सब स्टैंडर्ड निकली बच्चों की कफ सिरप, अस्पतालों से तुरंत हटाने के निर्देश
इंदौर में बच्चों की खांसी की दवा मिली कम असरकारक, अस्पतालों से हटाने के निर्देश, छिंदवाड़ा में पिछले साल हुई थी बच्चों की मौत.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : April 27, 2026 at 8:24 PM IST
इंदौर: मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पताल में फिर कम असरकारी और सब स्टैंडर्ड दवाएं बांटने का मामला सामने आया है. जिसके तहत एक बैच की कफ सिरप सभी अस्पतालों से हटाई जा रही है. जबकि साल 2025 में छिंदवाड़ा में कोल्डरिफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौत हो गई थी. प्रशासन ने तुरंत कप सिरप को बैन कराया था. वहीं एक बार फिर कफ सिरफ को लेकर खबर आ रही है.
बच्चों की खांसी की दवा पाई गई सब स्टैंडर्ड
छिंदवाड़ा में नकली कफ सिरप से कई बच्चों की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अभी भी दवा खरीदी मामले में लापरवाही बरत रहा है. इस बीच फिर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में छोटे बच्चों को खांसी की बीमारी के इलाज के लिए दी जाने वाली Zeniflu DS नामक खांसी की दवा सब स्टैंडर्ड या कम असरकारक पाई गई है. राज्य औषधि लैब में हाल ही में इस कफ सिरप के ड्रग कंटेंट की जांच की गई थी. जांच में पता चला कि कफ सिरप में जितनी मात्रा निर्धारित मात्रा में औषधि होना चहिए, उसकी मात्रा बहुत कम है.
कफ सिरप को हटाने के निर्देश
ऐसी स्थिति में यह कफ सिरप बच्चों को पिलाने के बावजूद भी उनकी खांसी का इलाज होना मुश्किल लगा. लिहाजा मध्य प्रदेश मेडिकल कॉरपोरेशन ने प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों के स्टोर रूम से इस दवाई को हटाने के निर्देश दिए हैं. इस मामले में इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ माधव हसानी ने बताया "बैच कमांक 41507 से सप्लाई की गई यह कफ सिरप जिले के सभी अस्पताल और डिस्पेंसरी से हटाने के निर्देश दिए गए हैं.
उन्होंने कहा इस मामले में दिशा निर्देश भोपाल से प्राप्त हुए हैं. वही इस कफ सिरप का उपयोग नहीं करने की भी जानकारी अस्पतालों मे दे दी गई है. उन्होंने बताया यह कफ सिरप पंचकूला की कंपनी जेनिक्योर लैब द्वारा तैयार की गई है. इसके एक बैच की दवाइयों में औषधि की मात्रा कम है."

छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल में हुई थी बच्चों की मौत
बताते चलें कि 2025 में छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल में जहरीली कफ सिरप पिलाई जाने से 20 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी. उस दौरान भी बच्चों ने सर्दी खांसी के लिए कोल्ड्रिफ नामक कफ सिरप पी थी. जिसमें स्वास्थ्य के लिहाज से अत्यंत घातक तत्व पाए गए थे, जिससे बच्चों की किडनी फेल होने से उनकी मौत हो गई थी. इस मामले में बाद में डॉक्टर प्रवीण सोनी की गिरफ्तारी हुई थी और दवा को पूरे देश में प्रतिबंधित कर दिया गया था.
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जो तमिलनाडु की कंपनी श्रीसन फार्मास्यूटिकल द्वारा तैयार की गई थी, इस घटना के बाद से ही मध्य प्रदेश में बच्चों को दी जाने वाली सभी तरह की खांसी की दवाइयों की अब लगातार जांच की जा रही है. जिसके परिणाम स्वरूप दवाइयों की क्वालिटी में अभी भी गड़बड़ी पाई जा रही है.

