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नेतरहाट के प्राकृतिक स्थल को लगी जमीन माफियाओं की नजर, हो रहा जमीन का अतिक्रमण!

नेतरहाट की खूबसूरत और प्राकृतिक स्थल के आसपास आदिवासियों की जमीन पर धड़ल्ले से होटल और रिजॉर्ट बनाए जा रहे हैं.

Illegal construction by land mafia damaging natural environment of Netarhat in Latehar
नेतरहाट में प्राकृतिक स्थल के आसपास अवैध निर्माण (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : December 22, 2025 at 8:37 PM IST

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लातेहारः अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और सुहाने मौसम को लेकर विख्यात नेतरहाट को अब जमीन माफियाओं की नजर लगती जा रही है.

इको सेंसेटिव जोन के नियमों को दरकिनार कर यहां धड़ल्ले से बिना परमिशन ही होटल और रिजॉर्ट का निर्माण किए जाने से जहां नेतरहाट की प्राकृतिक खूबसूरती नष्ट हो रही है. वहीं यहां का वातावरण भी अब बदलने लगा है. हालांकि मामला संज्ञान में आने के बाद लातेहार जिला प्रशासन इसे गंभीरता से लिया है. साथ ही नेतरहाट में निर्माणधीन होटल और रिजॉर्ट का सर्वे कर रही है.

दरअसल समुद्र तल से लगभग 3700 फीट की ऊंचाई पर बसा नेतरहाट अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए न सिर्फ झारखंड में बल्कि आसपास के दूसरे राज्यों के पर्यटकों की भी पहली पसंद है. हालांकि पिछले 10 से 12 वर्षों के अंतराल में नेतरहाट की प्राकृतिक सौंदर्यता पर जमीन माफियाओं की ऐसी नजर लगी कि नेतरहाट की नैसर्गिक सौंदर्यता पर ही खतरा उत्पन्न होने लगा है.

Illegal construction by land mafia damaging natural environment of Netarhat in Latehar
नेतरहाट के प्राकृतिक स्थल पर अवैध निर्माण! (ETV Bharat)

कहने के लिए तो नेतरहाट में अधिकांश जमीन वन भूमि और आदिवासियों की जमीन है. परंतु बाहर से आए कई लोगों के द्वारा यहां होटल का निर्माण धड़ल्ले से किया जा रहा है. आदिवासियों की जमीन को एग्रीमेंट के नाम पर फर्जी तरीके से खरीद बिक्री कर उसमें होटल का निर्माण भी किया गया, अभी भी होटल यहां निर्माणधीन है. हालांकि जमीन माफियाओं तथा बड़े लोगों का यहां ऐसी दबंग गई है कि आदिवासी समाज के लोग इनके खिलाफ खुलकर मुखर भी नहीं हो पा रहे हैं.

सीएनटी का खुल्लम-खुल्ला हो रहा है उल्लंघन!

यहां सबसे गंभीर बात यह है कि नेतरहाट में आदिवासी समाज के जमीन को समझौते के जरिए कब्जा किए जाने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है. एग्रीमेंट, निजी समझौता और कई बार दबाव देखकर अनुबंध कराकर बाहरी निवेशकों के द्वारा आदिवासियों की जमीन को अधिग्रहित कर उसपर कब्जा जमाया जा रहा है. जबकि सीएनटी एक्ट के अनुसार आदिवासियों की जमीन को किसी भी सूरत में गैर आदिवासियों को हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है. इस नियम का खुलेआम उल्लंघन करते हुए आदिवासियों की जमीन पर कब्जा जमाया जा रहा है.

Illegal construction by land mafia damaging natural environment of Netarhat in Latehar
नेतरहाट के प्राकृतिक स्थल पर अतिक्रमण! (ETV Bharat)

पलामू टाइगर का बफर एरिया होने के बावजूद बन रहे हैं बिल्डिंग और रिजॉर्ट

यहां एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि नेतरहाट तथा आसपास का बड़ा इलाका पलामू टाइगर रिजर्व बफर एरिया के अंतर्गत आता है. इको सेंसेटिव जोन वाले क्षेत्रों के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2019 में एक गजट अधिसूचना जारी कर घोषणा किया है कि इस प्रकार के क्षेत्र में किसी भी तरह के नए वाणिज्यिक निर्माण प्रतिबंधित होंगे. लेकिन नेतरहाट में सरकार के बजट और पर्यावरणीय सुरक्षा दोनों की अनदेखी हो रही है. नेतरहाट का हृदय स्थली कहे जाने वाले सनसेट प्वाइंट तथा कोयल व्यू प्वाइंट के आसपास भी कई होटल और रिजॉर्ट बनाए जा रहे हैं.

नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के दिशा निर्देशों का भी हो रहा है उल्लंघन

बता दें कि नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी द्वारा जारी दिशा निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि टाइगर रिजर्व के कोर और बफर जोन में नए अस्थायी होटल रिसोर्ट अथवा बड़े पर्यटन ढांचे की अनुमति नहीं है. टाइगर लैंडस्केप और वन्य जीव गलियारे में बाउंड्री वॉल या अस्थायी रोधी प्रतिबंधित है. पर्यटन गतिविधियां केवल को इंपैक्ट कम्युनिटी बेस्ड इको टूरिज्म तक ही सीमित होनी चाहिए. किसी भी प्रकार के निर्माण के लिए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी से सबसे पहले अनुमति लेना होगा. इस नियम का भी यहां उल्लंघन होता दिख रहा है.

Illegal construction by land mafia damaging natural environment of Netarhat in Latehar
प्राकृतिक स्थल पर अवैध निर्माण! (ETV Bharat)

जिला प्रशासन गंभीर, होटल और नए निर्माण का हो रहा है सर्वे

हालांकि मामला संज्ञान में आने के बाद लातेहार जिला प्रशासन इसे गंभीरता से लिया है. एसडीएम विपिन कुमार दुबे के नेतृत्व में एक टीम गठित कर नेतरहाट में स्थित होटल, नए रूप से हो रहे कंस्ट्रक्शन, जमीनों के बाउंड्री वॉल इत्यादि का सर्वे किया जा रहा है. इधर इस संबंध में एसडीएम विपिन कुमार दुबे ने बताया कि सरकारी प्रावधानों का पालन सभी को करना होगा. आदिवासियों के जमीन पर किसी भी प्रकार से अवैध कब्जा नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रशासन की टीम सर्वे का काम कर रही है.

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