इंदौर में मौत के आंकड़ों पर घिरी सरकार, जब 18 मौतें नहीं हुईं तो चेक किसे बांटे? लिस्ट पर कलेक्टर का जवाब
दूषित पानी से मौत के मामले में बार-बार आंकड़ों पर सवाल, सीएम बोले- मौत के आंकड़े गिनने की प्रक्रिया का पालन कर रहा प्रशासन.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 8, 2026 at 11:10 AM IST
|Updated : January 8, 2026 at 12:05 PM IST
इंदौर : इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले में प्रदेश सरकार घिरती नजर आ रही है. दूषित पानी से हुई मौत के आंकड़ों को लेकर हर दिन अलग-अलग जानकारियां मीडिया में सामने आ रही हैं. वहीं, प्रशासनिक आंकड़ों और नेताओं के बयानों में भिन्नता के बाद अब एक कंपनसेशन लिस्ट ने प्रदेश में बवाल मचा दिया है. इस लिस्ट में दावा किया गया कि प्रशासन की ओर से 18 लोगों की मौत पर मुआवजा दिया गया है, यानी कुल 18 मौतें दूषित पानी से हो चुकी हैं. इसी बीच देश के एक प्रतिष्ठित मीडिया हाउस ने अपनी खबर में दावा किया है कि कैलाश विजयवर्गीय ने बिना फाइनल रिपोर्ट्स के इंतजार के कुछ लोगों को मुआवजा राशि के चेक बांट दिए. वहीं, मुआवजे की लिस्ट पर इंदौर कलेक्टर की प्रतिक्रिया भी सामने आई है.
इंदौर में मौत के आंकड़ों पर बवाल
जिला प्रशासन और राज्य शासन पर विपक्ष लगातार मृतकों की संख्या छिपाने के आरोप लगा रहा है. 25 दिसंबर के बाद से ही इंदौर में दूषित पानी से होने वाली मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है, भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में रहने वाले कई लोग काल के गाल में समा गए. हालांकि, आधिकारिक तौर शासन द्वारा अब 8 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है. इस बीच 18 लोगों को दिए गए मुआवजे की लिस्ट ने फिर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया. इंदौर में दूषित पानी से मौत के आंकड़ों पर अब कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है.

कलेक्टर ने 18 लोगों की मौत पर क्या कहा?
इस मामले में इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्वीकार किया कि जिला प्रशासन ने अब तक 18 लोगों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए की राहत राशि प्रदान की है जबकि तीन अन्य मृतकों के परिजनों को भी राहत राशि प्रदान करने की प्रक्रिया जारी है. उन्होंने कहा, '' मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जो भी नाम सामने आए, उन्हें भी इस घटना में शामिल मानकर फिलहाल आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है. वहीं, मौत के आंकड़े पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स के आधार पर बनाए जाते हैं.''
कोर्ट ने मौत के आंकड़ों पर सरकार को लगाई फटकार
मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने इस मामले को लेकर सरकार को फटकार लगाई है. जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने मौत के आंकड़ों को लेकर राज्य सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं. कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इंदौर मामले पर सरकार का रवैया असंवेदनशील नजर आता है. इस घटना से देश में स्वच्छता के लिए मशहूर शहर अब पूरी दुनिया में बदनाम हो रहा है.
सरकार ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स का दिया हवाला
कोर्ट में सरकार ने जवाब देते हुए कहा कि मौत के आंकड़ों को लेकर जो भिन्नता आ रही है उसका सबसे बड़ा कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स हैं. सरकार की ओर से कहा गया कि कुछ लोगों के परिवारों ने पोस्टमॉर्टम नहीं कराए, इनमें कुछ नेचुरल डेथ के भी मामले थे. ऐसे में दूषित पानी से मौत के सही आंकड़े बताने में प्रशासन को समय लग रहा है.
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सीएम ने मौत के आंकड़ों पर कही ये बात
बुधवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले पर कहा, '' एक भी जान जाना हमारे लिए बेहद दुखद है, इसलिए हम मौत के आंकड़ों पर इतनी गहराई से नहीं जाते. यह अलग बात है कि प्रशासन अपनी प्रक्रियाओं का पालन करता है और आमतौर पर केवल उन्हीं मामलों को सही आंकड़ा माना जाता है जिनमें पोस्टमॉर्टम किया गया हो.'' वहीं, मुआवजे और कांग्रेस के आरोपों पर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, '' पीड़ितों को माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा के अनुसार सहायता राशि दी जा रही है.'' वहीं कांग्रेस के आरोपों पर उन्होंने कहा, '' ऐसी आपदा जब आती है तब सबको साथ में ही चलना चाहिए. ऐसी आपदा में जनता परेशान होती है और तब कोई ये नहीं देखता कि कौन बीजेपी है और कौन कांग्रेस.''
कांग्रेस का आरोप, पानी में मल-मूत्र मिला
इधर बुधवार को कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भागीरथपुरा की पानी की सप्लाई में मलमूत्र मिला है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार के नेतृत्व में कांग्रेस ने खुद वॉटर ऑडिट करने का दावा किया. इस दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, "भागीरथपुरा और इससे लगे क्षेत्रों में जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, उसमें मानव मलमूत्र वाले बैक्टीरिया हैं. अगर ऐसा पानी शहर को सप्लाई होता रहा तो कई फिर कई लोगों की जान जा सकती है. मेडिकल कॉलेज से जो रिपोर्ट मिली है, उसमें स्पष्ट उल्लेख है कि मरीज शिगेला और ई कोलाई जैसे बैक्टीरिया से पीड़ित हैं, यही मानव मल मूत्र में पाए जाते हैं. इसके अलावा सैंपल में वाइब्रियो कोलेरा की भी पुष्टि हुई है, जो हैजा का कारण बनता है."
स्टेट सर्विलांस टीम ने जारी की रिपोर्ट
वहीं, इंदौर के प्रभावित क्षेत्र भागीरथपुरा में पहुंचे स्टेट सर्विलांस टीम ने भी अपनी रिपोर्ट पेश की है. सर्विलांस ऑफिसर डॉ. अश्विन भगवत ने मीडिया से कहा, '' भागीरथपुरा में कई तरह का पानी सप्लाई किया जा रहा था, जो अचानक व्यापक रूप से फैलने वाली बीमारी का कारण बन गया. पानी में मिले संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया को डिटेक्ट किया गया है, जिसकी रोकथाम के लिए तत्काल कदम उठाए गए हैं. क्षेत्र में पानी की सप्लाई रोककर साफ पानी की सप्लाई की जा रही है, इससे संक्रमण की दर कम हो गई है. जो बैक्टीरिया मिला था उसका संक्रमण काल 5 से 7 दिन का था. हमारे साथ आईसीएमआर कोलकाता और राष्ट्रीय रोग निगरानी संस्थान की टीमों ने भी सैंपलिंग की है. एहतियातन क्षेत्र के सभी बोरवेल का क्लोरिनेशन किया जाएगा.''

