खनन पर सख्ती के बाद लवन थाना प्रभारी का तबादला, बलौदाबाजार जिले में फिर गरमाया अवैध रेत उत्खनन का मुद्दा
लवन थाना प्रभारी और इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार सिंह ने हाल ही में ओवरलोड रेत परिवहन कर रही हाइवा और ट्रैक्टरों के खिलाफ अभियान चलाया था.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 17, 2026 at 12:43 PM IST
बलौदाबाजार: जिले में अवैध रेत खनन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. लवन थाना प्रभारी रहे निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह का तबादला आदेश जारी होते ही प्रशासनिक हलकों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. यह तबादला ऐसे समय हुआ है, जब बताया जा रहा है कि उन्होंने अवैध और ओवरलोड रेत परिवहन के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की थी.
कार्यालय पुलिस अधीक्षक, बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा 16 फरवरी 2026 को जारी आदेश क्रमांक /स्थापना/1026/2026 के तहत तीन निरीक्षकों के तबादले किए गए हैं. आदेश में इसे प्रशासनिक दृष्टिकोण से लिया गया निर्णय बताया गया है. हालांकि, जिस समय यह आदेश जारी हुआ और जिस संदर्भ में इसे देखा जा रहा है, उसने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है.
तबादला आदेश में क्या है
जारी आदेश के अनुसार निरीक्षक शशांक सिंह ठाकुर को सुहेला से हटाकर प्रभारी थाना लवन पदस्थ किया गया है. निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह को लवन से प्रभारी थाना राजदेवरी भेजा गया है. वहीं निरीक्षक धीरेंद्र नाथ दुबे को राजदेवरी से प्रभारी थाना सुहेला पदस्थ किया गया है.सामान्य प्रशासनिक फेरबदल के रूप में देखे जाने वाले इस आदेश ने अचानक इसलिए ध्यान खींचा क्योंकि इसके ठीक पहले लवन क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आई थीं.
थाना लवन में सूचना मिली थी कुछ लोग रेत निकाल रहे हैं. थाना प्रभारी ने रेड कार्रवाई की, मौके पर कुछ हाइवा और ट्रैक्टर मिले हैं. कुछ में रेत भरी है कुछ खाली है. सभी गाड़ियों को थाना लाया गया है. आगे विधिवत कार्रवाई की जाएगी -अभिषेक सिंह अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक
अवैध रेत परिवहन पर कार्रवाई की चर्चा
जानकारी के अनुसार निरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह ने हाल ही में ओवरलोड रेत परिवहन कर रही हाइवा और ट्रैक्टरों के खिलाफ अभियान चलाया था.बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई महानदी क्षेत्र से अवैध उत्खनन कर लाई जा रही रेत पर की गई थी. हालांकि पुलिस विभाग की ओर से इस कार्रवाई का विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है. यही वह बिंदु है, जिसने तबादले को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. लोगों का कहना है कि यदि कार्रवाई प्रभावी थी और अवैध खनन के खिलाफ सख्ती दिखाई जा रही थी, तो अचानक तबादले की जरूरत क्यों पड़ी.

खनन माफिया और संरक्षण के आरोप
बलौदाबाजार जिला लंबे समय से महानदी से हो रहे अवैध रेत उत्खनन को लेकर सुर्खियों में रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर रेत का उत्खनन और परिवहन होता है. कई बार ओवरलोड वाहनों से सड़कें भी क्षतिग्रस्त होती हैं, लेकिन कार्रवाई सीमित ही नजर आती है.

पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई और उसके बाद अधिकारियों के तबादले की चर्चा हुई हो. इससे पहले कांग्रेस शासनकाल में तहसीलदार नीलमणि दुबे द्वारा की गई कार्रवाई के बाद भी उनके हटाए जाने की चर्चा जोर पकड़ चुकी थी. अब वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भी इसी तरह की परिस्थिति सामने आने से राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है.
महानदी और रेत का खेल
महानदी क्षेत्र में रेत का अवैध उत्खनन केवल राजस्व का मामला नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़ा मुद्दा है. अनियंत्रित खनन से नदी की धारा प्रभावित होती है, जलस्तर पर असर पड़ता है और आसपास के गांवों में कटाव की समस्या बढ़ती है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर भारी मशीनों से रातभर उत्खनन किया जाता है. इससे न केवल पर्यावरणीय नुकसान होता है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका पर भी असर पड़ता है. इस कारण अवैध खनन का मुद्दा केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक आयाम भी रखता है.


