IIT Jodhpur ने नवाचार में रचा नया कीर्तिमान, वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 86 आईपीआर दाखिल
अब तक के सर्वाधिक वार्षिक आईपीआर दाखिले संस्थान की बढ़ती शोध क्षमता, राष्ट्रीय प्रासंगिकता और नवाचार-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाते हैं.

Published : January 1, 2026 at 6:03 PM IST
जोधपुर: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर ने अपने यहां लगातार हो रहे नवाचार के चलते महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए कैलेंडर वर्ष 2025 के दौरान कुल 86 बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) दाखिल किए हैं. यह संस्थान की स्थापना के बाद किसी एक वर्ष में अब तक का सर्वाधिक आईपीआर दाखिला है, जो आईआईटी जोधपुर को शोध-आधारित नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास के एक सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित करता है.
वर्ष 2025 में दाखिल इन आईपीआर में 77 पेटेंट आवेदन, 5 डिजाइन पंजीकरण और 4 कॉपीराइट शामिल हैं, जो उभरते एवं बहुविषयक क्षेत्रों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करते हैं. आईपीआर दाखिलों में यह निरंतर वृद्धि, संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के बीच बौद्धिक संपदा संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता और सक्रिय सहभागिता को दर्शाती है.
पेटेंट आवेदन उन्नत अभियांत्रिकी समाधान, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियाँ, सामग्री एवं विनिर्माण प्रक्रियाएं, ऊर्जा प्रणालियां और डिजिटल नवाचारों जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं.
इनमें से कई आविष्कार वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान पर केंद्रित हैं, जिनमें किफायतीपन, सततता और विस्तारयोग्यता पर विशेष बल दिया गया है, जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप है. यह उपलब्धि भारत के शोध एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में आईआईटी जोधपुर की सुदृढ़ होती भूमिका को और मजबूत करती है. बौद्धिक संपदा सृजन और संरक्षण को सक्रिय रूप से बढ़ावा देकर संस्थान का उद्देश्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, उद्योग सहयोग और स्टार्टअप इनक्यूबेशन को गति देना है, जिससे आत्मनिर्भर भारत और नवाचार-आधारित विकास के राष्ट्रीय मिशन में सार्थक योगदान दिया जा सके.
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विकसित भारत में बनेंगे सहायक : आईआईटी के निदेशक प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल ने बताया कि आईपीआर दाखिलों की यह रिकॉर्ड संख्या उद्देश्यपूर्ण शोध के प्रति आईआईटी जोधपुर की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है. हमारा निरंतर प्रयास ऐसा ज्ञान सृजित करना रहा है जो प्रभाव उत्पन्न करे. ऐसे समाधान जो नैतिक हों, सतत हों और राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप हों. इस उपलब्धि के लिए मैं हमारे संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की प्रतिबद्धता और नवाचार भावना की सराहना करता हूं. यह उपलब्धि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्योग सहभागिता को और सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करती है.
निदेशक ने बताया कि आईपीआर के लाइसेंस मिलने पर शोध उत्पाद और प्रक्रियाओं परिवर्तित होगी, जिससे देश के लिए संपदा सृजन होगी. जो 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने में सहायक होंगे.
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5 साल पहले शून्य था आंकड़ा : आईआईटी जोधपुर में रिसर्च में बढ़ोतरी पिछले कुछ समय में तेज हुई हैं, लेकिन आईपीआर को लेकर काम नहीं हुआ था. 2020 में यह संख्या 0 थी. 2022 में 20 हुए थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 40 तक पहुंचा था, लेकिन 2025 में यह संख्या 86 हो गई. इस साल में आईआईटी जोधपुर के रिकॉर्ड रिसर्च नेशनल और इंटरनेशनल जनरल में प्रकाशित हुए.

