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जहरीले पानी से मौत का मामला इंदौर जिला अदालत पहुंचा, दलील कि ये गैर इरादतन हत्या

इंदौर के भागीरथपुरा में पेयजल से हुई मौतों का मामला हाई कोर्ट के अलावा अब जिला अदालत में. सुनवाई 24 जनवरी को.

Indore drinking water deaths
पेयजल से मौतों का मामला अब जिला अदालत में (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 9, 2026 at 4:15 PM IST

2 Min Read
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इंदौर: शहर के भागीरथपुरा में जहरीले पानी से मौतों के लिए नगर निगम अधिकारियों व कलेक्टर को जिम्मेदार बताते हुए गैर इरादतन हत्या का प्रकरण दर्ज करने की मांग. इस मामले में इंदौर की जिला अदालत में परिवाद दायर किया है. जिला अदालत ने सुनवाई करते हुए संबंधित थाना प्रभारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 24 जनवरी को होगी.

नर्मदा पाइपलाइन बदलने में लापरवाही

भागीरथपुरा में रहने वाले राम बाबू सिंह द्वारा अपने एडवोकेट दिलीप नागर के माध्यम से इंदौर के जिला कोर्ट में परिवाद लगाया गया. परिवाद में कहा गया "बीते 2 साल से लोग दूषित पानी पी रहे हैं. साल 2024 में दूषित पानी पीने के कारण मौत भी हुई थी. इसके बाद नर्मदा पाइपलाइन बदलने की नोटशीट जारी की गई और टेंडर भी हो गए लेकिन तात्कालिक निगम आयुक्त और वर्तमान इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने टेंडर को दबा दिया. इसके बाद निगमायुक्त दिलीप यादव ने भी यह टेंडर पास नहीं किया."

याचिकाकर्ता के एडवोकेट दिलीप नागर (ETV BHARAT)

टेंडर पहले पास हो जाता तो न होती इतनी मौतें

परिवाद में कहा गया "लगातार लोगों के बीमार और मौत होने के बाद 30 दिसंबर को यह टेंडर पास किया गया. टेंडर समय पर पास हो जाता तो इतने लोगों की जान नहीं जाती. तात्कालिक दोनों निगमायुक्त, अपर आयुक्त रोहित और जल कार्य अधीक्षक यंत्री जिन्हें सस्पेंड कर दिया गया, संजीव श्रीवास्तव के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए."

याचिकाकर्ता के एडवोकेट दिलीप नागर बताया "उन्होंने बाणगंगा थाने पर भी आवेदन संबंधित लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने को लेकर दिया था, लेकिन पुलिस द्वारा आवेदन नहीं लिया गया."

हाई कोर्ट भी जता चुका है नाराजगी

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौत के मामलों को लेकर 6 जनवरी को सुनवाई हुई थी. हाईकोर्ट ने शासन की स्टेटस रिपोर्ट में 4 लोगों की मौत पर नाराजगी जाहिर की थी. इसके अलावा क्षेत्र में साफ पानी और अस्पताल में भर्ती मरीजों के उपचार की पुख्ता व्यवस्था करने के एक बार फिर आदेश दिए.

इसके साथ ही इस मामले में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को 15 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई में हाई कोर्ट में हाजिर होने के निर्देश दिए हैं.