ईरान संकट के बीच खाड़ी देशों में भारतीयों की अटकी सांसें... घरवाले कर रहे सलामती की दुआ
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को लेकर देशभर में दुआएं की जा रही है. परिजनों को लेकर लोग चिंतित हैं.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : March 2, 2026 at 4:04 PM IST
|Updated : March 3, 2026 at 7:44 AM IST
लखनऊ/गोरखपुर: ईरान-अमेरिका तनाव के बीच खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों को लेकर देशभर में सलामती की दुआ मांगी जा रही है. हालात ये हैं कि कई देशों में धमाके हो रहे हैं. वहां इंटरनेट सेवा बाधित है. बड़ी मुश्किल से परिजनों की बात ईरान सहित खाड़ी देशों में रह रहे परिजनों से हो पा रही है. वहां पर डर का माहौल है. इसके साथ ही ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनई की अमेरिका-इजरायल हमले में हुई मौत को लेकर दुनिया भर में तनाव है. ईरान खुद ज़वाबी कार्रवाई की बात कह रहा है.
गौर करें तो मध्य-पूर्व में बढ़ते ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत सरकार ने 23 फरवरी को एहतियाती कदम उठाते हुए ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की थी.

विदेश मंत्रालय ने परामर्श में कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए छात्र, तीर्थयात्री, व्यवसायी और पर्यटक उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों व अन्य परिवहन साधनों का उपयोग कर भारत लौटने पर विचार करें.
विदेश मंत्रालय की ओर से जारी इस एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया था कि क्षेत्रीय हालात को देखते हुए सतर्कता बरतना जरूरी है. हालांकि संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ओमान, क़तर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों के लिए भारत सरकार की ओर से इस तरह की कोई विशेष एडवाइजरी जारी नहीं की गई थी. इन देशों में युद्ध की सीधी आशंका भी व्यक्त नहीं की गई थी.
इस बीच खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं उठ रही हैं. दुबई में रह रहे मोहम्मद हसन ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि वहां हालात पूरी तरह सामान्य हैं. उन्होंने कहा, “यहां लोग सुरक्षित हैं. जहां-जहां अमेरिकी एयरबेस या उनके कार्यालय हैं, वहीं सीमित घटनाएं सामने आई हैं. आम जनजीवन पर इसका कोई खास असर नहीं है.”
दूसरी ओर, ईरान में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों को लेकर परिजनों की चिंता बनी हुई है. मौलाना जहीरुल हसन ने बताया कि उनके जानने वाले सैकड़ों छात्र ईरान में तालीम हासिल कर रहे हैं. “तनाव बढ़ने के बाद से कई छात्रों से सीधी बातचीत नहीं हो पा रही है, लेकिन अब तक मिली जानकारी के अनुसार वे सुरक्षित स्थानों पर हैं और किसी प्रकार की तात्कालिक समस्या की सूचना नहीं है”.
मौलाना जहीरुल हसन ने यह भी बताया कि बनारस और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में छात्र ईरान में शिक्षा लेने गए हैं. फिलहाल वे सुरक्षित हैं, हालांकि भारत लौटने को लेकर उनका क्या फैसला होगा, यह उनसे सीधी बातचीत के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा.

लखनऊ से बड़ी संख्या में लोग ईरान में
ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए सैयद हैदर अब्बास रिजवी ने बताया कि लखनऊ सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री ईरान गए थे. इनमें से कई 15-20 दिन पहले ही भारत लौट चुके हैं. हालांकि, वहां अब भी बड़ी संख्या में छात्र और वर्षों से रह रहे परिवार मौजूद हैं.

उन्होंने बताया कि कुछ भारतीय नागरिक स्वास्थ्य कारणों से फिलहाल यात्रा नहीं कर सकते. एक परिवार के सदस्य का ईरान में ओपन हार्ट सर्जरी हुआ है और डॉक्टरों ने उन्हें यात्रा से मना किया है. ऐसे में वे भारत नहीं आ सकते.
मौलाना मिसम भी ईरान में ही हैं. उनके परिवार के लोगों से बातचीत में उन्होंने हालात को सामान्य बताया और कहा कि "फिलहाल आने का कोई इरादा नहीं है. उनका कहना है कि हालात सामान्य होने पर निर्णय लिया जाएगा.”

