वायुशक्ति-2026 और 'अग्नि वर्षा': पाक सीमा के पास पोखरण में दिखेगा सेना का शौर्य, गरजेंगे फाइटर जेट और तोप के गोले
वायुशक्ति-2026 में आकाश और स्पाइडर मिसाइल सिस्टम, शॉर्ट रेंज लॉइटरिंग म्यूनिशन और काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (सीयूएएस) जैसी आधुनिक प्रणालियों का प्रदर्शन किया जाएगा.

Published : February 23, 2026 at 5:13 PM IST
|Updated : February 23, 2026 at 5:29 PM IST
जैसलमेर : पश्चिमी सीमा के नजदीक स्थित पोखरण फायरिंग रेंज एक बार फिर भारतीय वायुसेना की ताकत का साक्षी बनने जा रही है. पाकिस्तान सीमा से करीब 270 किलोमीटर दूर 27 फरवरी को होने वाले वायुशक्ति-2026 अभ्यास में आधुनिक लड़ाकू विमानों और उन्नत हथियार प्रणालियों का व्यापक प्रदर्शन किया जाएगा. इससे पहले 24 फरवरी, मंगलवार को कार्यक्रम की फुल ड्रेस रिहर्सल आयोजित होगी, जिसमें सभी गतिविधियों का पूर्वाभ्यास किया जाएगा. इसी के साथ पोकरण में भारतीय सेना की दक्षिणी कमान एक्सरसाइज ‘अग्नि वर्षा’ का आयोजन करेगी.
सीमावर्ती क्षेत्र में शक्ति प्रदर्शन : पोखरण की रेतीली धरती पर होने वाला यह अभ्यास सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सीमा से अपेक्षाकृत कम दूरी पर आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए भारतीय वायुसेना अपनी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, एयर डोमिनेंस और बहु-क्षेत्रीय अभियानों में दक्षता का प्रदर्शन करेगी. दिन, शाम और रात तीनों समय अलग-अलग ऑपरेशनल मिशन संचालित कर सटीक निशानेबाजी और समन्वित कार्रवाई को दर्शाया जाएगा.
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आसमान में गरजेंगे आधुनिक फाइटर जेट : अभ्यास में स्वदेशी तेजस के साथ अत्याधुनिक Rafale और Sukhoi Su-30MKI जैसे शक्तिशाली लड़ाकू विमान शामिल होंगे. इनके अलावा जगुआर, मिराज-2000, मिग-29 और हॉक विमान भी अपनी भूमिका निभाएंगे. सामरिक परिवहन और हेलीकॉप्टर बेड़े में सी-130जे, सी-295, सी-17, चेतक, एएलएच एमके-IV, मि-17 IV, एलसीएच, अपाचे और चिनूक जैसे प्लेटफॉर्म भाग लेंगे. इनकी भागीदारी से वायुसेना की बहुआयामी क्षमता का समग्र प्रदर्शन होगा.

उन्नत हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन : वायुशक्ति-2026 में आकाश और स्पाइडर मिसाइल सिस्टम, शॉर्ट रेंज लॉइटरिंग म्यूनिशन और काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (सीयूएएस) जैसी आधुनिक प्रणालियों का प्रदर्शन किया जाएगा. इन तकनीकों के माध्यम से दुश्मन के ठिकानों पर सटीक प्रहार, हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और ड्रोन खतरों से निपटने की क्षमता को दर्शाया जाएगा.
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'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता का प्रतिबिंब : यह अभ्यास पूर्व में संचालित ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को भी रेखांकित करेगा. उस अभियान में लंबी दूरी तक सटीक प्रहार और हवाई प्रभुत्व स्थापित करने की क्षमता प्रदर्शित की गई थी. वायुशक्ति-2026 के माध्यम से 'आत्मनिर्भर भारत' की परिकल्पना के अनुरूप स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स की प्रभावशीलता को भी सामने लाया जाएगा.
Indian Air Force: Infallible, Impervious and Precise
— Indian Air Force (@IAF_MCC) February 23, 2026
4 days to go.
