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क्या आप जानते हैं घने कोहरे में कैसे चलती है ट्रेन, FSD कैसे करता है काम

बिहार में घने कोहरे का असर ट्रेनों की रफ्तार पर पड़ रहा है. जानें लो विजिबिलिटी में कैसे होता रेल का परिचालन.

Train operations in fog
घने कोहरे में ट्रेनों का परिचालन बड़ी चुनौती (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : December 19, 2025 at 2:41 PM IST

4 Min Read
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रिपोर्ट: पंकज श्रीवास्तव

छपरा: भारतीय रेल का सबसे मुश्किल सफर कुहासे के मौसम का होता है. चारों तरफ धुंध और विजिबिलिटी न के बराबर होती है. यहां तक की एक मीटर की दूरी की चीज भी नजर आना मुश्किल होता है, तब असल जिम्मेदारी लोको पायलट की शुरू हो जाती है.

घने कोहरे में कैसे चलायी जाती है ट्रेन: कुहासे की मार ऐसी होती है कि ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन रेलवे की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है, लेकिन सर्दियों के सितम में कुहासे की मार ट्रेनों के रफ्तार पर ब्रेक लगा देती है. ऐसे में ईटीवी भारत संवाददाता ने जानने की कोशिश की, आखिर घने कोहरे के बीच ट्रेन को लोको पायलट कैसे गति देते हैं. लोको पायलट दिलीप सिंह बताते हैं कि फोग सेफ डिवाइस (FSD) इस्तेमाल किया जाता है.

घने कोहरे में कैसे चलायी जाती है ट्रेन (ETV Bharat)

"फोग डिवाइस आगे आने वाली सिग्नल के बारे में सूचना पहले ही दे देती है. सिर्फ सिग्नल का नाम डिवाइस बताता है, लेकिन उसकी वर्तमान स्थिति की जानकारी नहीं होती है. सिग्नल रेड है या ग्रीन कोई जानकारी नहीं होती है. कभी अगर डिवाइस खराब हो जाए और घना कोहरा हो तो हम हमने विवेक के अनुसार काम करते हैं."- दिलीप सिंह, लोको पायलट, छपरा

ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन के लिए बाकायदा ट्रेनों के लोको पायलट को महाप्रबंधक स्तर से विशेष हिदायत दी जाती है कि किसी भी कीमत पर ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित किया जाए. अगर बहुत ज्यादा कोहरा है तो यह निर्देश दिया जाता है कि लोको पायलट और सहायक लोको पायलट अपने स्व विवेक से ट्रेनों का परिचालन सुनिश्चित करें.

ट्रैक पर पैदल चलते हैं लोको पायलट: जब फोग डिवाइस काम नहीं करता है, तब जरूर पड़ने पर कुहासे में असिस्टेंट लोको पायलट ट्रैक पर आगे चलता है और लोको पायलट धीमे-धीमे ट्रेनों को आगे बढ़ता है. वहीं रेलवे द्वारा पटाखे भी लगाए जाते हैं जिससे यह पता चलता है कि आगे सिग्नल हरा है. ट्रेन को सुरक्षित आगे बढ़ाया जाता है. रेल मंत्रालय द्वारा यात्रियों की सुरक्षा में कोई भी कोताही नहीं बरती जाती है.

Train operations in fog
घने कोहरे में डिवाइस की मदद से ट्रेन का परिचालन (ETV Bharat)

लोको पायलट विनोद कुमार राय बताते हैं कि कुहासे में गाड़ियों के सुरक्षित संचालन के लिए सावधानी बरती जाती है. स्पीड कुहासे पर निर्भर करता है. बहुत कुहासा होने पर हम अपने विवेक के अनुसार काम करते हैं.

"विजिबिलिटी नहीं होने पर हम ट्रेन की स्पीड कम कर देते हैं. एफएसडी से सिग्नल की दूरी का पता चलता है."- विनोद कुमार राय, लोको पायलट

सुरक्षित यात्रा पहली जिम्मेदारी: बता दें कि भारत को अगर पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण जोड़ने वाला कोई नेटवर्क है तो वह भारतीय रेल है और भारतीय रेल विश्व का चौथा सबसे बड़ा उपक्रम है. वर्तमान समय में भारतीय रेल में लगभग 12 से 13 लाख कर्मचारी काम करते हैं और और एक बड़ी जनसंख्या भारतीय रेल का उपयोग करती है. रेल मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य संरक्षा ,सुरक्षा और समय पालन है. इसी मूल मंत्र पर रेल व्यवस्था काम करती है.

Train operations in fog
लोको पायलट का अहम रोल (ETV Bharat)

भारत में इतने बड़े रेल नेटवर्क को चलाने के लिए रेलवे के 19 महाप्रबंधक कार्यालय (जोन) और 73 मंडल रेल प्रबन्धक कार्यालय है और इन्हीं के अंतर्गत भारतीय रेलवे का परिचालन होता है. चार-पांच मंडल रेल प्रबंधक के ऊपर एक महाप्रबंधक होता है.

भारत में ट्रेनों के नेटवर्क को नियमित सुरक्षित और समय से चलाने की जिम्मेदारी मंडल रेल प्रबंधक की होती है, जिसकी निगरानी महाप्रबंधक कार्यालय भी करता है. लेकिन यह ऐसा अंतहीन सिलसिला है जो 24 घंटे सातों दिन साल के 365 दिन लगातार चलता रहता है. यात्रियों को अपने गंतव्य से लेकर सुरक्षित उसके गंतव्य तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भारतीय रेल की होती है और यह जिम्मेदारी भारतीय रेल बखूबी निभाती है.

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