जनगणना 2027, जानें बिहार में किस तरह अधिकारी आ गए हैं एक्शन मोड में
बिहार में जनगणना टीम 2 मई से घर-घर पहुंचेगी. 33 सवालों में पूरा ब्योरा दर्ज होगा. 17 अप्रैल से सेल्फ काउंटिंग होगी. पढ़ें खबर

Published : February 24, 2026 at 3:17 PM IST
पटना : भारत की जनगणना 2027 को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के उद्देश्य से पटना में राज्यस्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण सम्मेलन का आयोजन किया गया. इसमें राज्य के सभी प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त शामिल हुए. सम्मेलन का उद्देश्य आगामी जनगणना प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा करना और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देना था, ताकि आंकड़ों का संग्रहण पूरी तरह सटीक और पारदर्शी तरीके से किया जा सके.
मुख्य सचिव ने की अध्यक्षता : सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि जनगणना की सटीकता पर ही राष्ट्र और राज्य की नीतियों का निर्माण निर्भर करता है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, रोजगार और बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाएं जनगणना से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ही तैयार की जाती हैं.
''ऐसे में यदि आंकड़ों में कोई भी त्रुटि होती है तो उसका सीधा असर नीति निर्माण और योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ता है. इसलिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि वे इस कार्य को पूरी गंभीरता से करें.''- प्रत्यय अमृत, मुख्य सचिव, बिहार

17 अप्रैल से सेल्फ काउंटिंग की सुविधा : सम्मेलन में बताया गया कि 17 अप्रैल से नागरिकों के लिए सेल्फ काउंटिंग की सुविधा शुरू की जाएगी. इसके तहत लोग स्वयं अपनी जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज कर सकेंगे. इसके बाद 2 मई से प्रशिक्षित गणना कर्मी घर-घर जाकर जनगणना का कार्य करेंगे.
जनगणना में 33 प्रश्न : इस बार जनगणना में कुल 33 प्रश्न शामिल किए गए हैं, जिनके माध्यम से परिवार की संरचना, आवासीय स्थिति, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं से जुड़ी जानकारियां एकत्र की जाएंगी. अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने जिलों में प्रशिक्षण प्राप्त कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करें और समयबद्ध तरीके से सभी तैयारियां पूरी करें.
जनगणना से भविष्य की योजनाएं तय होती हैं : मुख्य सचिव ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन भर नहीं है, बल्कि यह भविष्य की योजनाओं की नींव है. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्तर पर डेटा एंट्री में लापरवाही न हो. साथ ही यह भी कहा गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होने वाली जानकारियों की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाएगा और नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी.
आम जन में जागरूकता का निर्देश : सम्मेलन में यह भी बताया गया कि जनगणना कार्य को लेकर आम जनता को जागरूक करना बेहद जरूरी है. इसके लिए जिला स्तर पर प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जाएगा, ताकि लोग बिना किसी हिचक के अपनी सही जानकारी उपलब्ध करा सकें. अधिकारियों से कहा गया कि वे स्थानीय स्तर पर पंचायतों, नगर निकायों और अन्य संस्थाओं के सहयोग से लोगों को यह समझाएं कि जनगणना में दी गई जानकारी का उपयोग केवल नीतिगत और विकासात्मक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा.
तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा : प्रशिक्षण सम्मेलन में तकनीकी पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई. अधिकारियों को डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल, प्रश्नावली भरने की प्रक्रिया और त्रुटियों से बचने के तरीकों की जानकारी दी गई. इसके अलावा यह भी बताया गया कि फील्ड स्तर पर किसी भी समस्या की स्थिति में त्वरित समाधान के लिए अलग से हेल्प डेस्क और निगरानी व्यवस्था बनाई जाएगी.
पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे अधिकारी : राज्य सरकार का लक्ष्य है कि जनगणना 2027 की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से संपन्न हो. अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जनगणना कार्य को सफल बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे.
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