रमेश ईनाणी हत्याकांड: बैंक ट्रांजेक्शन बना अहम कड़ी, संत से हत्या का आरोपी बना रमताराम...
शूटर के अकाउंट खंगालने पर कुछ संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए. पैसा ट्रांसफर करने वालों से पूछताछ की तो कड़ियां जुड़ी और सूत्र रमताराम तक पहुंचे.

Published : May 11, 2026 at 5:21 PM IST
चित्तौड़गढ़: शहर में गत वर्ष 11 नवम्बर को दिनदहाड़े हुए कूरियर व्यवसायी रमेश ईनाणी हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली. पुलिस ने 50 हजार के इनामी आरोपी रमताराम को रविवार को संगम के पास से गिरफ्तार किया. बैंक ट्रांजेक्शन की कड़ी ने मुख्य साजिशकर्ता रमताराम को संदेह के घेरे में ला दिया. हत्या की वारदात के बाद करीब 11 दिन रमताराम चित्तौड़गढ़ में ही था, लेकिन जैसे ही शूटर के बैंक खाते में ट्रांजेक्शन की जानकारी सामने आते ही गायब हो गया. छह माह से फरार रमताराम को सोमवार को कड़ी सुरक्षा में न्यायालय में पेश किया, जहां से पांच दिन के रिमांड पर सौंपा.
पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी ने बताया कि 11 नवम्बर 2025 को रमेश ईनाणी की हत्या के दिन पुलिस ने शूटर मनीष दुबे को दबोच लिया था. शूटर दुबे के बैंक अकाउंट खंगालने पर कुछ संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए. पैसा ट्रांसफर करने वालों से सख्ती से पूछताछ की तो कड़ियां जुड़ती गई और सूत्र रमताराम तक पहुंचे. रमताराम ने ही शूटर को सुपारी की रकम भिजवाई थी. बैंक खातों की जांच में पैसों का लेनदेन दिखा. इसके बाद पुलिस ने रमताराम को मुख्य आरोपी बनाकर तलाश तेज की. इसे सोमवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया.
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भूमि विवाद बना हत्या की वजह: पुलिस जांच में सामने आया कि रामद्वारा के पूर्व संत रमताराम और व्यवसायी रमेश ईनाणी के बीच रामद्वारा के पीछे की कृषि भूमि को लेकर पुराना विवाद था. यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है. आशंका है कि इसी जमीन के विवाद में रमताराम ने हत्या की साजिश रची. कोतवाली सीआई तुलसीराम ने बताया, हत्या के आरोपी को पांच दिन के रिमांड पर लिया है. उससे हत्या की असल वजह, पैसे का रूट, अन्य शामिल लोगों और षड्यंत्र की परतें खोली जाएगी. इस मामले में मनीष दुबे, भजनाराम सहित दो अन्य पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं.
वर्षों से था रामद्वारा का संत: रमताराम चित्तौड़गढ़ के रामद्वारा के संत के रूप में पूजा की जाती थी. वर्षों से रमताराम रामद्वारा में रह रहा था. कई भक्त आशीर्वाद लेने आते थे. रमताराम की वर्तमान में 62 साल का है तथा 45 साल से भी अधिक समय से चित्तौड़गढ़ रामद्वारा में ही था. जिस संप्रदाय से रमताराम जुड़ा था. उन्होंने भी इसे संप्रदाय से निष्कासित कर दिया था.