From planning tables to live combat drills, the Indian Air Force is set to translate readiness into decisive air power at Pokhran.
On 27 February, witness speed, precision and synchronized firepower converge at… pic.twitter.com/zUjVqOtDmr
सोशल मीडिया पर दी जानकारी : भारतीय वायुसेना ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए कहा है कि वह 'अचूक, अजेय और सटीक' मूल्यों के साथ परिचालन उत्कृष्टता का प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं. 27 फरवरी को होने वाले कार्यक्रम का सीधा प्रसारण वायुसेना के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किया जाएगा.
उच्चस्तरीय उपस्थिति की संभावना : कार्यक्रम की गरिमा को देखते हुए इस बार शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति की भी संभावना जताई जा रही है. 27 फरवरी को आयोजित मुख्य कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा राजस्थान के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के शामिल होने की संभावना है. साथ ही भारतीय सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी भी बड़ी संख्या में मौजूद रह सकते हैं.
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रेगिस्तान में परखी जाएगी युद्ध तैयारी: जैसलमेर की पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में 24 फरवरी 2026 को भारतीय सेना की दक्षिणी कमान के तत्वावधान में एक्सरसाइज ‘अग्नि वर्षा’ का आयोजन करेगी. रेगिस्तानी युद्धक्षेत्र जैसे वास्तविक माहौल में होने वाला यह उच्च स्तरीय युद्धाभ्यास सेना की ऑपरेशनल तैयारियों और संयुक्त युद्ध क्षमता की व्यापक परीक्षा लेगा. यहां ऑल आर्म्स के संयुक्त समन्वय का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न हथियार प्रणालियां एकीकृत होकर लक्ष्य पर सटीक और प्रभावी कार्रवाई करेंगी. अभ्यास के दौरान लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता का परीक्षण भी प्रमुख फोकस रहेगा.
आधुनिक तकनीक और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली: ‘अग्नि वर्षा’ में नेटवर्क आधारित कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम का अभ्यास किया जाएगा, जिससे रियल टाइम में सूचनाओं का आदान-प्रदान और त्वरित निर्णय संभव हो सके. आधुनिक हथियार प्रणालियों की ताकत के साथ स्वदेशी तकनीक और हथियारों पर विशेष जोर रहेगा. यह अभ्यास सेना के तकनीकी आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाए गए कदमों को भी रेखांकित करेगा.
On 24 February 2026, the #IndianArmy, under the aegis of Southern Command, will conduct Exercise Agni Varsha in desert terrain to validate operational preparedness and integrated combat capabilities.
— ADG PI - INDIAN ARMY (@adgpi) February 23, 2026
The exercise will focus on coordinated employment of all arms, precision… pic.twitter.com/gredvQbTjJ
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अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामरिक संदेश: यह सैन्य अभ्यास केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक रणनीतिक महत्व भी है. 25 देशों के रक्षा पत्रकारों की मौजूदगी में होने वाला यह आयोजन वैश्विक समुदाय को भारत की सैन्य क्षमता और पेशेवर दक्षता से रूबरू कराएगा. इससे यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह के अभ्यास भारत की रक्षा कूटनीति को भी मजबूती प्रदान करते हैं.
त्वरित और निर्णायक कार्रवाई की क्षमता: अभ्यास के दौरान विभिन्न युद्धक टुकड़ियां समन्वित तरीके से कार्रवाई कर अपनी तेज प्रतिक्रिया क्षमता का प्रदर्शन करेंगी. कठिन रेतीले इलाके में सैन्य संसाधनों की तैनाती, लॉजिस्टिक सपोर्ट और संचार व्यवस्था की मजबूती को भी परखा जाएगा. इस व्यापक युद्धाभ्यास से साफ संकेत मिलता है कि भारतीय सेना बदलते युद्ध स्वरूप के अनुरूप स्वयं को निरंतर सशक्त बना रही है और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूर्णतः तैयार है.
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