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बिहार में लोटस टेम्पल की तर्ज पर बन रहा देश का दूसरा बहाई मंदिर, सभी धर्मों के लिए खुला रहेगा शांति का केंद्र

बिहार में देश का दूसरा बहाई मंदिर 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है. ये साल के अंतिम में लोगों के लिए खुल जाएगा. पढ़ें खबर-

NALANDA BAHAI TEMPLE WORK
बहाई मंदिर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : April 20, 2026 at 12:14 PM IST

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नालंदा: बिहार के नालंदा जिले के बिहार शरीफ प्रखंड से करीब 10 किमी दूर हरगांवा गांव में देश का दूसरा बहाई उपासना गृह (बाहाई मंदिर) तेजी से निर्माणाधीन है. दिल्ली के प्रसिद्ध लोटस टेंपल की तर्ज पर बन रहे इस मंदिर का काम 2023 में शुरू हुआ था और अब लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है. यह मंदिर 2026 के अंत तक पूरी तरह तैयार होकर श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएगा.

8 एकड़ में फैला इको-फ्रेंडली डिजाइन: यह बहाई मंदिर करीब 8 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. दिल्ली की स्पेस मैटर्स संस्था द्वारा तैयार किए गए डिजाइन में मंदिर पूरी तरह प्रकृति-अनुकूल (इको-फ्रेंडली) है. मुख्य गुंबद 60 फीट ऊंचा होगा, जो बाहर से मधुमक्खी के छत्ते (Beehive) जैसा दिखाई देगा। मेहराबों और छत की बनावट पत्तियों व पंखों जैसी होगी, जिसमें सुराखों से प्राकृतिक रोशनी अंदर आएगी.

बहाई मंदिर (ETV Bharat)

मधुबनी पेंटिंग से सजेगी गुंबद की नक्काशी: मंदिर की सबसे खास बात यह है कि मुख्य गुंबद पर बिहार की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग की खूबसूरत नक्काशी उकेरी जाएगी. रात में अंदर की रंग-बिरंगी रोशनी बाहर बिखरेगी, जो दिन और रात दोनों समय अलग-अलग नजारा पेश करेगी. बहाई माधव प्रसाद ने बताया कि मंदिर का डिजाइन शांति, एकता और प्रेम का प्रतीक होगा.

धर्मनिरपेक्ष उपासना गृह, सभी के लिए खुला: इस उपासना गृह की सबसे बड़ी खूबी इसका पूर्ण रूप से धर्मनिरपेक्ष होना है. यहां किसी भी धर्म, जाति या संप्रदाय के लोग आकर शांति से अपनी इबादत कर सकेंगे. बहाई धर्म की मान्यता के अनुसार सभी धर्मों का मूल उद्देश्य प्रेम, शांति और मानव एकता है. 21 फरवरी 2021 को इस मंदिर की नींव रखी गई थी.

NALANDA BAHAI TEMPLE WORK
सभी धर्मों के लिए खुला रहेगा शांति का केंद्र (ETV Bharat)

मल्टीपर्पस हॉल और आधुनिक सुविधाएं: मंदिर परिसर में अत्याधुनिक मल्टीपर्पस हॉल, लाइब्रेरी, गेस्ट हाउस और रेसिडेंशियल बिल्डिंग भी बनाई जा रही हैं. ये भवन पूरी तरह वातानुकूलित और इको-फ्रेंडली होंगे, जहां भीषण गर्मी में भी एसी या कूलर की जरूरत नहीं पड़ेगी. स्थानीय पूर्व मुखिया आमोद कुमार ने बताया कि यह परिसर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा.

"21 फरवरी 2021 को इस भव्य मंदिर की नींव रखी गई थी. इस उपासना गृह की सबसे बड़ी खूबी इसका धर्मनिरपेक्ष होना है. यहां किसी भी धर्म, जाति या संप्रदाय के लोग आकर अपने-अपने इष्टदेव की साधना और इबादत शांति से कर सकेंगे. बहाई धर्म की मान्यता के अनुसार, सभी धर्मों का मूल उद्देश्य प्रेम, शांति और एकता है."-आमोद कुमार, पूर्व मुखिया

टूरिस्ट हब बनेगा हरगांवा: इस भव्य मंदिर के बनने से हरगांवा गांव राजगीर और पावापुरी की तरह एक बड़ा टूरिस्ट हब बन जाएगा. देश-विदेश से पर्यटक यहां खिंचे चले आएंगे. बहाई समुदाय का लक्ष्य सिर्फ मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं है. अगले चरण में यहां अस्पताल, स्कूल, वृद्धाश्रम और अनाथालय जैसी सामाजिक संस्थाएं भी खोली जाएंगी.

NALANDA BAHAI TEMPLE WORK
बहाई मंदिर 80 प्रतिशत पूरा (ETV Bharat)

2026 तक खुलेगा मंदिर, सामाजिक कल्याण का केंद्र बनेगा: नालंदा में 2012 में इजराइल के हाइफा स्थित बहाई विश्व न्याय मंदिर ने इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी. अब 2026 तक यह उपासना गृह आम लोगों और श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएगा. यहां सैकड़ों बहाई समुदाय के अनुयायी भी रहते हैं. मंदिर न केवल आध्यात्मिक केंद्र बनेगा बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक कल्याण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

बहाई धर्म क्या है?: बहाई धर्म 19वीं शताब्दी में ईरान में स्थापित एक स्वतंत्र विश्व धर्म है, जिसके संस्थापक बहाउल्लाह हैं. यह धर्म सभी धर्मों की मूल एकता, मानव जाति की एकता और ईश्वर की एकता पर जोर देता है. बहाई मान्यता के अनुसार, ईश्वर ने समय-समय पर विभिन्न अवतारों जैसे अब्राहम, कृष्ण, बुद्ध, ईसा और मुहम्मद के माध्यम से मानवता को मार्गदर्शन दिया है. इस धर्म का मुख्य संदेश है कि पूरी पृथ्वी एक देश है और समस्त मानव जाति इसकी नागरिक है. बहाई शिक्षाएं नस्लवाद, लिंग भेद और राष्ट्रीयता जैसी विभाजनकारी भावनाओं का विरोध करती हैं तथा विज्ञान और धर्म के सामंजस्य, महिलाओं की समानता, सार्वभौमिक शांति और सामाजिक न्याय पर बल देती है.

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