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अंता उप चुनाव: भाजपा के दिग्गज भी नहीं जिता पाए सीट, एक्सपर्ट ने गिनाए हार के ये कारण

अंता उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को करीब 15 हजार वोटों से हराया. हार के बाद भाजपा विश्लेषण में जुटी है और कांग्रेस उत्साहित है.

अंता विधानसभा सीट
जीत के बाद प्रमोद जैन भाया (ETV Bharat Baran)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : November 14, 2025 at 6:33 PM IST

7 Min Read
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जयपुर: प्रदेश की एकमात्र अंता विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने अच्छे मार्जिन के साथ जीत हासिल की. कांग्रेस-भाजपा के साथ इस विधानसभा सीट पर निर्दलीय के तौर पर नरेश मीणा ने मुकाबले को शुरू से ही त्रिकोणीय बना दिया था, लेकिन मतगणना के उतार-चढ़ाव के बीच अंततः मुकाबला कांग्रेस ने 15 हजार से अधिक मतों से जीत लिया.

प्रदेश में भले ही एक सीट पर उपचुनाव हुआ हो, लेकिन इस चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के साथ अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं की साख दांव पर रही. चुनाव परिणाम के बाद अब बीजेपी हार के कारणों का विश्लेषण करने की बात कर रही है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मिथिलेश जेमिनी मानते हैं कि भाजपा की आंतरिक गुटबाजी और सरकार के 22 महीने के काम के आकलन से भाजपा ने अंता का ताज खो दिया. उन्होंने कहा कि आगे पंचायत-निकाय चुनाव हैं. ऐसे में भाजपा के सामने ये एक ट्रेलर है, जिससे सबक लेना होगा.

राजनीतिक विश्लेषक मिथिलेश जेमिनी (ETV Bharat Jaipur)

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सरकार के काम को नकारा: सूबे की सियासत में अंता चुनाव ने सर्द मौसम में राजनीतिक पारे को गरमा दिया है. त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस के प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया ने अंता का ताज अपने सिर बांध लिया. भाया ने 15 हजार से ज्यादा वोटों से भाजपा प्रत्याशी मोरपाल सुमन को हराया, जबकि निर्दलीय के तौर पर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने वाले नरेश मीणा भी अच्छे वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे. चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस जहां उत्साहित है, वहीं भाजपा हार के कारणों का विश्लेषण में जुट गई है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि जनता का जनादेश स्वीकार है, परिणाम हमारी अपेक्षाओं के विपरीत आया है. कारणों पर मंथन करेंगे. राठौड़ ने कहा कि पार्टी ने पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ा, लेकिन हमें हार का सामना करना पड़ा, कहां क्या कमियां रही, उसको लेकर विश्लेषण होगा.

अंता में कांग्रेस, भाजपा के साथ निर्दलीय के समर्थन की भूमिका

  • भाजपा इन नेताओं की भूमिका: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेश मदन राठौड़, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, सांसद दुष्यंत सिंह, उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, मंत्री जोगाराम पटेल, मंत्री जोगाराम कुमावत, मंत्री ओटाराम देवासी, विधायक श्रीचंद कृपलानी, वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, विधायक मोक्षम चौधरी ने प्रमुख भूमिका में चुनाव को संभाला था.
  • कांग्रेस इन नेताओं की भूमिका: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट, चुनाव प्रभारी और विधायक अशोक चांदना ने चूनावी मैनेजमेंट को संभाला था.
  • नरेश मीणा के पक्ष इन नेताओं की भूमिका: नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल, आप सांसद संजय सिंह, पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा, उत्तर प्रदेश के मेरठ से विधायक अतुल प्रधान समेत कई बड़े लोगों ने चुनाव में भूमिका निभाई.

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अंता उप चुनाव विश्लेषण
सीएम भजनलाल और वसुंधरा राजे ने किया था रोड शो (ETV Bharat Baran)

समीक्षा में जुटी भाजपा: भाजपा भले ही परिणाम के बाद विश्लेषण में जुटी हो, लेकिन राजनीति के पंडित इस चुनाव का बड़े दूरगामी असर देख रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश जेमिनी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने करीब एक सप्ताह तक अंता में डेरा डाला. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी दो रोड शो किए. प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने तीन बार दौरा कर संगठन की बैठक ली और रोड शो के हिस्सा रहे, लेकिन वो सब काम नहीं आया.

