जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल की तैयारी, सरपट दौड़ेगी पटरी पर, 25 रुपए में जींद से सोनीपत का सफ़र
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन पटरी पर बहुत जल्दी सरपट भागने वाली है. इसके लिए तैयारियां शुरू हो चुकी है.

Published : January 5, 2026 at 10:47 PM IST
जींद : देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल को लेकर जींद में तैयारियां जोरों पर है. सोमवार को लखनऊ से एक स्पेशल कोच इस ट्रेन के संचालन में इस्तेमाल होने वाला सामान भी लेकर पहुंचा है. उम्मीद जताई जा रही है कि बहुत जल्द ये ट्रेन सरपट पटरियों पर दौड़ेगी. इस ट्रेन के ट्रायल को देखने के लिए लोगों में बहुत ज्यादा उत्साह है. हाइड्रोजन टेन को कड़ी सुरक्षा के बीच जींद के हाइड्रोजन प्लांट में रखा गया है.
आठ डिब्बों की है हाइड्रोजन ट्रेन : हाइड्रोजन से चलने वाली ये ट्रेन आठ डिब्बों की होगी और हाइब्रिड तकनीक पर आधारित होगी जिसमें अक्षय ऊर्जा भंडारण जैसे बैटरी या सुपर कैपेसिटर लगे होंगे. इंजन में डीजल की जगह फ्यूल सेल, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का उपयोग किया जाएगा. ऑक्सीजन की मदद से हाइड्रोजन नियंत्रित ढंग से जलेगी जिससे बिजली पैदा होगी. ये बिजली लिथियम आयन बैटरी को चार्ज करेगी जिससे ट्रेन चलेगी. ट्रेन में 1200-1200 हॉर्स पावर के दो इंजन हैं. ट्रेन को प्रति घंटे 40 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होगी जिसके लिए स्टेशन की छतों से पानी भी प्लांट तक पहुंचाया जाएगा. इसकी रफ्तार और यात्रियों को ले जाने की क्षमता डीजल ट्रेन के बराबर होगी. कयास लगाए जा रहे हैं कि 26 जनवरी को ये ट्रेन रेलवे ट्रैक पर दौड़ेगी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसी माह ट्रेन का उद्घाटन करेंगे लेकिन इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है.
25 रुपये में जींद से सोनीपत का सफर : हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत रूट पर चलेगी. यात्री 25 रुपये में जींद से सोनीपत का 89 किलोमीटर का सफर एक घंटे में तय करेंगे. डीएमयू ट्रेन में ये सफर दो घंटे में तय होता है. बस में जींद से सोनीपत तक का सफर डेढ़ घंटे में तय होता है और किराया भी ट्रेन से साढ़े चार गुना ज्यादा है. बस में सोनीपत जाने के लिए 110 रुपये किराया देना पड़ता है. जींद से सोनीपत तक छह स्टेशनों पर ठहराव होगा
प्लांट के अंदर चल रहा टेस्टिंग का काम : प्लांट के अंदर ट्रेन की टेस्टिंग का काम चल रहा है. हाइड्रोजन गैस से चलने वाले इंजन धुएं की बजाय भाप और पानी छोड़ेंगे, जिससे प्रदूषण नहीं होगा. इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेन 10 गुना अधिक दूरी तय कर सकती है. ये ट्रेन 360 किलोग्राम हाइड्रोजन में 180 किलोमीटर का सफर करेगी. हाइड्रोजन प्लांट मैनेजर संजय ने बताया कि "अभी तक ट्रेन के ट्रायल को लेकर कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं है. जब भी ट्रायल होगा तो इसके बारे में सबको बता दिया जाएगा."

रेलवे ट्रैक का भी मुआयना : सोमवार को लखनऊ से एक स्पेशल कोच इस ट्रेन के संचालन में इस्तेमाल होने वाला सामान लेकर पहुंचा और इसमें कई तरह की केबल और फिटिंग का सामान है. देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन का जिम्मा लखनऊ की आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन्स एंड स्टैंडडर्स आर्गनाइजेशन) की टीम को दिया गया है. इस ट्रेन में लगी सभी मशीनों की टेस्टिंग फिलहाल जंक्शन पर ही चल रही है. जब ये टीम सभी चीजों को हरी झंडी देगी, तभी इस ट्रेन का ट्रायल किया जाएगा. उत्तर रेलवे के पीआरओ कुलतार सिंह ने कहा कि "हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन को लेकर बारीकि से काम किया जा रहा है. टेस्टिंग प्रक्रिया को शुरू करने से पहले रेलवे ट्रैक का भी मुआयना किया जा रहा है. जल्द ही इसे पूरा किया जाएगा."

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