तेहरान में रह रहे मौलाना अकील के बारे में भी बताया गया कि वे सुरक्षित हैं और हालात सामान्य हैं. कई छात्रों की राय भी यही है कि वे फिलहाल ईरान में ही रहना चाहते हैं.
कई धार्मिक हस्तियों के परिवार भी ईरान में
लखनऊ के चौपटिया निवासी मौलाना मकबूल अपनी पत्नी के साथ वर्षों से ईरान में रह रहे हैं. संपर्क करने पर उन्होंने भी हालात को सामान्य बताया और वापसी को लेकर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी.
इसी तरह मशहूर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे ज़व्वाद के बेटे और बहू भी इस समय ईरान में हैं. हालांकि उन्होंने इस विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. उल्लेखनीय है कि पिछली बार जब तनाव बढ़ा था, तब भी वे ईरान में ही थे.
इजराइल से वापसी टली, फट रहीं मिसाइलें: गोरखपुर के संदीप कुमार मई 2024 में इजराइल के एस्टोद शहर कमाने के लिए गए थे. वह वतन वापसी से कुछ समय पहले ही इस समस्या से फंस गए हैं. उनकी फ्लाइट 2 मार्च को बुक थी. अब उनकी यात्रा रद्द हो चुकी है. वहीं, जिले के खजनी ब्लाक के जनार्दन ने बताया कि लगातार मिसाइल की फटने की आवाज़ आ रही है जिससे यहां की हालत खराब हो रहे हैं वह येरूशलम से कुछ दूरी पर कप्पर कासिम में काम कर रहे हैं. उन्होंने घर वालों को बताया कि शनिवार रात से हालत ज्यादा खराब है.
मिसाइलें गिरतीं देखीं: गोरखपुर के रसूलपुर निवासी अब्दुल रहमान जो दुबई में रहते हैं उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट के पास इस क्षेत्र में उन्होंने अब तक छह मिसाइलें आते गिरते देखीं हैं. इससे होने वाले धमाकों की आवाज उनके कमरे तक पहुंच रही है. कभी-कभी जो लोग कैंपों में हैं डर कर बाहर आ जा रहे हैं जो नजर बंद पड़ा है वह बेहद ही हैरान और परेशान करने वाला बना हुआ है. उन्होंने बताया कि उनके साथ बिहार के सिवान जिले के 24 वर्षीय जितेंद्र प्रसाद भी आए हुए हैं जो 3 साल बाद होली पर अपने गांव जाने वाले थे लेकिन एयरपोर्ट पहुंचने पर पता चला कि उड़ाने रद्द कर दी गई हैं. गोरखपुर के पड़ोसी जिले सिद्धार्थ नगर के भी धार्मिक शिक्षा लेने गए तमाम छात्र भी वहां फंसे हैं.
मिलिट्री बेस कैंप को निशाना बना रहा ईरान: कुशीनगर के नंदलाल विश्वकर्मा भी इस समय येरूशलम के वेस्ट बैंक क्षेत्र में है. यहां के रिहायशी इलाकों में स्थिति काफी खराब बताई जा रही है. जैसे ही सायरन बज रहा है लोग आसपास के बंकरों में दौड़ पड़ते हैं. आने जाने की जो साधन है वह भी बंद है. तमाम लोग परिवारों के साथ घरों में कैद हैं. अभी दो दिन पहले दुबई के लिए रवाना होने वाले गोरखपुर के वसीम कहते हैं कि वह कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं. ईरान मिसाइल मिलिट्री बेस कैंप को निशाना बना रही है. फिलहाल हम सभी इस युद्ध से परेशान हैं. मौका मिलते ही वतन वापसी की कोशिश करेंगे.

ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
भारत सरकार ने ईरान में रह रहे नागरिकों से अपील की है कि वे अपने पासपोर्ट और अन्य यात्रा दस्तावेज हमेशा तैयार रखें. किसी भी आपात स्थिति में तेहरान स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया जा सकता है.
आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर:
+989128109115
+989128109109
+989128109102
+989932179359
ईमेल: cons.tehran@mea.gov.in
इसके अलावा जिन भारतीय नागरिकों ने अब तक दूतावास की वेबसाइट पर पंजीकरण नहीं कराया है, उनसे https://www.meaers.com/request/home पर जाकर रजिस्ट्रेशन करने को कहा गया है. यदि इंटरनेट बाधित हो, तो भारत में रह रहे परिजन भी यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.
रामपुर के खेमपुर इमरती के 50 लोग डर के साए में दुबई में
इजरायल और यूनाइटेड स्टेट्स के साथ बढ़ते टकराव के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में हमले तेज कर दिए हैं. मध्य-पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. इसको लेकर खाड़ी देशों खासतौर पर दुबई में हालात को लेकर दहशत का माहौल बताया जा रहा है.

