कॉमनवेल्थ में बेटियों के गोल्ड मेडल का असर, Gen Z गर्ल्स की चॉइस बनी बॉक्सिंग
वाराणसी के सिगरा स्टेडियम में भी कॉमनवेल्थ गेम में जीत का असर दिख रहा है. जहां लड़कियां अब बॉक्सिंग के गुण सीख रही हैं.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 1, 2026 at 2:23 PM IST
वाराणसी : कॉमनवेल्थ गेम में इस बार भारत की बेटियों ने मेडल की झड़ी लगा दी. जी हां, बॉक्सिंग में जिस तरीके से बेटियों का प्रदर्शन रहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी सराहना की और उनका मुंह मीठा कराया. यही नहीं, बाकायदा उन्होंने खिलाड़ियों के साथ संवाद भी किया.
इस गोल्ड मेडल और प्रधानमंत्री के सराहना का असर उनके संसदीय क्षेत्र में दिख रहा है, जहां अब बेटियां बॉक्सिंग में तेजी से रुचि ले रही हैं, जहां लड़कियों के मन में ब्यूटी थॉट को लेकर के बॉक्सिंग दूरी होती जा रही थी, तो वहीं इस मेडल के बाद अब उनकी मानसिकता बदल रही है वो एडमिशन ले रही हैं.
इस बार कॉमनवेल्थ गेम में भारत की बेटियों ने 6 से ज्यादा गोल्ड मेडल जीते हैं. इसने बॉक्सिंग को एक नई उम्मीद दे दी है. इस नई उम्मीद का परिणाम पूर्वांचल में नज़र आ रहा है, जहां वाराणसी में बेटियां आ करके बॉक्सिंग को सीख रही है.


पहले जहां बॉक्सिंग में लड़कियों की रुचि कम थी तो, वहीं अब रुचि भी बढ़ी है और वह जाकर के अपने घर वालों के साथ अपना दाखिला भी करा रही हैं. इसकी एक तस्वीर वाराणसी के सिगरा स्टेडियम में भी नज़र आ रही है, जहां लड़कियां अब बॉक्सिंग का गुण सीख रही है.

इस बारे में यदि बॉक्सिंग सीखने वाली लड़कियों की मानें, तो उनका कहना है कि कॉमनवेल्थ गेम में जिस तरीके से उन्होंने लड़कियों को बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देखा है, इससे उनका मनोबल और बढ़ा है.

कॉमनवेल्थ के मेडल ने दिया नया ज़़ुनून
बॉक्सिंग खिलाड़ी कहती हैं कि, बॉक्सिंग को हम लड़कियों से हमेशा दूर रखा जाता रहा है. घर वाले भी परमिशन नहीं देते, लेकिन जब से घर वालों ने भी देखा है कि कॉमनवेल्थ गेम में बॉक्सिंग से देश का नाम रोशन हुआ है, तब से वह भी हमें खेल में आगे बढ़ाने के लिए पुश कर रहे हैं.

हमें इस बात की भी खुशी है कि प्रधानमंत्री ने भी उसको लेकर कितना सपोर्ट दिखाया है. हम भी अब उनके जैसे बनना चाहते हैं और देश के लिए मेडल लाना चाहते हैं. वो कहती हैं कि, बॉक्सिंग का गेम आसान नहीं है, इसमें सबसे ज्यादा दिक्कत फेस के लिए होती है और यही वजह है कि लोग इसमें आने नहीं देते, मगर अब हम खेलेंगे.

खिलाड़ी बताती हैं कि, उनके साथ भी अब नई लड़कियां जुड़ रही हैं उनसे बॉक्सिंग के बारे में क्वेरी कर रही हैं.
100 से ज्यादा बच्चियां बॉक्सिंग में बना रहीं भविष्य

बॉक्सिंग एसोसिएशन से जुड़ी पदाधिकारी नीलू मिश्रा ने बताया कि, जब कॉमनवेल्थ गेम चल रहा था तब बच्चियों रात भर जग करके मैच को देख रही थी और हमारे यहां आधा दर्जन गोल्ड मेडल आए है. इससे लड़कियों में एक अलग जुनून आया है, क्योंकि बॉक्सिंग में ब्यूटी की वजह से वह नहीं आना चाहती थी, क्योंकि उनको लगता था कि इसमें आने से उनकी ब्यूटी उनका फेस खराब होगा और स्कूल भी बच्चियों को इसमें आगे नहीं भेजते थे.

उनको लगता था की बच्चियों का फेस खराब हो जाएगा लेकिन अब बदलाव की तस्वीर दिख रही है.अब स्कूलों से और बच्चियों क्वेरी कर रही हैं. जूनियर सेक्शन में बहुत सारी ट्रेनिंग सेंटर एकेडमी है और इसमें लड़कों के बराबर लड़कियां ट्रेनिंग शुरू कर दी है. यह बदलाव दिख रहा है उन्होंने बताया कि 100 से ज्यादा बच्चियों प्रैक्टिस कर रही हैं और बहुत सारे स्कूल व अन्य जगह बच्चियों भी बॉक्सिंग की प्रैक्टिस कर रही हैं. पहले यह संख्या 20 तक ही सीमित हो जाता था.

