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बूंदी में वन्यजीवों पर बढ़ा संकट, बैखौफ शिकारियों के फंदों में फंस रहे है पैंथर, अब तक 3 बचाए गए

बूंदी में इस साल तीन युवा पैंथर शिकारियों के फंदों में फंस चुके हैं, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

फंदे में फंसे पैंथर का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया
फंदे में फंसे पैंथर का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया (ETV Bharat Bundi)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : December 19, 2025 at 8:55 PM IST

5 Min Read
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बूंदी: जिले के घने जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा पर गंभीर संकट मंडरा रहा है. खासकर पैंथर जैसे संरक्षित वन्यजीव शिकारियों के क्रूर फंदों का शिकार बन रहे हैं. शिकारियों की बढ़ती सक्रियता, जंगलों में कमजोर गश्त और सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण इस हाल ही में तीन बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं. ये घटनाएं न केवल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही हैं, बल्कि राज्य की समृद्ध जैव विविधता के लिए भी बड़ा खतरा बन रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए गए तो ऐसे हादसे और बढ़ सकते हैं.

केसरपुरा गांव में फंदे में फंसा पैंथर: साल के अंतिम दिनों में एक और घटना ने वन विभाग को हिला कर रख दिया. शुक्रवार को खटकड़ क्षेत्र के केसरपुरा गांव के पास खेत की बाड़ में लगे मजबूत तार के फंदे में करीब ढाई साल का एक युवा पैंथर बुरी तरह फंस गया. पैंथर निकलने की कोशिश में खुद को और घायल कर रहा था. गांव के ग्रामीणों ने सुबह खेतों में काम करने के दौरान उसे देखा और फौरन वन विभाग को सूचना दी.

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वन मंडल बूंदी के एसीएफ सुनील धाबाई के निर्देशन में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ. रेंजर बलराम गोचर, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के रेंजर सुमित कनोजिया, खटकड़ नाकेदार हेमराज सहित पूरी टीम मौके पर पहुंची. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रणथंभौर टाइगर रिजर्व से विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम को भी बुलाया गया. टीम ने पूरी सतर्कता बरतते हुए फंदा काटा और काफी प्रयासों के बाद पैंथर को सुरक्षित बाहर निकाला. घायल पैंथर को उपचार के लिए कोटा चिड़ियाघर भेजा गया. एसीएफ धाबाई ने बताया कि यदि समय पर रेस्क्यू नहीं होता तो पैंथर की जान जाना तय था.

पहली घटना, 4 मार्च 2025, नैनवा वन क्षेत्र: इस वर्ष की शुरुआत में ही पहली बड़ी घटना 4 मार्च को नैनवा वन खंड के ज्वार इलाके में हुई. सरसों की फसल काटने खेतों की ओर जा रहे स्थानीय ग्रामीणों की नजर एक युवा पैंथर पर पड़ी, जो लोहे की मजबूत जंजीर और अन्य सामग्री से बने फंदे में बुरी तरह उलझा हुआ था. पैंथर दर्द से कराह रहा था और संघर्ष करने की कोशिश कर रहा था. ग्रामीणों ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए तुरंत वन विभाग को सूचना दी.

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सूचना मिलते ही नैनवां रेंजर कविता जाट के नेतृत्व में ज्जावर नाका प्रभारी भंवर सिंह शेखावत, फूलेता नाका प्रभारी रामराय यादव सहित पूरी टीम मौके पर पहुंच गई. टीम ने पहले पैंथर की गतिविधियों पर करीब से नजर रखी ताकि रेस्क्यू सुरक्षित हो सके. इसके बाद रणथंभौर टाइगर रिजर्व की विशेषज्ञ टीम की मदद से सफल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. काफी मशक्कत के बाद पैंथर को फंदे से आजाद कर सुरक्षित निकाला गया और उसे रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में उपचार के बाद छोड़ा गया. इस घटना ने क्षेत्र में शिकारियों की मौजूदगी को उजागर किया था.

दूसरी घटना- 15 दिसंबर 2025, हिंडोली वन क्षेत्र: पहली घटना के नौ महीने बाद ही 15 दिसंबर को हिंडोली वन क्षेत्र में दूसरी दिल दहला देने वाली घटना हुई. यहां भी शिकारियों द्वारा लगाए गए घातक फंदे में एक युवा नर पैंथर फंस गया. पैंथर शिकार की तलाश में जंगल से निकला और अनजाने में फंदे में उलझ गया. स्थानीय लोगों की सूचना पर वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची.

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टीम ने सावधानीपूर्वक ऑपरेशन चलाकर पैंथर को फंदे से मुक्त किया. घायल होने के कारण पैंथर को तत्काल उपचार के लिए कोटा भेजा गया. इस घटना में वन विभाग ने अज्ञात शिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू की. हालांकि, शिकारियों का पता लगाने में अभी तक सफलता नहीं मिली है, जिससे क्षेत्र में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है.

लगातार घटनाओं से बढ़ी चिंता और आगे की चुनौतियां: महज एक साल में तीन घटनाएं यह साफ संकेत दे रही हैं कि शिकारी पूरी तरह बेखौफ हो चुके हैं. वे जंगलों के अंदर और खेतों की बाड़ों में खुलेआम मौत के जाल बिछा रहे हैं. वन्यजीव प्रेमी, पर्यावरण विशेषज्ञ और स्थानीय लोग लगातार मांग कर रहे हैं कि जंगलों में नियमित गश्त बढ़ाई जाए, नाके मजबूत किए जाएं और खुफिया तंत्र को सक्रिय किया जाए. पैंथर भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति है और इसका शिकार गंभीर अपराध है.

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