IGMC शिमला में बच्चों की रोबोटिक सर्जरी का सफल प्रयोग, पांचों ऑपरेशन रहे कामयाब
हिमाचल में पहली बार पीडियाट्रिक सर्जरी के क्षेत्र रोबोटिक सर्जरी की गई है. IGMC शिमला के डॉक्टरों किया सफल आपरेशन.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 18, 2026 at 7:00 PM IST
शिमला: इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) शिमला के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने बाल चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. विभाग ने हाल ही में 2 से 5 वर्ष की आयु के पांच बच्चों की रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक की. इन सभी ऑपरेशनों की सफलता दर 100 प्रतिशत रही. सर्जरी के माध्यम से बच्चों में किडनी में ब्लॉकेज और आंतों से जुड़ी जटिलताओं का उपचार किया गया.
पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. राजकुमार ठाकुर और रोबोटिक सर्जरी के मेंटर डॉ. पुनीत महाजन ने बताया, "बच्चों में कई जन्मजात बीमारियों और शरीर के विभिन्न हिस्सों में होने वाले ब्लॉकेज का उपचार अब रोबोटिक तकनीक से किया जा रहा है. चयनित मामलों में किडनी और आंतों से जुड़ी ऐसी जटिल समस्याओं का भी रोबोटिक तकनीक से उपचार संभव हो रहा है, जिनके लिए पहले पारंपरिक सर्जरी करनी पड़ती थी.
छोटे चीरे, कम दर्द और तेजी से रिकवरी
डॉक्टरों के अनुसार रोबोटिक सर्जरी में छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिससे ऑपरेशन के बाद बच्चों को अपेक्षाकृत कम दर्द होता है और रिकवरी भी तेजी से होती है. रोबोटिक प्रणाली सर्जन को शरीर के अंदर के हिस्सों को अधिक स्पष्टता और सूक्ष्मता से देखने में मदद करती है. इससे जटिल ऑपरेशन अधिक सटीकता के साथ किए जा सकते हैं.
बच्चे की उम्र, बीमारी और स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत आकलन करने के बाद विशेषज्ञ यह तय करते हैं कि उसके लिए रोबोटिक सर्जरी उपयुक्त है या नहीं. ऑपरेशन के दौरान सर्जन रोबोटिक प्रणाली को नियंत्रित करते हुए छोटे-छोटे चीरे के माध्यम से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हैं. सर्जरी के बाद बच्चे को निगरानी में रखा जाता है और रिकवरी पर लगातार नजर रखी जाती है.
विभाग के अनुसार आवश्यकता और बीमारी के आधार पर 1 से 18 वर्ष तक के बच्चों में रोबोटिक सर्जरी की जा सकती है. हालांकि, हर बच्चे के लिए यह प्रक्रिया आवश्यक नहीं होती और इसका निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सक बच्चे की स्थिति के आधार पर करते हैं.
हिमाचल में पहली बार बच्चों की रोबोटिक सर्जरी
डॉक्टरों ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में पीडियाट्रिक सर्जरी के क्षेत्र में इस तरह की रोबोटिक सर्जरी पहली बार की गई है. पांच बच्चों की सफल सर्जरी के बाद आईजीएमसी में जटिल बाल सर्जरी के लिए रोबोटिक तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं और बढ़ गई हैं. इस दौरान आईजीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल रॉव भी मौजूद रहे.
आईजीएमसी में 112 रोबोटिक सर्जरी पूरी
आईजीएमसी ने रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. प्रदेश में रोबोटिक सर्जरी शुरू होने के करीब पांच महीने के भीतर सर्जरी, गायनी और पीडियाट्रिक सर्जरी विभागों में कुल 112 मरीजों की सफल रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी है. इसके साथ ही आईजीएमसी देश के चुनिंदा सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल हो गया है, जहां इतने कम समय में रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में यह उपलब्धि हासिल की गई है.
करीब 30 हजार रुपये से शुरू होती है लागत
आईजीएमसी में रोबोटिक सर्जरी की लागत निजी अस्पतालों की तुलना में कम रखने का प्रयास किया गया है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार यहां रोबोटिक सर्जरी की लागत करीब 30 हजार रुपये से शुरू होती है. बीमारी, ऑपरेशन की जटिलता और आवश्यक उपचार के अनुसार खर्च अलग-अलग हो सकता है. सरकारी संस्थान में आधुनिक रोबोटिक तकनीक की उपलब्धता से प्रदेश के मरीजों को अपेक्षाकृत कम लागत में अत्याधुनिक उपचार की सुविधा मिलने की उम्मीद है.
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