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IMD ने मानसून की राजस्थान में एंट्री को लेकर दिया अपडेट, 13 साल में तीसरी बार होगी इतनी देरी

मौसम विभाग का कहना है कि जून के अंतिम दिनों और जुलाई के पहले सप्ताह में बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है.

Meteorological Centre, Jaipur
मौसम भवन, जयपुर (ETV Bharat File Photo)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : June 25, 2026 at 1:45 PM IST

7 Min Read
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जयपुर: राजस्थान में मानसून का इंतजार लंबा होता जा रहा है. सामान्य तौर पर प्रदेश में मानसून 25 जून तक प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी रहने से मानसून जुलाई के पहले सप्ताह में दस्तक दे सकता है. पिछले 13 सालों में यह तीसरा मौका होगा, जब मानसून एक सप्ताह या उससे अधिक की देरी से राजस्थान पहुंचेगा. हालांकि मौसम विभाग के जयपुर केंद्र का मानना है कि मानसून के देर से आने का मतलब कम बारिश नहीं होता. उल्टा, पिछले वर्षों का रिकॉर्ड बताता है कि जब भी मानसून देर से आया, प्रदेश में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई.

इधर मानसून के आगे बढ़ने के साथ ही राजस्थान में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं. मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में आंधी, बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है. कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट घोषित किया गया है. मौसम विभाग का कहना है कि जून के अंतिम दिनों और जुलाई के पहले सप्ताह में बारिश की गतिविधियों में और तेजी आने की संभावना है.

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मानसून की राह में अनुकूल परिस्थितियां: मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार मानसून वर्तमान में पूर्वी और मध्य भारत के हिस्सों में सक्रिय हो रहा है और इसके राजस्थान की ओर बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. उन्होंने बताया कि जून के अंत और जुलाई के पहले हफ्ते में राज्य में बारिश से जुड़ी गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है. राधेश्याम शर्मा के अनुसार, पहले से ही अनुमान था कि मानसून की रफ्तार इस बार कमजोर रह सकती है. केरल में भी मानसून सामान्य से देरी से पहुंचा था. लेकिन अब इसके आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं और संभावना है कि जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून राजस्थान में दाखिल हो जाएगा.

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देर से आया मानसून, फिर भी हुई रिकॉर्ड बारिश: राजस्थान में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 25 जून मानी जाती है. लेकिन पिछले 10 साल के आंकड़े बताते हैं कि मानसून के कुछ दिन देर से आने के बावजूद बारिश औसत से अधिक रही है. साल 2014 में मानसून जुलाई में पहुंचा और पूरे सीजन में 518.6 मिमी वर्षा दर्ज हुई. वहीं 2019 में 2 जुलाई को मानसून के प्रवेश के बाद राज्य में रिकॉर्ड 747.24 मिमी बारिश हुई. इसी तरह 2016, 2017, 2018 और 2022 में भी मानसून 25 जून के बाद पहुंचा और इन सालों में भी सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई. राजस्थान में मानसून सीजन के दौरान सामान्य वर्षा 424.71 मिमी मानी जाती है, लेकिन अधिकांश वर्षों में यह आंकड़ा काफी ऊपर रहा है. साल 2024 में मानसून समय पर पहुंचने के बाद राज्य में 662.87 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि राजधानी जयपुर में रिकॉर्ड 1032.33 मिमी वर्षा हुई थी. वर्ष 2025 में भी 680.13 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई.

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25 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट: मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए राजस्थान के कई जिलों में आंधी, गरज-चमक और बारिश का अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग की ओर से जारी ऑरेंज अलर्ट के तहत जैसलमेर, फलोदी, नागौर, डीडवाना-कुचामन, सीकर, जयपुर, उदयपुर, सलूम्बर, डूंगरपुर, कोटपूतली-बहरोड़, अलवर और दौसा जिलों में कहीं-कहीं तेज बारिश, मेघगर्जन और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है.

वहीं येलो अलर्ट के तहत बीकानेर, जोधपुर, बालोतरा, बाड़मेर, ब्यावर, अजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर, करौली, डीग, खैरथल-तिजारा, झुंझुनूं, चूरू, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, कोटा, बूंदी, बारां, भीलवाड़ा और राजसमंद समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. मौसम विभाग ने लोगों से आंधी और बिजली गिरने के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा अनावश्यक रूप से खुले क्षेत्रों में नहीं जाने की अपील की है.

