बीकानेर में संविंदा नर्सिंग कर्मियों ने खून से लिखी अपील, पुरानी भर्ती प्रक्रिया बहाल करने की मांग
फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल कर्मियों ने पुरानी भर्ती प्रक्रिया बहाल करने की मांग को लेकर अपने खून से पोस्टकार्ड लिखकर मुख्यमंत्री व चिकित्सा मंत्री को भेजे.

Published : January 1, 2026 at 8:23 PM IST
बीकानेर: नए साल के पहले दिन 1 जनवरी 2026 को राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन (एकीकृत) बीकानेर के बैनर तले सैकड़ों नर्सिंग ऑफिसर, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल स्टाफ ने गांधी पार्क में जोरदार प्रदर्शन किया. संविदा कर्मियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री और चिकित्सा मंत्री के नाम पोस्टकार्ड अपने खून से लिखकर भेजे.
यह अभियान नई नर्सिंग, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल भर्ती को पुराने तरीके से मेरिट और संविदा अनुभव पर बोनस अंकों के आधार पर कराने की मुख्य मांग को लेकर शुरू किया गया. राजस्थान में हाल ही में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और अन्य विभागों के तहत हजारों संविदा पदों पर भर्ती की अधिसूचना जारी हुई है, जिसमें मुख्य रूप से लिखित परीक्षा के आधार पर चयन की बात कही गई है. इससे लंबे समय से कम वेतन पर काम कर रहे संविदा कर्मियों में असंतोष है.
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खून से लिखी अपील: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 2013 और 2018 की भर्तियों में मेरिट के साथ-साथ संविदा अनुभव पर बोनस अंक दिए जाते थे, जिससे वर्षों से सेवा दे रहे कर्मियों को स्थायी होने का मौका मिलता था, अब लिखित परीक्षा आधारित नई प्रक्रिया से उन्हें नुकसान होगा, क्योंकि कई वर्षों से फील्ड वर्क में व्यस्त रहने के कारण पढ़ाई से दूरी हो गई है और परीक्षा में अच्छे अंक लाना मुश्किल होगा.
संविदा कर्मी की पुकार: संविदा नर्सिंग कर्मचारी उवेश भाटी ने कहा, "हमने पहले भी कई बार मांगें रखीं, धरना-प्रदर्शन किए, लेकिन सरकार ने सुनवाई नहीं की, इसलिए अब खून से पोस्टकार्ड लिखकर अपनी पीड़ा पहुंचा रहे हैं. पुरानी प्रक्रिया बहाल हो तो सालों से संविदा पर काम कर रहे हजारों कर्मियों को प्राथमिकता और न्याय मिलेगा. नए तरीके से यह उनके साथ सरासर अन्याय है. हम महज 18-20 हजार रुपये मासिक पर कोविड काल से लेकर अब तक दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन स्थायी होने का मौका नहीं मिल रहा." भाटी ने बताया कि राजस्थान भर में 10 हजार से अधिक संविदा नर्सिंग और पैरामेडिकल कर्मी इस मांग से जुड़े हैं.
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आंदोलन की चेतावनी: उवेश भाटी ने सख्त चेतावनी दी कि यदि जल्द मांगें नहीं मानी गईं तो पूरे राजस्थान के 10 हजार से ज्यादा संविदा पैरामेडिकल और नर्सिंग कर्मचारी जयपुर की सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे. इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी. राजस्थान सरकार ने हाल के वर्षों में कई भर्तियों में लिखित परीक्षा को अनिवार्य बनाया है ताकि पारदर्शिता बढ़े, लेकिन संविदा कर्मियों का तर्क है कि उनके अनुभव को नजरअंदाज करना गलत है.
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