आईआईटी जोधपुर ने बेरोफेन से विकसित किया चमकने वाला पेंट और गैस सेंसर
Borophene का उपयोग हाई-परफॉर्मेंस बैटरियों, सुपर कैपेसिटर्स, उन्नत गैस सेंसर और Nanoelectronics में किया जा सकता है.

Published : May 25, 2026 at 9:25 PM IST
जोधपुर: जोधपुर आईआईटी के वैज्ञानिकों ने मेटेरियल साइंस क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा देने के लिए काम कर रहे हैं. वे परमाणु स्तर (Atomic Scale) पर उन्नत सामग्रियों का निर्माण कर रहे हैं, जिनका प्रभाव ऊर्जा भंडारण (Energy Storage), पर्यावरणीय सेंसर, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और अगली पीढ़ी की इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीकों पर व्यापक रूप से पड़ सकता है. इससे भविष्य के ‘वंडर मटेरियल्स’ ऊर्जा, स्मार्ट सेंसर और स्वयं चमकने वाली सड़कों के लिए नई संभावनाएं विकसित होंगी. यह महत्वपूर्ण शोध कार्य आईआईटी जोधपुर की नैनो सेंस लैब में हो रहा है.
डिपार्टमेंट ऑफ मेटलर्जिकल एंड मैटिरियल इंजीनियरिंग के डॉ. प्रणय रंजन के नेतृत्व में उनकी टीम भविष्य की दो-आयामी (2D) सामग्रियों पर शोध कर रही है-ऐसी अति-पतली सामग्रियां जो केवल कुछ परमाणुओं की मोटाई की होती हैं और जिनमें असाधारण विद्युत, प्रकाशीय तथा यांत्रिक गुण पाए जाते हैं. यहां यह प्रयोगशाला विशेष रूप से Borophene पर कार्य के कारण राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच रही है. Borophene दुनिया की सबसे हल्की और अत्यंत संभावनाशील 2D सामग्रियों में से एक है. इसका उपयोग हाई-परफॉर्मेंस बैटरियों, सुपर कैपेसिटर्स, उन्नत गैस सेंसर और Nanoelectronics में किया जा सकता है. डॉ. प्रणय रंजन ने बताया कि हम बेहद मूलभूत प्रश्न का उत्तर खोज रहे हैं कि क्या परमाणु स्तर पर सामग्री डिजाइन कर सकते हैं, यदि हां तो वे सामग्रियां लोगों के रोजाना उपयोग की जाने वाली तकनीकों को किस प्रकार बेहतर बना सकती हैं. हमारा प्रयास वैज्ञानिक खोज तक सीमित नहीं है. हम चाहते हैं कि ये सामग्रियां प्रयोगशाला से निकलकर ऐसी तकनीकों में बदलें, जो सीधे समाज और उद्योग के लिए उपयोगी हों.
विकसित किया बिना बिजली चमकने वाला पेंट: NanoSense Lab से निकलने वाले सबसे जनसरोकार वाले नवाचारों में से एक है स्वयं चमकने वाली पेंट तकनीक. इसे निजी संस्थानों के सहयोग से विकसित किया है. यह पेंट दिन में सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करता है. रात में Phosphorescence प्रक्रिया से खुद प्रकाश उत्सर्जित करता है. इस तकनीक का तापमान और आर्द्रता (Humidity) परीक्षण सफलतापूर्वक किया जा चुका है. इसका उपयोग Highway Dividers, सड़क मोड़ों, सार्वजनिक सुरक्षा संकेतों, Emergency Exits और कम ऊर्जा खपत वाले Urban Infrastructure में किया जा सकता है.
खतरनाक गैसों की पहचान करने वाले स्मार्ट सेंसर: नैनो सेंस लैब में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से अत्यंत संवेदनशील Borophene आधारित गैस सेंसर भी विकसित किया जा रहा है. ये सेंसर विभिन्न गैसीय वातावरणों के संपर्क में आने पर Borophene की Electrical Resistance में सूक्ष्म परिवर्तनों को मापकर खतरनाक गैसों की पहचान कर सकते हैं. इस शोध का औद्योगिक सुरक्षा, पर्यावरण निगरानी, हेल्थकेयर डायग्नोस्टिक्स और स्मार्ट सिटी टेक्नोलॉजीज में व्यापक महत्व है. डॉ. रंजन ने बताया, महत्वपूर्ण बात है कि इन सेंसरों का परीक्षण केवल नियंत्रित प्रयोगशाला परिस्थितियों में ही नहीं, बल्कि मिश्रित गैसों और बदलती वायुमंडलीय स्थितियों वाले वास्तविक वातावरणों के अनुरूप परिस्थितियों में भी किया जा रहा है.
नैनो सेंस लैब में लिखी जा रही भविष्य की राह: आईआईटी जोधपुर की नैनो सेंस लैब इस संस्थान को भारत में अगली पीढ़ी की Material Science Research करने वाले अग्रणी संस्थानों में स्थापित कर रही है. मौलिक शोध, औद्योगिक सहयोग और बड़े स्तर पर उपयोगी नवाचारों के समन्वय के माध्यम से संस्थान ऐसी तकनीकों का विकास कर रहा है. चाहे वह स्मार्ट ऊर्जा प्रणालियां हों, सुरक्षित सड़कें हों या स्वदेशी Deep-Tech Manufacturing. जैसे-जैसे वैश्विक उद्योग हल्की, तेज और एआई सामग्रियों की ओर बढ़ रहे हैं, आईआईटी जोधपुर का Atom-by-Atom Engineering दृष्टिकोण भविष्य की तकनीकों का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है.
पढ़ें:महत्वपूर्ण खोज : IIT Jodhpur ने खोजा गंभीर संक्रमण का तोड़, यहां जानिए

