा मुक्ति केंद्र में बंधक बनाया
- सिंधिया राज परिवार में अरबों का संपत्ति विवाद, आपसी सहमति से सुलह का फॉर्मूला तैयार
अन्य मंदिरों के विवाद के मद्देनजर अहम फैसला
जानकारों का कहना है कि अदालत का यह निर्णय मंदिर की संपत्ति के कानूनी स्वामित्व को लेकर बेहद अहम है. इस फैसले के बाद अन्य मंदिरों के विवाद में निकारण मिल सकेगा. मंदिर की संपत्ति के स्वामित्व और उसके इस्तेमाल को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीदें बढ़ी है.