इस बीच दुबई और उसके आसपास के इलाकों में मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंकाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. वहां काम करने वाले भारतीयों में भी डर का माहौल है. जनपद रामपुर के खेमपुर इमरती गांव के लगभग 50 युवक रोज़ी-रोटी कमाने के लिए दुबई में कार्यरत हैं. मौजूदा हालात ने उनके परिवारों की चिंता भी बढ़ा दी है.
रामपुर के खेमपुर इमरती गांव के दो सगे भाई, मोहम्मद इमरान और साजिद ने अपने परिवार से फोन पर बातचीत में वहां की ताज़ा स्थिति साझा की. उन्होंने बताया कि माहौल बेहद तनावपूर्ण है. रात के समय धमाकों और सायरन की आवाज़ें सुनाई देती हैं, जिससे नींद तक नहीं आ पाती. आसमान में उड़ते ड्रोन और सुरक्षा अलर्ट के कारण लोग लगातार सतर्क बने हुए हैं.
इमरान और साजिद की तरह कई अन्य परिवारों के बेटे भी इस समय खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं. परिवारजन यहां भारत में टीवी और मोबाइल के जरिए खबरें देख रहे हैं और अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं. गांव में भी बेचैनी साफ देखी जा सकती है.
हालांकि स्थानीय प्रशासन और भारतीय दूतावास की ओर से अब तक किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन हालात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. सभी की निगाहें अब आने वाले दिनों की स्थिति पर टिकी हैं, और सबसे बड़ी दुआ यही है कि हालात जल्द सामान्य हों और सभी सुरक्षित अपने घर लौट सकें.
मिडिल ईस्ट में तनाव से अलीगढ़ के कई लोग खाड़ी देशों में फंसे
हाथरस-अलीगढ़ के तीन परिवार ओमान और दुबई में फंसे हुए हैं. इसमें दो परिवार ओमान तो एक मल्टीनेशनल कंपनी के जीएम दुबई में फंसे हुए हैं. इनमें एक हाथरस के राष्ट्रीय लोकदल के नेता भी शामिल हैं.
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ओमान में रह रहे भारतीयों की चिंता गहरा गई है. अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रोड निवासी असद इन दिनों अपने परिवार के साथ ओमान में है. वह कई वर्षों से ओमान में तेल के कारोबार से जुड़े हैं. उनकी पत्नी नुजहत ने बताया कि वहां हालात सामान्य नहीं है और भारतीय समुदाय में भय का माहौल बना हुआ है. तेल के टैंकर पर हुए धमाके से परिवार सहम गया.
उन्होंने बताया कि ओमान में स्काईलाइट नामक तेल टैंकर पर झंडा लगा था. जहाज को ओमान के मुसैडम प्रायदीप से करीब पांच समुद्री मील दूर निशाना बनाया गया. ओमान में रह रहे भारतीय परिवारों में इस घटना के बाद चिंता और बढ़ गई है.
अलीगढ़ में शांति नर्सिंग होम के मालिक डॉक्टर वीरेंद्र चौधरी व उनकी पत्नी डॉक्टर सुरेखा चौधरी तीन माह पहले अमेरिका के पेंसिलवेनिया राज्य के पीटर्सवर्ग में वैवाहिक आयोजन में गए थे. उनकी 2 मार्च को वापसी के लिए लंदन से फ्लाइट थी. अब ईरान पर हमले के चलते लौट नहीं पा रहे हैं. उनका कहना है कि वह सुरक्षित है, मगर हवाई यात्रा का सफर ठीक नहीं है.
ईरान में मौलवी की पढ़ाई कर रहे बरेली के छात्र फंसे, परिजनों की अटकी सांसें
ईरान में हालिया हमलों के बाद बरेली कस्बे के सैंथल के तीन छात्रों को लेकर उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है. ये तीनों छात्र ईरान के कोम शहर में रहकर मौलवी की पढ़ाई कर रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच संपर्क बाधित होने से परिजन बेचैन हैं और लगातार दुआ कर रहे हैं कि उनके बच्चे सुरक्षित रहें.

मोहल्ला बुखारपुरा के महफूज अली और सलीम हसन, और मोहल्ला नीमवालान के गाजी कुम में दीनी तालीम हासिल कर रहे हैं. हमलों की खबर मिलते ही परिवारों ने उनसे संपर्क करने की कोशिश शुरू कर दी, लेकिन इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होने से बात नहीं हो सकी.

महफूज अली के भाई मजाहिर अली ने बताया कि रविवार सुबह फोन पर बात होने के बाद कुछ राहत मिली. महफूज ने परिवार को बताया कि हमला उनके ठिकाने से काफी दूरी पर हुआ है और वे अपनी पत्नी व दो बेटियों के साथ सुरक्षित हैं.
सलीम हसन के भाई मुबीन हसन के अनुसार शनिवार शाम को आखिरी बार बातचीत हुई थी. उसके बाद इंटरनेट सेवा ठप होने से संपर्क नहीं हो सका. वहीं गाजी के पिता अशरफ अली ने बताया कि अभी तक बेटे से बात नहीं हो पाई है, जिससे परिवार की चिंता कम नहीं हो रही.
परिजनों का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए अनिश्चितता बनी हुई है. उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि ईरान में रह रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्वदेश वापस लाने की व्यवस्था की जाए.
कस्बे के अन्य सात छात्र इराक में पढ़ाई कर रहे हैं. उनसे नियमित संपर्क बना हुआ है और वे सुरक्षित बताए जा रहे हैं. बावजूद इसके, ईरान की स्थिति को लेकर सैंथल के इन परिवारों की सांसें अब भी अटकी हुई हैं.
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