जेमिनी ने कहा कि वैसे इस चुनाव में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा चुकी थीं, इसलिए चुनावी रणनीति भी उन्हीं के हिसाब तय की गई. इस चुनावी रणनीति में धाकड़ समाज से आने वाले भजनलाल सरकार में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, दलित समाज से आने वाले शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और माली समाज से आने वाले प्रभुलाल सैनी की नो एंट्री की गई, जो राजनीतिक चूक मानी जा सकती है, जिसका बड़ा खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ा क्योंकि ये तीनों समाज इस विधानसभा में बड़ा वोट बैंक हैं.

अंता उप चुनाव विश्लेषण
गहलोत ने भाया के लिए किया था प्रचार (ETV Bharat Baran)

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नतीजे प्रमुख नेताओं को प्रभावित करेंगे: मिथिलेश जेमिनी ने कहा कि अंता उपचुनाव के नतीजे राजस्थान के तीन बड़े चेहरों को सबसे ज्यादा प्रभावित करेंगे, जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हैं. कारण भी स्पष्ट है, भाजपा उम्मीदवार वसुंधरा राजे की पसंद से उतारा गया था, इसलिए उम्मीदवार की हार का पहला असर राजे पर ही आएगा. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार के मुखियां हैं, ऐसे में चुनाव से उनकी प्रतिष्ठा सीधे तौर पर जुड़ी हुई थी. तीसरी जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की, क्योंकि संगठन उनके जिम्मे हैं.

जेमिनी ने कहा कि कांग्रेस के लिहाज से देखें तो कांग्रेस का उम्मीदवार अशोक गहलोत की पसंद का था. ऐसे में परिणाम गहलोत को राजनीतिक लाभ देंगे. इसके साथ चुनाव में भूमिका निभाने वाले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के साथ चुनाव प्रबंध देख रहे विधायक अशोक चांदना का भी कद बढ़ा है, जहां तक निर्दलीय नरेश मीणा की बात करें तो उन्हें अपेक्षा से ज्यादा वोट मिले हैं. नरेश का ये तीसरा चुनाव था, जिसे वो हार गए. इससे उनकी व्यक्तिगत क्षति तो है ही साथ में पहले दिन चुनाव प्रचार में लगे पूर्व मंत्री राजेंद्र गुड्डा, आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल पर इस हार का असर होगा. मिथिलेश जेमिनी कहते हैं कि चुनाव भले ही एक सीट पर हो रहा हो, लेकिन साख इन सब दिग्गजों की दांव पर थी. हार-जीत का सेहरा भी इनके सिर रहेगा.

कांग्रेस की रैली
कांग्रेस की रैली (ETV Bharat Baran)

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अंता सीट पर पहली बार हुआ उपचुनाव: अंता सीट की बात करें तो इस सीट पर पहली बार उपचुनाव हुए हैं. साल 2008 में वसुंधरा राजे ने रघुवीर सिंह कौशल को उम्मीदवार बनाया, लेकिन वह चुनाव हार गए. उसके बाद 2013 विधानसभा चुनाव में वसुंधरा राजे ने अपनी पसंद से प्रभुलाल सैनी को उम्मीदवार बनाया और वह चुनाव जीते. इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में वसुंधरा ने फिर से अपनी पसंद प्रभुलाल सैनी का चेहरा रखा, लेकिन सैनी चुनाव हार गए.

इसके बाद वसुंधरा राजे ने 2023 में अपनी पसंद बदली और कंवरलाल मीणा को चुनावी मैदान में उतारा. मीणा राजे के भरोसे पर खरे उतरे और जीत दर्ज की, लेकिन 20 साल पुराने मामले में कंवरलाल मीणा को कोटा में सजा सुनाने पर जेल जाना पड़ा और उनकी विधायकी समाप्त कर दी गई. इसी वजह से अंता विधानसभा सीट पर पहली बार उपचुनाव हुए, जिसमें भाजपा को बड़ी हार का सामान करना पड़ा.