इंदौर में दूषित पानी से मौतों की सॉलिड वजह अब आई सामने, सरकार ने किया कन्फर्म
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतें, बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने के असल कारण का खुलासा. क्या कहती है सर्वे रिपोर्ट

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 5, 2026 at 3:45 PM IST
इंदौर : भागीरथपुरा के पेयजल में जानलेवा संक्रमण क्यों और कैसे हुआ? इस पर अब राज्य ठोस निष्कर्ष पर पहुंची है. सर्वे के बाद पता चला है कि एक्यूट डायरियल डिजीज का आउटब्रेक भागीरथुरा में हुआ. इसी कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े. इनमें से कई लोग मौत का शिकार हुए. इंदौर के भागीरथपुरा में फैले संक्रमण की जांच ओर सर्वे के 15 दिन बाद राज्य सरकार ने इसी नतीजे पर पहुंची है.
स्टेट सर्विलस टीम ने किया सर्वे
इंदौर के प्रभावित भागीरथपुरा में बीते 02 दिन से स्टेट सर्विलस टीम के सर्वे कर रही थी. राज्य के सर्विलांस ऑफिसर डॉ. अश्विन भगवत ने दावा किया ओपीडी में मरीज की संख्या और डिस्चार्ज होने वाले मरीजों की बढ़ती संख्या के आधार पर स्थिति को नियंत्रण में माना जा सकता है. भागीरथपुरा में तरह-तरह के पानी की सप्लाई होने के कारण एक्यूट डायल डिजीज का प्रकोप पूरे इलाके में फैला, जिसके कारण यह स्थिति बनी.
अब घटने लगी मरीजों की संख्या
सर्विलांस ऑफिसर डॉ. अश्विन भगवत ने बताया जिस तरह दूषित पानी की सप्लाई रोककर साफ और उपचारित पानी का वितरण किया गया, उससे मरीजों की संख्या में कमी आई. इसके अलावा रैपिड डायग्नोस्टिक किट में एंटीबायोटिक दवाई और पानी के शोधन के लिए की गई व्यवस्था भी कारगर सबित हुई है. संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया को भी डिटेक्ट किया गया है, जिसका संक्रमण काल 5 से 7 दिन का था. इसीलिए अब संक्रमण की दर घट रही है.
भागीरथपुरा में कई टीमों ने की सैंपलिंग
उन्होंने बताया राज्य की सर्विलेंस सर्विलेंस टीम के अलावा आईसीएमआर कोलकाता और एनसीडीसी (राष्ट्रीय रोग निगरानी संस्थान) के टीम ने भी सैंपलिंग की है. भागीरथपुरा क्षेत्र में कोलकत्ता, दिल्ली और भोपाल से आये विशेषज्ञ डॉक्टर्स की टीम कार्य कर रही है. पानी की टेस्टिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. क्षेत्र में स्थित सभी बोरिंगों का क्लोरिनेशन किया जायेगा.
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भागीरथपुरा में क्लोरिनेशन का काम तेज
बीमारी फिर से फैल सके, इसके लिए घरों के बेसमेंट में बने होज को क्लीन कर क्लोरिनेशन किया गया है. क्षेत्र के 5000 लोगों के सर्वे के लिए के लिये भागीरथपुरा के पूरे क्षेत्र को 30 से अधिक बीटों में बांटा गया. हर बीट में कर्मचारियों और नागरिकों के साथ मिलकर क्लोरिनेशन का कार्य किया जा रहा है, जिससे कि मौके पर फिर पहले जैसी स्थिति ना बने.

