पापा के साथ कोर्ट में मौजूद था 10 साल का बेटा और 7 साल की बेटी, जज ने सुनायी उम्रकैद की सजा
कोर्ट ने पत्नी की नृशंस हत्या के दोषी पति को उम्रकैद की सजा सुनाई. दो मासूम बच्चों की चिंता भी कोर्ट ने की. रिपोर्ट- दिलीप

Published : August 19, 2026 at 1:09 PM IST
बेतिया : जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ माधवेंद्र मिश्रा की अदालत ने मंगलवार को पत्नी की हत्या से जुड़े धनहा कांड संख्या 182/2020 में दोषी पति को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया. वहीं साक्ष्य छुपाने में धारा 201 के तहत 7 साल की कारावास और 25 हजार दंड की सजा सुनाई गई. अर्थदंड न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास काटना पड़ेगा. मृतका रीना देवी की मां थाना पिपरासी, थोरी बाजार निवासी इंदु देवी ने 30 जुलाई 2020 को प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
मासूमों के सामने पिता को उम्रकैद की सजा : फैसला सुनाने के दौरान कोर्ट का माहौल बेहद भावुक हो गया. न्यायाधीश ने जैसे ही बच्चों के सामने उनके पिता को सजा सुनाई, वैसे ही कोर्ट रूम में सन्नाटा पसर गया. दस साल का अगस्त और सात साल की अंजलि अपने पिता सुभाष यादव को सुनाई जा रही उम्रकैद की सजा को चुपचाप सुन रहे थे.
मासूमों के सामने भविष्य का संकट : दोनों मासूमों को शायद यह भी पूरी तरह समझ नहीं आ रहा था कि आजीवन कारावास क्या होता है? जिस पिता के साथ उन्हें बचपन बिताना था, उसी पिता को मां की हत्या के जुर्म में अदालत ने उम्रकैद की सजा दे दी. दोनों बच्चों की मां रीना देवी की करीब 6 साल पहले हत्या हो गई थी. इस फैसले के बाद अब मां के बाद पिता का साया भी बच्चों के सिर से हमेशा के लिए उठ गया है.
दादा-दादी के पास रहते हैं दोनों : अगस्त और अंजलि फिलहाल अपने दादा-दादी के पास रहते हैं. अगस्त गांव के सरकारी विद्यालय में पांचवी कक्षा का छात्र है. कोर्ट के फैसले के दौरान कोर्ट में मौजूद दोनों बच्चों की मासूमियत देखकर हर कोई भावुक हो गया. अगस्त से जब पूछा गया तो उसे आजीवन कारावास का मतलब तक पता नहीं था. हालांकि इस फैसले ने दोनों की बचपन की पूरी तस्वीर हमेशा के लिए बदल कर रख दी है.
कोर्ट ने जतायी बच्चों की चिंता : एक ओर अदालत ने हत्या जैसे गंभीर अपराध के लिए दोषी सुभाष यादव को कठोर सजा सुनाई, वहीं दूसरी ओर न्यायाधीश ने उन बच्चों के भविष्य की चिंता भी की. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ ने दोनों बच्चों की दयनीय स्थिति को देखते हुए जिला बाल संरक्षण इकाई, पश्चिमी चंपारण को आवश्यक निर्देश दिए. अदालत ने कहा कि मां की हत्या हो चुकी है और पिता के जेल में रहने के कारण बच्चों के पालन-पोषण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
परवरिश योजना से जोड़ा गया : अदालत ने निर्देश दिया है कि दोनों बच्चों को एक महीने के भीतर बिहार सरकार स्पॉन्सरशिप अथवा परवरिश योजना से जोड़ा जाए. योजना के तहत पात्र बच्चों को बालिक होने तक प्रति बच्चा हर माह ₹4000 की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है. इसके अलावा बच्चों के राहत एवं पुनर्वास के लिए चार-चार लाख रुपए की सहायता दिलाने का भी निर्देश प्रशासन को दिया गया.

दहेज के लिए जघन्य अपराध : बता दें कि मृतका रीना देवी की मां ने आरोप लगाया था कि रीना के पति बैरा टोला मुसहरी थाना धनहा निवासी सुभाष और उनके ससुर की ओर से सोने की चेन, बाइक, भैंस की मांग की जा रही थी. नहीं देने पर रीना की गला दबाकर हत्या कर दी गई और शव को ठिकाने लगा दिया गया. 30 जुलाई को भपसा नदी के किनारे मथुरा सिंह के खेत के पास पेड़ के नीचे रीना का अधजला शव मिला, जिसके दोनों हाथ और पैर गायब थे.
"सुभाष यादव ने पति-पत्नी के विश्वास के पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है. पत्नी रीना देवी की हत्या के बाद शव को छुपाने और साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया. उसके शरीर के हिस्सों को अलग-अलग बोरी में बंद कर चौर में फेंका गया और शेष हिस्से को जलाने का प्रयास किया गया."- मन्नू राम, अभियोजन अधिकारी
अंतिम अदालती आदेश : वहीं बचाव पक्ष ने कम सजा देने की मांग की. न्यायालय ने अपराध की प्रकृति और दोषी की भूमिका को देखते हुए सुभाष यादव को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और एक लाख अर्थदंड और धारा 201 के तहत 7 वर्ष कारावास और ₹25000 अर्थ दंड की सजा सुनाई है. अर्थ दंड नहीं देने पर दोनों धाराओं में अलग-अलग अवधि का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा. दोषी द्वारा पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को इस मुख्य सजा में समायोजित किया जाएगा.
ये भी पढ़ें
पति की हत्या में पत्नी और बॉयफ्रेंड को उम्रकैद, दानापुर कोर्ट ने सुनाई सजा
प्रेग्नेंट गर्लफ्रेंड को मारकर खेत में फेंका, अब जेल में कटेगी पूरी जिंदगी

