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अमेरिकी टैरिफ बनाम भारतीय अर्थव्यवस्था: बातचीत, नए बाजार और स्मार्ट रणनीति जरूरी

अमेरिकी टैरिफ के मामले में सोशल एंटरप्रेन्योर्स ने भारत को किसी स्थायी या एकतरफा नीति के बजाय 'स्मार्ट अप्रोच' अपनाने पर जोर दिया है.

US tariffs policy
एक कार्यक्रम में आर्थिक जानकार (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 6, 2026 at 3:49 PM IST

3 Min Read
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जयपुर: अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत और उम्मीदों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को रूसी तेल खरीद के मुद्दे पर चेतावनी दी है. ट्रंप ने भारत को रूसी तेल के मामले में अमेरिका की मदद नहीं करने पर भारत पर और ज्यादा टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की बात कही है. इस मामले में आर्थिक जानकार और सोशल एंटरप्रेन्योर्स ने ईटीवी से बात की. उनका कहना था कि भारत को सावधानी और सतर्कता से अपनी रणनीति बनानी होगी. सोशल एंटरप्रेन्योर सतीश झा का कहना है कि ट्रंप ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था में उथल-पुथल मचा दी है. ऐसे में भारत को किसी स्थायी या एकतरफा नीति के बजाय 'स्मार्ट अप्रोच' अपनानी चाहिए. उनका मानना है कि पहले यह समझना जरूरी है कि अमेरिका किस दिशा में जा रहा है और उसके बाद बातचीत के जरिए रास्ता निकाला जाए.

अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव से हो बातचीत: उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर अस्थायी है और आने वाले कुछ सालों में हालात स्थिर होंगे. ऐसे में फिलहाल हर फैसले का जवाब एक ही नीति से देना संभव नहीं है, बल्कि हालात को समझते हुए त्वरित और व्यावहारिक समाधान निकालने होंगे. 50 फीसदी जैसे भारी टैरिफ की बात आती है तो उसे सीधे स्वीकार करने के बजाय बातचीत के जरिए इस तरह फैलाया जा सकता है कि उद्योगों को कम से कम नुकसान हो. इसके लिए अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के साथ मजबूत आर्थिक बातचीत ज़रूरी है.

सोशल एंटरप्रेन्योर्स से बातचीत (ETV Bharat Jaipur)

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टैरिफ मतलब आम जनता पर टैक्स: सेंटर फॉर इकोनॉमी एंड फाइनेंस (यूके) के डायरेक्टर प्रोफेसर सुरेश दैमन का कहना था कि राष्ट्रपति ट्रंप अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए बिना कांग्रेस या सीनेट की मंजूरी के टैरिफ लागू कर रहे हैं. अमेरिका पर करीब 33 ट्रिलियन डॉलर का भारी कर्ज है और इसे टैरिफ के जरिए भरपाई की कोशिश हो रही है. उन्होंने साफ कहा कि यह टैरिफ एक तरह का टैक्स है, जो भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका की जनता पर भी पड़ रहा है, इसलिए वहां महंगाई बढ़ने लगी है. प्रोफेसर दैमन के मुताबिक भारत ने अब तक ट्रंप की टैरिफ नीति के खिलाफ कोई ठोस और आक्रामक रणनीति नहीं बनाई है. सरकार फिलहाल चुप्पी साधे हुए है और हालात बदलने का इंतजार कर रही है. न्यूजीलैंड जैसे छोटे देशों से व्यापार समझौते करना केवल अल्पकालिक समाधान हैं.

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नए बाजारों की तलाश की जाए: उनका कहना था कि अमेरिका के साथ भारत का सालाना व्यापार करीब 64 बिलियन डॉलर का है. ऐसे में 1-2 बिलियन डॉलर के छोटे विकल्प भारत को बड़ा सहारा नहीं दे सकते. जरूरत इस बात की है कि भारत व्यापार के लिए नए देशों और नए बाज़ारों की तलाश करे और ऐसे उत्पाद विकसित करें, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा मांग हो.