जींद से सोनीपत तक दौड़ी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, "नमो ग्रीन रेल" का रनिंग ट्रायल
जींद-सोनीपत रूट पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल हुआ है.

Published : February 25, 2026 at 1:04 PM IST
|Updated : February 25, 2026 at 4:47 PM IST
जींद: हरियाणा के जींद में बुधवार का दिन भारतीय रेलवे के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया, जब देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का रनिंग ट्रायल सफलतापूर्वक शुरू हुआ. यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारतीय रेलवे के लिए पर्यावरण-अनुकूल परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. ट्रेन को सुबह करीब सात बजे जींद यार्ड से बाहर निकाला गया और प्रारंभिक चरण में डीजल इंजन की सहायता से हांसी रोड पुल तक ले जाया गया. इसके बाद सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर इसे सोनीपत की ओर रवाना किया गया.
ट्रायल प्रक्रिया में तकनीकी पहलुओं पर पैनी नजर: ट्रायल के दौरान कई महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं का बारीकी से निरीक्षण किया जा रहा है. इंजन की गति, ब्रेकिंग सिस्टम, ईंधन खपत, सुरक्षा मानक, ट्रैक की स्थिति और सिग्नलिंग सिस्टम की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हाइड्रोजन गैस की सीमित मात्रा ही भरी गई है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर डीजल इंजन तुरंत जोड़ा जा सके. रेलवे की तकनीकी टीम सुबह से ही पूरी सतर्कता के साथ परीक्षण प्रक्रिया में जुटी रही.
जींद से भम्भेवा तक तय हुआ पहला चरण: ट्रेन की शुरुआती यात्रा जींद से पिंडारा और फिर भम्भेवा स्टेशन तक निर्धारित की गई. इस दौरान डीजल इंजन को अलग कर ट्रेन को पूरी तरह हाइड्रोजन गैस पर चलाने का परीक्षण किया जाएगा. यदि यह ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है तो जल्द ही इसे जींद-सोनीपत रूट पर नियमित यात्री सेवा में शामिल किया जा सकता है. वर्तमान में इस रूट पर तीन ट्रेनें संचालित हो रही हैं.
आईसीएफ चेन्नई में हुआ निर्माण: यह अत्याधुनिक ट्रेन इंटीग्रल कोच फैक्टरी , चेन्नई में विकसित की गई है. इसे दुनिया की सबसे लंबी और शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक माना जा रहा है. ट्रेन में 1200 हॉर्सपावर का इंजन लगाया गया है. इसकी अधिकतम डिजाइन स्पीड 150 किमी प्रति घंटा है, जबकि सामान्य संचालन में यह 110 से 140 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी.
सफर होगा तेज और आरामदायक: इस ट्रेन के नियमित संचालन के बाद जींद से सोनीपत का लगभग 90 किलोमीटर का सफर, जो अभी करीब दो घंटे में पूरा होता है, घटकर एक घंटे से भी कम समय में तय किया जा सकेगा. ट्रेन पूरी तरह शांत चलेगी, जिससे यात्रियों को अधिक आरामदायक अनुभव मिलेगा. इसमें आठ से दस डिब्बे होंगे और यात्रियों की क्षमता डीजल ट्रेनों के बराबर होगी.
हाइड्रोजन तकनीक कैसे करेगी काम: हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित यह ट्रेन डीजल की जगह हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के नियंत्रित संयोजन से बिजली पैदा करेगी. इस प्रक्रिया में उत्पन्न ऊर्जा लिथियम आयन बैटरी को चार्ज करेगी, जिससे ट्रेन संचालित होगी. इस दौरान धुएं की जगह केवल भाप और पानी निकलेगा. ट्रेन में बैटरी और सुपर कैपेसिटर जैसे ऊर्जा भंडारण सिस्टम भी लगाए गए हैं, जिससे यह हाइब्रिड मॉडल के रूप में कार्य करेगी.
जीरो एमिशन की दिशा में बड़ा कदम: यह परियोजना ग्रीन हाइड्रोजन और शून्य उत्सर्जन रेल यात्रा की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है. जींद जंक्शन पर ही करीब 120 करोड़ रुपये की लागत से एक समर्पित हाइड्रोजन उत्पादन और रिफ्यूलिंग प्लांट स्थापित किया गया है. प्लांट को हर घंटे लगभग 40 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होगी, जिसके लिए स्टेशन की छतों से वर्षा जल संचयन की व्यवस्था भी की गई है.
Jind, Haryana: India’s first hydrogen-powered train successfully completed its trial run. The train departed Jind railway station at 8.30 am with eight coaches and ran at a speed of 70 kmph towards Lalit Kheda before returning. Railway staff and RPF personnel were on board during… pic.twitter.com/oKyJH6ZHrR
— IANS (@ians_india) February 25, 2026
तकनीकी चुनौतियों से पार पाने की तैयारी: एक जनवरी को यह ट्रेन दिल्ली से जींद जंक्शन पहुंची थी, जबकि पांच जनवरी को लखनऊ से स्पेशल कोच के जरिए वायरिंग का सामान लाया गया था. बढ़ती ठंड के कारण हाइड्रोजन गैस में नमी आ जाने से भराव प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतें आई थीं, जिन्हें अब काफी हद तक दूर कर लिया गया है. रेलवे इंजीनियरों की टीम लगातार इन चुनौतियों पर काम कर रही थी.
भारत बनेगा पांचवां देश: यदि यह परियोजना सफल रहती है तो जर्मनी, स्वीडन, जापान और चीन जैसे देशों के बाद भारत हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला पांचवां देश बन जाएगा. ये उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूती देगी. साथ ही, भविष्य में गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों के संचालन का रास्ता साफ होगा.
सुरक्षा सर्वोपरि, जनता से अपील: रेलवे प्रशासन ने ट्रायल के दौरान आम लोगों से ट्रैक के पास न जाने और भीड़ न लगाने की अपील की है. सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है. यदि मौजूदा रनिंग ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है, तो जल्द ही इस ट्रेन के नियमित संचालन की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है. यह कदम भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नए, हरित और आधुनिक अध्याय की शुरुआत साबित होगा.
ये भी पढ़ें:फरीदाबाद में क्राइम ब्रांच की मेगा रेड, धड़धड़ाते घुस गई 200 अफसरों की टीम, स्लम कॉलोनियों में मचा हड़कंप

