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DU के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.20 लाख छात्रों को मिली डिग्री, उपराष्ट्रपति ने दिया राष्ट्र निर्माण का संदेश

दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.20 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को डिग्रियां दी गई.

दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह
दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : February 28, 2026 at 1:16 PM IST

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नई दिल्ली: तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक लोकतांत्रिक चुनौतियों के इस दौर में युवाओं को जिम्मेदारी, नवाचार और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ना होगा. यह बात उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने कहा कि बदलती दुनिया में भारत के युवाओं की भूमिका केवल करियर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी उनकी भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है.

ऐतिहासिक विरासत और निरंतरता की मिसाल
उपराष्ट्रपति ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय अपने गौरवशाली शैक्षणिक इतिहास के साथ निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है. स्थापना से लेकर अब तक ऐसा कोई वर्ष नहीं रहा जब दीक्षांत समारोह आयोजित न हुआ हो, जो इसकी शैक्षणिक परंपरा और निरंतरता का प्रतीक है. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने अपनी यात्रा मात्र तीन कॉलेज, दो संकाय और आठ विभागों से शुरू की थी. आज यह संस्थान 16 संकायों, 86 विभागों, 90 कॉलेजों, 20 हॉल व छात्रावासों, 30 से अधिक केंद्रों और संस्थानों, 34 पुस्तकालयों तथा 6 लाख से अधिक विद्यार्थियों के साथ देश के अग्रणी उच्च शिक्षण संस्थानों में शुमार है.

दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह (ETV Bharat)
वैश्विक रैंकिंग की ओर बढ़ते कदमउपराष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय की बढ़ती राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि लक्ष्य केवल वर्तमान उपलब्धियों तक सीमित नहीं होना चाहिए. आने वाले वर्षों में विश्व की शीर्ष 300, फिर 200 और अंततः शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में स्थान बनाना हमारा सामूहिक उद्देश्य होना चाहिए. उपराष्ट्रपति ने कहा कि,

विश्वविद्यालय में 98 प्रतिशत तक की कटऑफ जाना इसकी शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रमाण है. यहां से निकले पूर्व छात्र देश के बौद्धिक, राजनीतिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक जीवन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाते रहे हैं. उन्होंने स्नातकों से कहा कि उनकी डिग्री केवल एक प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति एक गंभीर प्रतिबद्धता है.


वर्ष 2047 का लक्ष्य और युवाओं की भूमिका
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी. नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता को बढ़ावा देना समय की मांग है. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वह तकनीक का उपयोग मानवता और समाज के कल्याण के लिए करें.

महिला शिक्षा में नई उपलब्धि
उपराष्ट्रपति ने विशेष रूप से प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष 70 प्रतिशत से अधिक स्वर्ण पदक विजेता छात्राएं हैं. उन्होंने इसे महिला शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति बताया और कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं, जो समानता और सामाजिक परिवर्तन का संकेत है.

गुरुजनों और अभिभावकों का योगदान
उन्होंने कहा कि किसी भी महान विश्वविद्यालय की पहचान केवल उसके भव्य भवनों से नहीं होती, बल्कि उसके शिक्षकों की निष्ठा और विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण से होती है. उन्होंने अभिभावकों के त्याग और शिक्षकों के मार्गदर्शन को इस सफलता का आधार बताया.

1.20 लाख से अधिक छात्रों को मिली डिग्री
दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.20 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को डिग्रियां दी गई. उपराष्ट्रपति ने रिमोट का बटन दबाकर डिजिटल डिग्री का शुरुआत की. वर्ष 2025 में अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले स्नातक (यूजी), परास्नातक (पीजी), एफवाईयूपी और पीएचडी के छात्र-छात्राएं इस दीक्षांत समारोह में शामिल हुए. विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि दीक्षांत समारोह में यूजी, पीजी और एफवाईयूपी कार्यक्रमों के कुल 1,20,408 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गई. इनमें नियमित पाठ्यक्रमों के साथ-साथ एनसीडबल्यूईबी और एसओएल के छात्र भी शामिल रहे. जिनमें 1,09,003 छात्र स्नातक, 11,362 छात्र परास्नातक तथा 43 विद्यार्थी एफवाईयूपी कार्यक्रम से डिग्री मिली. इसके अलावा 750 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई.

मेडल और पुरस्कारों की झड़ी
दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण तक सीमित नहीं raha, बल्कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया. कुल 132 गोल्ड व एक सिल्वर मेडल और अन्य पुरस्कार प्रदान किए गए. यूजी और पीजी वर्ग में 112 गोल्ड मेडल और एक सिल्वर मेडल दिया गया. जबकि 19 विद्यार्थियों को विशेष पुरस्कार (सर्टिफिकेट) प्रदान किए गए. ‘शताब्दी चांस’ के अंतर्गत अपनी डिग्री पूरी करने वाले 20 विद्यार्थियों को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया.

दीक्षांत समारोह एक नई शुरुआत
स्नातकों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह अंत नहीं, बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत है. सीखना एक आजीवन प्रक्रिया है और अनुशासन, पारदर्शिता तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना हर युवा का दायित्व है. उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं.

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