कबाड़ से जन्मी अनोखी मूर्तियां: नितिन मेहता ने जादूई कला से सजाए अलवर के पार्क, दिया स्वच्छता का संदेश
अलवर में नितिन मेहता की टीम कबाड़ से टाइगर, ऊंट, मयूर जैसी आकर्षक कलाकृतियां बना रही है, जो शहर के कई स्थानों पर लगेंगी.

Published : January 7, 2026 at 8:31 PM IST
अलवर: कल तक बेकार पड़ा कबाड़, आज अलवर की शान बन चुका है. टूटे डस्टबिन, पुराने स्क्रैप और बेकार पुर्जों से जन्मी विशाल टाइगर, मयूर और ऊंट की कलाकृतियां अब शहरवासियों को स्वच्छ भारत का संदेश दे रही हैं. यह अनोखा कार्य दिल्ली निवासी प्रसिद्ध कलाकार नितिन मेहता और उनकी टीम की ओर से किया जा रहा है, जिनकी कला को देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी खूब सराहना मिली है. नितिन मेहता की यह जादूई कला न केवल कचरे को कला में बदल रही है, बल्कि पर्यावरण को भी नई जिंदगी दे रही है.
रॉक गार्डन से मिली प्रेरणा: नितिन मेहता की इस कला की प्रेरणा चंडीगढ़ के प्रसिद्ध रॉक गार्डन से मिली. बचपन से ही रॉक गार्डन को देखते आए नितिन बताते हैं कि टूटे बर्तनों, टाइल्स, शीशों और कबाड़ से बनी उन संरचनाओं ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया कि जो वस्तुएं बेकार समझकर फेंक दी जाती हैं, वे भी एक शक्तिशाली संदेश का माध्यम बन सकती हैं. इसी प्रेरणा से उनका सफर शुरू हुआ. वर्ष 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले उन्होंने तत्कालीन दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से अपने विचार साझा किए, हालांकि समय की कमी के कारण वह योजना तब अमल में नहीं आ सकी, लेकिन नितिन ने हार नहीं मानी और प्रयास जारी रखे.
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दिल्ली से शुरू हुआ सफल सफर: नितिन मेहता ने बताया कि इस मेहनत का नतीजा सामने आया वर्ष 2016 में, जब दिल्ली में 'वेस्ट टू वंडर पार्क' का निर्माण हुआ. इस पार्क में कबाड़ से दुनिया के सात अजूबों की विशाल प्रतिकृतियां बनाई गईं, जो पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हुईं. पार्क ने दिल्ली नगर निगम को टिकट बिक्री से एक साल में ही करोड़ों रुपये की आय दिलाई. इस सफलता के बाद नितिन मेहता की टीम ने दिल्ली में ही कई अन्य प्रोजेक्ट पूरे किए और फिर देश के विभिन्न शहरों की ओर रुख किया.

देश-विदेश में फैला काम: नितिन और उनकी टीम ने उज्जैन, गुरुग्राम, ग्वालियर, जोधपुर, जयपुर और अब अलवर सहित कई शहरों में कबाड़ से अद्भुत कलाकृतियां तैयार की हैं. उन्होंने बताया कि भारत के अलावा बेल्जियम, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी उनके कार्य को जगह मिली है. नितिन बताते हैं कि जहां भी वे जाते हैं, वहां नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों से अपने विजन को साझा करते हैं और स्थानीय विशेषताओं को ध्यान में रखकर कलाकृतियां बनाते हैं.
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कबाड़ को मिल रहा नया जीवन: नितिन ने बताया कि हर जगह भारी मात्रा में पड़ा कबाड़ जगह घेरता है, गंदगी फैलाता है और कोई लाभ नहीं देता. उनकी टीम इसी कबाड़ को नया जीवन देती है. पुराने डस्टबिन, स्क्रैप वाहन, स्क्रू, मशीनों के पुर्जों और अन्य वेस्ट सामग्री से वे वन्यजीवों, ऐतिहासिक इमारतों और स्थानीय प्रतीकों की कलाकृतियां तैयार करते हैं. उनका उद्देश्य स्पष्ट है, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना. पहले जहां कबाड़ को केवल कचरा समझा जाता था, अब ये कलाकृतियां मूर्तियों की तरह पूजी जा रही हैं और लोगों को प्रेरित कर रही हैं.

अलवर में तैयार हो रही खास कलाकृतियां: अलवर में चल रहे प्रोजेक्ट की बात करें तो यहां टीम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत कई शानदार कलाकृतियां तैयार की हैं. इनमें टाइगर, भारत का नक्शा, ऊंट, सांभर, मयूर, योगा करती महिला और नटराज की विशाल प्रतिमाएं शामिल हैं. ये कलाकृतियां शहर के विभिन्न पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित की जा रही हैं. बड़ी कलाकृतियों को क्रेन की मदद से जगह पर लगाया जाता है.
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शहर में लगाई गई कलाकृतियां: टीम के साथी अनुराग पांडे ने बताया कि अलवर में लोगों को स्वच्छता का संदेश देने के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत बेहतरीन कलाकृतियां तैयार की जा रही हैं. उन्होंने बताया कि उनकी टीम में ट्रेंड कलाकार है, जो किसी भी तरह की कलाकृति को तैयार कर सकते हैं. अनुराग ने बताया कि अलवर में जिला प्रशासन व अधिकारियों से मिलकर जिन कलाकृतियां पर बातचीत की गई, उनमें से कई कलाकृतियां को तैयार कर लगाया जा चुका है.

स्वच्छ भारत की जीवंत मिसाल: नितिन मेहता की यह पहल न केवल कला का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि स्वच्छ भारत अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का एक जीवंत माध्यम भी बन रही है. अलवरवासी इन कलाकृतियों को देखकर गर्व महसूस कर रहे हैं और स्वच्छता के प्रति जागरूक हो रहे हैं. ऐसे नवाचारों से ही हमारा देश सचमुच स्वच्छ और सुंदर बनेगा.
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