खजराना गणेश मंदिर में दानपात्र लेकर आते हैं पुजारी, चढ़ावे के पैसों में सेंधमारी का आरोप
इंदौर में स्थित प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में चढ़ावा और दान में सेंधमारी का पुजारियों पर आरोप. जांच के आदेश.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : July 8, 2026 at 3:57 PM IST
|Updated : July 8, 2026 at 5:14 PM IST
इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में स्थित प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर भले देशभर में लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हो, लेकिन यहां के पुजारियों ने देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा स्थापित प्राचीन मंदिर के चढ़ावे और दान की राशि में सेंध लगाने के लिए अजब तरीका अपना रखा है. यही वजह है कि यहां के पुजारी ने मंदिर के हिस्से में आने वाली दान राशि में सेंध लगाने के लिए मंदिर की दान पेटियों के अलावा निजी तौर पर मूर्तियों के पास रखे गए दानपात्र के जरिए दान प्राप्त करने की समानांतर व्यवस्था कर रखी है.
3 महीने में डेढ़ करोड़ से 5 करोड़ का दान
खजराना मंदिर में भी करीब 40 से ज्यादा दान पेटी मौजूद हैं. हर तीन महीने में इन पेटियों में आने वाली दान की राशि डेढ़ करोड़ से लेकर 5 करोड़ तक एकत्र होती है. जिसे मंदिर की प्रबंध समिति की निगरानी में गिनती के बाद बैंक में जमा कराया जाता है. हालांकि गिनती के दौरान बाकायदा 80 सीसीटीवी कैमरे और अन्य व्यवस्था रहती है इसलिए इस राशि में सेंध लगाना संभव नहीं है.
मुख्य पुजारियों का एक लाख मानदेय
ऐसी स्थिति में यहां के पुजारियों ने अपने भक्तों से दक्षिणा लेने के लिए बाकायदा दान पात्र सजा रखे हैं. देवी-देवताओं के मंदिर में जो पुजारी विराजमान हैं वह इन्हीं दान पात्रों में अपने-अपने तरीके से दक्षिण एकत्र करते हैं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि मंदिर के मुख्य तीन पुजारियों की परिवारों की मांग पर मंदिर प्रबंध समिति ने साल 2014 में पुजारी का मानदेय 20 हजार से बढ़कर 1 लाख रुपए कर दिया था.
परिवार मासिक मानदेय
इसके बाद अब मुख्य पुजारी के परिवार का मासिक मानदेय करीब 1 लाख 75000 हजार है, जो पुजारी अधिनियम और उप नियमों के अलावा मंदिर की परंपरा के अनुसार दिया जा रहा है. इनमें मुख्य पुजारी भालचंद्र भट्ट, मोहन भट्ट, अशोक भट्ट, धर्मेद्र भट्ट, उमेश भट्ट, विनीत भट्ट और अनीता भट्ट आदि शामिल हैं.
यह कहता है मंदिर का विधान
श्री गणपति मंदिर खजराना इंदौर के अधिनियम 2003 के अनुसार, मंदिर के पूजा गृह अथवा अन्य मंदिर जो परिसर में स्थापित हैं उनकी मूर्ति के सामने जो चढ़ावा प्राप्त होता है, उसपर निगरानी के लिए निरीक्षक रखे जाएंगे. जिनका उत्तरदायित्व होगा कि यात्रियों एवं दर्शनार्थियों द्वारा जो भेंट मूर्तियों के सामने अथवा जलधारी में चढ़ाई जाती है उसे तत्काल भेंट पात्र में डाला जाए. इसके अलावा जो आभूषण सोना, चांदी और रत्न, वस्त्र जैसी मूल्यवान वस्तुएं सूचीबद्ध करके कार्यालय में जमा करें. पुजारी को उसकी सेवा अवधि के दौरान चढ़ावे के रूप में प्राप्त राशि और वस्तु को पूजा गृह में स्थापित दान पत्र में प्रवेश कराएं. पुजारी का यह कर्तव्य होगा की मूर्ति के सम्मुख दर्शनार्थियों द्वारा रखी जाने वाली नकद राशि को भेंट पत्र में अथवा दान पेटी में प्रविष्ट कराएं.

ऐसी है मंदिर के पुजारियों की व्यवस्था
श्री खजराना गणेश मंदिर में होलकर राज्य के समय से वंश परंपरा के अनुसार, पुजारी श्री मंगल भट्ट के वंशज थावर जी एवं केशव जी के वंशजों की शाखों के अंतर्गत दो मुख्य पुजारी की नियुक्ति की व्यवस्था है. मुख्य पुजारी की सहायता के लिए कर सहायक पुजारी की नियुक्ति होती है. इसके अलावा दो सेवक एवं पांच अन्य पुजारी की नियुक्ति की जा सकेगी. जिसमें पूजा अर्चना के संपूर्ण विधान की योग्यता हो.
इन मंदिरों में पूर्णकालिक पुजारी नियुक्त
गणपति मंदिर परिसर में दुर्गा माता मंदिर, शिव मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर, शानी मंदिर, राम मंदिर और साइन मंदिर में पूर्णकालिक पुजारी नियुक्त है. जबकि अन्य 26 मंदिरों में अंशकालीन पुजारी आवश्यकता के अनुसार नियुक्त किए गए हैं. हालांकि इनके अलावा कई पुजारी और उनके सहायक भी मंदिर में मौजूद हैं.
महाकाल मंदिर में भी झोल का आरोप
उज्जैन के महाकाल मंदिर में भी चंदे में गड़बड़ी के कई आरोप लगते रहे हैं. यहां दान राशि अब सालाना 100 करोड़ से भी ज्यादा है और दान की कुल राशि का 36 परसेंट पुजारियों को देने का विधान है. जो लंबे समय से चला आ रहा है. इसके बावजूद मंदिर की कोठरी में से सोने की छड़ें और ज्वेलरी के गायब होने की जानकारी मंदिर के ऑडिट के बाद पूर्व कैग रिपोर्ट में उजागर हुई.

कई लोगों के खिलाफ हो चुके हैं मामले दर्ज
बीते कुछ सालों में यहां दान राशि में गड़बड़ी के मामले में भारी भरकम राशि की वसूली हुई और कई लोगों पर एफआईआर भी दर्ज की गई. ऐसे हालात के चलते उज्जैन के महापौर ने मंदिर के दान और ज्वेलरी के ऑडिट की मांग की थी. इधर अब अयोध्या के बाद देश भर में मंदिरों में गड़बड़ियों के आरोप सामने आ रहे हैं.
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महाकाल मंदिर के जमीन घोटाले
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने महाकाल मंदिर के जमीन घोटाले को फिर उजागर करते हुए कहा, "सुंदरलाल पटवा शासन काल में महाकाल मंदिर के पास स्थित स्कूल की जमीन पर पहले भारत माता का मंदिर बनाया गया. बाद में उसे आरएसएस का गेस्ट हाउस बनाया गया. फिर उसे तोड़कर 100 कमरों का कमर्शियल होटल बना दिया गया. यही स्थिति मंदिर में आने वाले चढ़ावा और दानराशि को लेकर भी बार-बार सामने आई."

