साल 2025-26 में देश का रिकॉर्ड 119 मिलियन टन गेहूं उत्पादन लक्ष्य, अन्न भंडार होंगे मजबूत, नई प्रजातियों से किसानों को मिलेगा लाभ
भारत 2025-26 में रिकॉर्ड 119 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है.

Published : December 5, 2025 at 1:59 PM IST
|Updated : December 5, 2025 at 2:06 PM IST
करनाल: सरकार ने साल 2025-26 में देश में गेहूं उत्पादन के लिए ऐतिहासिक लक्ष्य 119 मिलियन टन तय किया है. यह लक्ष्य पिछले साल के मुकाबले 3.47% अधिक है.जबकि 2024-25 में 115 मिलियन टन का लक्ष्य था, इस बार अनुमानित उत्पादन 117.5 मिलियन टन पहुंचने का अनुमान है. इस बढ़ते लक्ष्य के साथ देश के अन्न भंडार और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है. इस लक्ष्य की प्राप्ति से खाद्य सुरक्षा में मजबूती आएगी और किसानों को भी बेहतर आर्थिक लाभ मिलेगा.
मौसम गेहूं की फसल के अनुकूल: करनाल स्थित राष्ट्रीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने बताया कि, "इस बार मौसम पूरी तरह गेहूं की फसल के पक्ष में है. किसानों ने समय पर बिजाई की है और खेतों में गेहूं का फुटाव शानदार दिखाई दे रहा है. तापमान गेहूं की वृद्धि के लिए अनुकूल है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार की संभावना बढ़ रही है. यह मौसम किसानों के लिए अत्यंत शुभ संकेत माना जा रहा है."

किसानों के लिए एडवाइजरी और सुरक्षा उपाय: संस्थान ने फसल में बीमारियों से बचाव के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है. जिन खेतों में बिजाई को 21 से 25 दिन हो गए हैं, वहां किसानों को समय पर सिंचाई और निर्धारित मात्रा में यूरिया डालने की सलाह दी गई है. डॉ. तिवारी ने पीले रतवे के खतरे को ध्यान में रखते हुए किसानों से सतर्क रहने और हल्के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क करने का आग्रह किया है. यह कदम फसल की सुरक्षा और उत्पादन बढ़ाने में मददगार साबित होगा.

पछेती बिजाई के लिए प्रभावी नई किस्में: उत्तर-पश्चिमी मैदानों में पछेती बिजाई करने वाले किसानों के लिए संस्थान ने पीबीडब्ल्यू 771 और GKW 261 को सबसे प्रभावी किस्में बताया है. ये किस्में न केवल अधिक उत्पादन देती हैं, बल्कि बीमारियों के प्रति मजबूत प्रतिरोधक क्षमता भी रखती हैं. इन किस्मों के उपयोग से पिछली बिजाई करने वाले किसानों को भी बेहतर लाभ मिलने की संभावना है.

नई प्रजातियों से उत्पादन बढ़ोतरी: डॉ. तिवारी ने बताया कि, "संस्थान द्वारा विकसित की गई नई गेहूं प्रजातियां अधिक रोग-रोधी और उत्पादक हैं. पीले रतवे के प्रति इनकी मजबूत प्रतिरोधक क्षमता है. अनुमोदन के बाद ये प्रजातियां किसानों के लिए जल्द जारी की जाएंगी. इससे किसानों को रोगों की चिंता कम होगी और देश का गेहूं उत्पादन नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकेगा.
इस तरह मौसम, नई प्रजातियां और वैज्ञानिक सलाह के माध्यम से 2025-26 में देश का गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की पूरी संभावना है. अन्न भंडार की मजबूती और खाद्य सुरक्षा दोनों के लिए यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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