प्री-मानसून बारिश से मौसम में बदलाव: राजस्थान के कई हिस्सों में प्री-मानसून बारिश का असर दिखाई देने लगा है. जयपुर, भरतपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर और उदयपुर संभाग के जिलों में बादल छाने और हल्की बारिश होने से तापमान में गिरावट आई है. हालांकि उमस का असर अब भी बना हुआ है. बुधवार को भरतपुर, जयपुर, नागौर, सीकर और श्रीगंगानगर के कुछ इलाकों में एक इंच या उससे अधिक बारिश दर्ज की गई. इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है और किसानों में भी मानसून को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं.

बीते 24 घंटे के बीच बारिश का रिकॉर्ड: राजस्थान में प्री-मानसून गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं और पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई. सबसे अधिक 56 मिमी वर्षा चूरू जिले के सरदारशहर में रिकॉर्ड की गई. इसके बाद डीडवाना के लाडनूं में 47 मिमी, झालावाड़ के सुनेल में 45 मिमी और चित्तौड़गढ़ के गंगरार में 41 मिमी बारिश हुई. डीग जिले के कामां में 40 मिमी तथा हनुमानगढ़ के डबली राठान में 36 मिमी वर्षा दर्ज की गई. वहीं चित्तौड़गढ़ के गम्भीरी बांध और चूरू के रतनगढ़ में 35-35 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई. सलूम्बर में 33.8 मिमी वर्षा हुई, जबकि चित्तौड़गढ़ के बस्सी, राजसमंद के गिलूण्ड और श्रीगंगानगर के लालगढ़ में 26-26 मिमी बारिश दर्ज की गई. इसके अलावा चूरू के सुजानगढ़ और जयपुर के चौमूं में 25-25 मिमी वर्षा हुई. आज सुबह नागौर, डीडवाना कुचामन और जोधपुर जिले के कुछ हिस्सों में जमकर मेघ बरसे.

  1. सरदारशहर (चूरू) – 56.0 mm
  2. लाडनूं (डीडवाना) – 47.0 mm
  3. सुनेल (झालावाड़) – 45.0 mm
  4. गंगरार (चित्तौड़गढ़) – 41.0 mm
  5. कामां (डीग) – 40.0 mm
  6. डबली राठान (हनुमानगढ़) – 36.0 mm
  7. गम्भीरी बांध (चित्तौड़गढ़) – 35.0 , रतनगढ़ (चूरू) – 35.0 mm
  8. सलूम्बर (सलूम्बर) – 33.8 mm
  9. बस्सी (चित्तौड़गढ़) – 26.0 mm, गिलूण्ड (राजसमंद) – 26.0 mm, लालगढ़ (श्रीगंगानगर) – 26.0 mm
  10. सुजानगढ़ (चूरू) – 25.0 mm, चौमूं (जयपुर) – 25.0 mm

पश्चिमी राजस्थान में गर्मी बरकरार: बारिश की गतिविधियों के बावजूद पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में गर्मी का असर अभी भी बना हुआ है. श्रीगंगानगर प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. फलौदी में तापमान 42 डिग्री, जबकि बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर में 40.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. राजधानी जयपुर में अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य के आसपास रहा. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के प्रवेश के साथ ही तापमान में और गिरावट आएगी और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दायरा बढ़ेगा.

किसानों और आमजन की नजरें मानसून पर: प्रदेश में खरीफ फसलों की बुवाई का समय नजदीक है. ऐसे में किसानों की नजरें मानसून की एंट्री पर टिकी हुई हैं. अच्छी प्री-मानसून बारिश ने कई क्षेत्रों में उम्मीद जगाई है, लेकिन व्यापक स्तर पर खेती की गतिविधियां मानसून की नियमित बारिश पर ही निर्भर रहेंगी. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक अगर जुलाई, अगस्त और सितंबर के दौरान मानसून सक्रिय बना रहता है, तो इस बार भी राजस्थान में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की जा सकती है. ऐसे में भले ही मानसून की एंट्री कुछ दिन देर से हो, लेकिन बारिश के लिहाज से यह सीजन प्रदेश के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.